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डायलिसिस पर था मरीज, नर्स का आया दिल; संबंध बनाते समय मौत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 10, 2023, 02:41 PM IST

नर्स की पहचान 42 वर्षीय पेनलोप विलियम्स के रूप में हुई है। महिला ने स्वीकार किया है कि वह बीते एक साल से मरीज को जानती थी और लगातार उसके साथ संबंध बना रही थी।

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Patient died

Photo : iStock

यूनाइटेड किंगडम के वेल्स से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहां एक नर्स को अस्पताल में भर्ती मरीज के साथ यौन संबंध बनाना भारी पड़ गया। संबंध बनाते समय मरीज की मौत हो गई, जिस कारण नर्स को अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। जानकरी के मुताबिक, नर्स और मरीज घटना के समय पार्किंग के दौरान आपत्तिजनक स्थिति में थे, इसी दौरान उसकी मौत हो गई।

नर्स की पहचान 42 वर्षीय पेनलोप विलियम्स के रूप में हुई है। महिला ने स्वीकार किया है कि वह बीते एक साल से मरीज को जानती थी और लगातार उसके साथ संबंध बना रही थी। द टाइम्स यूके की रिपोर्ट के अनुसार, मरीज की मौत हृदय गति रुकने और क्रोनिक किडनी रोग के कारण हुई।

नर्स ने नहीं बुलाई एम्बुलेंस

रिपोर्ट में कहा गया है कि संभोग के समय जब मरीज को हार्ट अटैक आया और वह गिर गया, उसके बाद नर्स ने एम्बुलेंस नहीं बुलाई। अस्पताल के कर्मचारी जब पार्किंग में पहुंचे तो मरीज नग्न अवस्था में था और उसकी मौत हो चुकी थी। अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया है कि नर्स ने न केवल पेशे की मर्यादा का उल्लंघन किया, बल्कि एम्बुलेंस न बुलाने के कारण एक चिकित्सक के रूप में भी विफल रही।

सहकर्मियों ने दी थी चेतावनी

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला के सहकर्मियों को मरीज के साथ उसके संबंधों की जानकारी थी, उसमें से कुछ लोगों ने नर्स को आगाह भी किया था। इसके बावजूद वह मरीज के साथ संबंध बनाती रही। इतना ही नहीं नर्स ने पुलिस के सामने भी झूठ बोला था। फॉक्स न्यूज के अनुसार, विलियम्स ने शुरू में पुलिस को बताया कि वह मरीज से मिलने केवल तब गई थी जब उसने उसे फेसबुक पर उसकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में संदेश भेजा था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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