2024 Becomes Warmest Year: 2025 की शुरुआत से ही ठंड ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है और पूरे उत्तर भारत में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। वहीं, दुनिया के कई देशों में ऐसे ही हालात हैं और भयंकर बर्फबारी का दौर जारी है। उधर, यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस ने शुक्रवार कहा कि वर्ष 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा और ऐसा पहला वर्ष रहा जब वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
जनवरी से जून तक का हर माह अब तक का सबसे गर्म
यूरोपीय जलवायु एजेंसी ने कहा कि 2024 में जनवरी से जून तक का हर माह अब तक का सबसे गर्म माह रहा। जुलाई से दिसंबर तक, अगस्त को छोड़कर हर माह 2023 के बाद रिकॉर्ड स्तर पर दूसरा सबसे गर्म माह रहा। कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (सी3एस) के वैज्ञानिकों के अनुसार 1850 में जब से वैश्विक तापमान की माप शुरू हुई है तब से 2024 सबसे गर्म वर्ष रहा।
औसत वैश्विक तापमान 15.1 डिग्री सेल्सियस रहा जो 1991-2020 के औसत से 0.72 डिग्री अधिक और 2023 से 0.12 डिग्री अधिक है। वैज्ञानिकों ने पाया कि 2024 में औसत तापमान 1850-1900 की आधार रेखा से 1.60 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। वैज्ञानिकों ने नोट किया कि 2024 में औसत तापमान 1850-1900 बेसलाइन से 1.60 डिग्री सेल्सियस अधिक था, यह जीवाश्म ईंधन जलाने जैसी मानवीय गतिविधियों के शुरू होने से पहले की अवधि थी, जिसका जलवायु पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा था।
1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान
यह पहली बार है कि पूरे कैलेंडर वर्ष के लिए औसत वैश्विक तापमान 1850-1900 के औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया अब एक ऐसे चरण में प्रवेश कर रही है जहां तापमान लगातार इस सीमा से ऊपर रहेगा। जलवायु कार्यकर्ता और सतत संपदा क्लाइमेट फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक हरजीत सिंह ने कहा कि दुनिया एक नई जलवायु वास्तविकता में प्रवेश कर रही है जहां अत्यधिक गर्मी, विनाशकारी बाढ़ और तीव्र तूफान लगातार और गंभीर हो जाएंगे।
उन्होंने कहा, इस भविष्य की तैयारी के लिए हमें समाज के हर स्तर पर अनुकूलन प्रयासों को तत्काल बढ़ाना होगा और अपने घरों, शहरों और बुनियादी ढांचे को फिर से डिजाइन करना, और पानी, भोजन और ऊर्जा प्रणालियों का प्रबंधन करने के तरीके को बदलना होगा। सिंह ने कहा कि दुनिया को जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से और निष्पक्षता से आगे बढ़ना चाहिए, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी पीछे न रह जाए और अमीर देशों पर साहसिक कदम उठाने की बड़ी जिम्मेदारी है।
सी3एस वैज्ञानिकों ने कहा कि 2024 में वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैस का स्तर अब तक के अपने उच्चतम वार्षिक स्तर पर पहुंच जाएगा। कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर 2023 की तुलना में 2.9 भाग प्रति मिलियन (पीपीएम) अधिक था, जो 422 पीपीएम तक पहुंच गया, जबकि मीथेन का स्तर 3 भाग प्रति बिलियन (पीपीबी) बढ़कर 1897 पीपीबी तक पहुंच गया।
