Viral Video: अमेरिका में राष्ट्रपति बनने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व डेमोक्रेट तुलसी गबार्ड को राष्ट्रीय खुफिया विभाग का अगले निदेशक के तौर पर नियुक्त किया है। भारतीय मूल की तुलसी गबार्ड को इस जिम्मेदारी मिलने के साथ ही उनके बारे में एक्स पर कई पोस्ट किए जा रहे हैं। कई पोस्ट्स में वैश्विक नेताओं से उनकी मुलाकात के वीडियो भी पोस्ट किए गए हैं। मगर, सबसे ज्यादा जिस वीडियो की चर्चा वो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो है। इसमें तुलसी को पीएम मोदी के नमस्ते करके अभिवादन करते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है।
इंटरनेट पर वीडियो वायरल
समाचार एजेंसी एएनआई के यूट्यूब पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया, 'जब 2014 में आने वाली यूएस इंटेल चीफ तुलसी गबार्ड ने पीएम मोदी को हाथ जोड़कर अभिवादन किया।' वीडियो में तुलसी गबार्ड ने पीएम मोदी को माला पहनाकर उनसे हाथ मिलाया और फिर नमस्ते कहकर उनका अभिवादन किया। इस वीडियो में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी को एक उपहार देते हुए भी दिखाया गया है। बता दें कि, उन्होंने पीएम मोदी को श्रीमद्भगवदगीता की प्रति भी भेंट की थी।
तुलसी के बारे में ट्रंप का बयान
गौरतलब है कि, डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड के बारे में कहा कि, 'मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि पूर्व कांग्रेस सदस्य, लेफ्टिनेंट कर्नल तुलसी गबार्ड, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) के रूप में काम करेंगी। दो दशकों से अधिक समय से, तुलसी ने हमारे देश और सभी अमेरिकियों की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी है। डेमोक्रेट राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन के लिए एक पूर्व उम्मीदवार के रूप में, उन्हें दोनों पार्टियों में व्यापक समर्थन प्राप्त है। अब वह एक गौरवशाली रिपब्लिकन हैं! मुझे पता है कि तुलसी हमारे खुफिया समुदाय में अपने शानदार करियर को परिभाषित करने वाली निडर भावना लाएंगी, हमारे संवैधानिक अधिकारों की वकालत करेंगी और ताकत के माध्यम से शांति सुनिश्चित करेंगी। यह हम सभी को गौरवान्वित करेगा!'
कौन हैं तुलसी गबार्ड
तुलसी गबार्ड अमेरिका के समोआ में जन्मी थीं। इनका पालन-पोषण मुख्य रूप से हवाई में हुआ। 21 वर्ष की आयु में हवाई के प्रतिनिधि सभा में सीट हासिल करने के बाद उनका राजनीतिक करियर कुछ समय के लिए रुक गया। तत्पश्चात, वह हवाई का प्रतिनिधित्व करने के लिए कांग्रेस में सीट जीतकर लौटीं। अमेरिकी सदन की पहली हिंदू सदस्य बनकर उन्होंने इतिहास रचा और फिर सदन में ही श्रीमद्भगवदगीता पर हाथ रखकर पद की शपथ ली।
