Jimmy Carter Death: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर का निधन हो गया है, वो 100 वर्ष के थे। जिमी कार्टर का कार्यकाल कैंप डेविड समझौते के लिए याद किया जाता है, जब मिस्त्र और इजराइल के बीच अहम समझौता हुआ था। व्यवसायी, नौसेना अधिकारी, नेता, वार्ताकार, लेखक एवं मानवतावादी कार्टर ने एक ऐसा मार्ग बनाया जो आज भी राजनीतिक मान्यताओं को चुनौती देता है और वह अमेरिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले 45 लोगों में से एक बने।
वियतनाम युद्ध के बाद जीता था राष्ट्रपति चुनाव
वाटरगेट कांड और वियतनाम युद्ध के बाद राष्ट्रपति पद का चुनाव जिमी कार्टर ने जीता था। जिमी कार्टर एक मूंगफली किसान थे, जो अमेरिका के राष्ट्रपति पद तक पहुंचे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने जिमी कार्टर के निधन की सूचना देते हुए कहा- "यह एक दुखद दिन है।आज, मेरे विचार से, अमेरिका और दुनिया ने एक महान नेता खो दिया है। वो एक राजनेता और मानवतावादी थे।
काफी समय से बीमार था कार्टर
कार्टर 1977 से 1981 तक राष्ट्रपति रहे। ‘कार्टर सेंटर’ ने बताया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति कार्टर का रविवार को निधन हो गया। वह एक साल से अधिक समय से जॉर्जिया के छोटे से शहर प्लेन्स में अपने आवास में चिकित्सकीय देखरेख में थे।
डोनाल्ड ट्रंप ने जाताय शोक
वहीं अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जिम्मी के राष्ट्रपति बनने के समय हमारा देश नाजुक दौर से गुजर रहा था और उन्होंने अमेरिकी लोगों के जीवन में सुधार के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास किए। इसके लिए, हम सब उनके आभारी हैं। इस मुश्किल समय में मैं और मेरी पत्नी कार्टर के परिवार और उनके प्रियजनों के बारे में सोच रहे हैं। हम सभी से अनुरोध करते हैं कि उनको अपने दुआओं में रखें।
किए थे कई उल्लेखनीय काम
उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति कार्टर ने डेमोक्रेट पार्टी की ओर से 1977 से 1981 तक एक कार्यकाल पूरा किया। उनके समय में इजरायल और मिस्र के बीच कैंप डेविड समझौते जैसी उपलब्धियां थीं। कार्टर ने राष्ट्रपति पद के बाद भी असाधारण काम किए और 2002 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार जीता। उन्हें यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण हल खोजने, लोकतंत्र और मानवाधिकार बढ़ाने, तथा आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए दिया गया।
भारत दौरा
कार्टर 1978 में भारत यात्रा के दौरान अपनी पत्नी के साथ आए थे। उन्होंने राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी और प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से मुलाकात की थी और संसद को संबोधित किया था। गुरुग्राम के एक गांव का नाम, जहां वे गए थे, उनके सम्मान में "कार्टरपुरी" रखा गया, जो आज भी है।
