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'भारतीय रेल में हर दिन सफर करता है पूरा ऑस्ट्रेलिया'...US President के साथ साझा प्रेसवार्ता में ऐसा क्यों बोले PM Modi?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 23, 2023, 12:26 AM IST

PM Modi Joint Press Statement: पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा, भारत की रेलवे कहने का अर्थ यह है कि हर दिन हमारे यहां रेल के डिब्बे में पूरा ऑस्ट्रेलिया होता है, इतना बड़ा हमारा देश है।

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PM Modi US visit

Photo : ANI

PM Modi Joint Press Statement: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस महत्वपूर्ण वार्ता के बाद उन्होंने साझा प्रेसवार्ता को भी संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, भारत-अमेरिका संबंधों के इतिहास में आज का दिन विशेष महत्व रखता है। आज हुई चर्चाओं और महत्वपूर्ण निर्णयों से हमारी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इसने एक नई दिशा और नई ऊर्जा दी है।

पीएम मोदी ने कहा, हम आर्टेमिस समझौते में शामिल होने के लिए सहमत हुए हैं। हमने अपने अंतरिक्ष सहयोग में एक नई छलांग लगाई है। उन्होंने आगे कहा, भारत-अमेरिका की व्यापार की निवेश साझेदारी दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। आज अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। हमने निर्णय लिया है कि व्यापार से जुड़े लंबित मुद्दों को समाप्त कर नई शुरूआत की जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, स्पेस, क्वांटम और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ाकर हम एक मज़बूत और फ्यूचरिस्टिक साझेदारी कर रहे हैं।

भारतीय रेल के डिब्बे में हर दिन होता है पूरा ऑस्ट्रेलिया

प्रेसवार्ता के दौरान क्लाइमेट चेंज के एक सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, जहां तक भारत का सवाल है, हमारी संस्कृति और परंपरा में पर्यावरण और जलवायु का महत्वपूर्ण स्थान है। पर्यावरण हमारे लिए आस्था का विषय है। हम प्रकृति के दोहन में विश्वास नहीं रखते। भारत न केवल अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करता है बल्कि दुनिया की सुरक्षा के लिए भी काम करता है। हम इसके लिए वैश्विक पहल कर रहे हैं। भारत दुनिया का एकमात्र G20 देश है जिसने पर्यावरण की रक्षा के लिए पेरिस में अपना वादा निभाया है। क्लाइमेट यह हमारे सांस्कृतिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हम एक्सप्लोइटेशन ऑफ नेचर में हम विश्वास नहीं करते हैं। 2030 तक भारत की रेलवे का नेट जीरो का लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, भारत की रेलवे कहने का अर्थ यह है कि हर दिन हमारे यहां रेल के डिब्बे में पूरा ऑस्ट्रेलिया होता है, इतना बड़ा हमारा देश है। हमने दुनिया के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन शुरू किया है और आज दुनिया के कई देश हमारे साथ काम कर रहे हैं। हम देख रहे हैं कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हो रहा है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों की परवाह है, इसलिए हम जलवायु परिवर्तन के संकट में दुनिया का समर्थन करने की वैश्विक जिम्मेदारी ले रहे हैं।

मानवाधिकार के सवाल पर सुनाई खरी-खरी

प्रेसवार्ता के दौरान भारत में मानवाधिकार के हनन पर एक सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, मुझे आश्चर्य है कि आप कह रहे हैं कि लोग कहते हैं। लोग कहते हैं नहीं बल्कि भारत लोकतांत्रिक है। जैसा कि राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा भारत और अमेरिका दोनों के DNA में लोकतंत्र है। लोकतंत्र हमारी रगो में है, लोकतंत्र को हम जीते हैं। हमारे पूर्वजों ने उसे शब्दों में डाला है। हमारा संविधान और हमारी सरकार, और हमने सिद्ध किया है कि डेमोक्रेसी कैन डिलीवरी जब मैं डिलीवरी कहता हूं तब जाति, पंथ, धर्म किसी भी तरह के भेदभाव की वहां पर जगह नहीं होती है। जब आप लोकतंत्र कहते हैं तो पक्षपात का कोई सवाल ही नहीं उठता है। पीएम मोदी ने आगे कहा, भारत में सरकार की योजनाएं सबको मिलती हैं। भारत को लोकतांत्रिक मूल्यों में कोई भेदभाव नहीं है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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