संकटग्रस्त श्रीलंका के राष्ट्रपति का इस्तीफा: मालदीव से पहुंचे नए मुल्क तो बोला सिंगापुर- वो निजी यात्रा पर, नहीं दी है शरण

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 14, 2022, 10:15 PM IST

Sri Lanka Crisis: दरअसल, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में इस साल अप्रैल की शुरुआत में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होने लगे थे। चूंकि, लोग लंबे समय से वहां तेल, खाने-पीने, दवा के बढ़े दाम और बिजली संकट से जूझ रहे हैं, लिहाजा वे महंगाई को मुद्दा बनाते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

संकटग्रस्त श्रीलंका के राष्ट्रपति का इस्तीफा: मालदीव से पहुंचे नए मुल्क तो बोला सिंगापुर- वो निजी यात्रा पर, नहीं दी है शरण
Photo Credit: BCCL

आर्थिक और सियासी संकट में उलझे श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने गुरुवार (14 जुलाई, 2022) को श्रीलंका के स्पीकर के दफ्तर के बयान के हवाले से बताया कि संसद के स्पीकर को राष्ट्रपति का त्याग पत्र मिल गया है।

इस बीच, यह भी जानकारी है कि वह एक नए मुल्क पहुंच गए। मालवीद की राजधानी माले से वह सीधे सिंगापुर गए। समाचार एजेंसी एएनआई ने एक अन्य एजेंसी रॉयटर्स का एक वीडियो साझा करते हुए बताया है कि शाम को राजपक्षे सऊदी एयरलाइंस के विमान से सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट पहुंचे।    

इस बीच, सोशल मीडिया पर 'श्रीलंका डेली मिरर' की ओर से एक फोटो शेयर किया गया, जिसमें राजपक्षे और प्रथम महिला इओमा (पत्नी) को चांगी हवाई अड्डे के टर्मिनल तीन पर देखा गया। श्रीलंका के डेली मिरर ने यह फोटो ट्वीट करते हुए यह भी बताया कि फोटो किसी अन्य यात्री ने खींची थी। 

वहीं, सिंगापुर विदेश मंत्रालय के हवाले से 'रॉयटर्स' ने जानकारी दी कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे निजी यात्रा के लिए आए हैं। उन्होंने शरण नहीं मांगी है और न ही उन्हें शरण दी गई है। 

उधर, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "हम श्रीलंका की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आपने हमारे उच्चायोग की टिप्पणियां देखी होंगी। हमने स्पष्ट रूप से किसी भी भूमिका से इनकार किया है या उनके (राजपक्षे) प्रस्थान या श्रीलंका से उनकी यात्रा की सुविधा प्रदान की है।" 

उन्होंने आगे बताया- मैं अनुमान लगाने की स्थिति में नहीं हूं कि वह कहां है। मैंने अभी मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं कि वह सिंगापुर में हैं। हम लोकतांत्रिक तरीकों और संवैधानिक ढांचे के जरिए श्रीलंका के लोगों और उनकी आकांक्षाओं के साथ खड़े रहेंगे।

दरअसल, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में इस साल अप्रैल की शुरुआत में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होने लगे थे। चूंकि, लोग लंबे समय से वहां तेल, खाने-पीने, दवा के बढ़े दाम और बिजली संकट से जूझ रहे हैं, लिहाजा वे महंगाई को मुद्दा बनाते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका में महंगाई 50% से ऊपर चल रही है। 

End of Article