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Afghan Girl रजिया मुरादी ने अपनी इस कामयाबी से Taliban को ऐसे दिखाया आइना- Video

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलEdited by: रवि वैश्य
  • Updated Mar 7, 2023, 10:35 PM IST

वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में स्नातकोत्तर (लोक प्रशासन) में स्वर्ण पदक पाने वाली अफगान छात्रा रजिया मुरादी ने कहा है कि तालिबान को यह समझने की जरूरत है कि शिक्षा और विकास आपस में जुड़े हुए हैं।

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रजिया ने गुजरात के सूरत की एक यूनिवर्सिटी से टॉप किया है

अफगानिस्तान में तालिबान राज आने के बाद इस्लामिक कानून सख्त रूप से लागू हो गया है, पिछले साल दिसंबर में तालिबान ने लड़कियों के स्कूल-कॉलेज जाने पर रोक लगा दी थी ऐसा माना जाता है कि करीब 90 हजार लड़कियां इससे प्रभावित हुई हैं, महिलाओं के लिए औपचारिक शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया है वहीं रजिया मुरादी (Afghan Girl Razia Muradi) ने तालिबान (Taliban) की कट्टरपंथी नीति को मुंहतोड़ जवाब देते हुए गुजरात के सूरत की एक यूनिवर्सिटी से टॉप किया है, उन्होंने एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में गोल्ड मेडल जीता है.

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को यहां दीक्षांत समारोह में मुरादी को स्वर्ण पदक प्रदान किया। मुरादी ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान को अपनी सोच में बदलाव करने तथा शिक्षा के महत्व को समझने की जरूरत है।मुरादी 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान के काबिज होने से कुछ महीने पहले भारत आयी थीं और वह लोक प्रशासन में स्नातोकोत्तर की पढ़ाई करने सूरत पहुंचीं। उन्हें भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद से छात्रवृति मिली थी।

उन्होंने कहा, 'तालिबान की विचारधारा एवं भेदभाव वाली सोच मुख्य समस्या है। अफगानिस्तान में तालिबान के आने से पहले जनजीवन सामान्य था। लड़कियों को स्कूल जाने और उच्च शिक्षा हासिल करने की अनुमति थी। तब तक कोई पाबंदी नहीं थी।' भारत आने के बाद अब तक घर नहीं लौटीं मुरादी ने कहा, 'उन्हें (तालिबान को) यह समझने की जरूरत है कि शिक्षा एवं विकास आपस में जुड़े हैं। यदि वे विकास चाहते हैं तो उन्हें शिक्षा के मौलिक अधिकार का सम्मान करना चाहिए।'

स्वर्ण पदक पाने के बाद उन्होंने अफगानिस्तान में अपने माता-पिता को फोन किया और उन्हें उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। वह अब इसी विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं और उन्हें एक दिन अफगानिस्तान लौटने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'मैं आशा करती हूं कि जबतक मैं पीएचडी पूरा करूंगी तब तक मेरे देश में चीजें सही हो जाएंगी, ताकि मैं घर लौट सकूं और अपनी मातृभूमि की सेवा कर सकूं।'

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