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श्रीलंका में 18 भारतीय मछुआरे गिरफ्तार, अवैध रूप से मछली पकड़ने का आरोप

World News: श्रीलंका में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में 18 भारतीय मछुआरे गिरफ्तार हुए हैं, श्रीलंकाई नौसेना ने ये कार्रवाई की है। नौसेना का आरोप है कि ये मछुआरे उनके जलक्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ रहे थे। एक मीडिया रिपोर्ट में इस कार्रवाई के बारे में जानकारी साझा की गई है।

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सांकेतिक तस्वीर।

India-Sri Lanka: श्रीलंकाई नौसेना ने अपने जलक्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में 18 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया है और मछली पकड़ने वाली उनकी तीन नौकाओं को जब्त कर लिया है। मीडिया की एक रिपोर्ट में रविवार को यह जानकारी दी गयी। समाचार पोर्टल 'द न्यूज फर्स्ट' की रिपोर्ट के अनुसार मछुआरों को शनिवार रात चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान डेल्फ्ट द्वीप के पास उत्तरी सागर से गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार हुए मछुआरों के साथ अब क्या होगा?

श्रीलंका की नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन गायन विक्रमसूर्या ने कहा कि गिरफ्तार मछुआरों को आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए कांकेसंतुरई बंदरगाह ले जाया जाएगा। पिछले सप्ताह, चार भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया गया था और श्रीलंकाई नौसेना ने द्वीपीय देश के जलक्षेत्र में अवैध शिकार करने के आरोप में उनके ट्रॉलर (मछली पकड़ने में इस्तेमाल की जाने वाली नौका) को जब्त कर लिया था।

अब तक 180 से अधिक भारतीय मछुआरे हुए गिरफ्तार

श्रीलंकाई अधिकारियों ने बताया कि ताजा घटना से पहले 2024 में श्रीलंकाई जलक्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में 180 से अधिक भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया गया था और उनके 25 ट्रॉलर जब्त किए गए थे। इनमें से अधिकतर घटनाएं पाक जलडमरूमध्य में होती हैं, जो तमिलनाडु को श्रीलंका के उत्तरी सिरे से अलग करने वाली एक संकरी जलपट्टी है। यह दोनों देशों के मछुआरों के लिए मछली पकड़ने का एक बेहतर स्थान है।

भारत-श्रीलंका के बीच संबंधों में एक विवादास्पद मुद्दा

मछुआरों का मुद्दा भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों में एक विवादास्पद मुद्दा है, जिसमें श्रीलंकाई नौसेना के जवान कभी-कभी पाक जलडमरूमध्य में भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी भी करते हैं और अवैध रूप से श्रीलंका के जलक्षेत्र में प्रवेश करने के लिए उनकी नौकाओं को जब्त कर लेते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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