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8 साल का सन्नाटा खत्म! बिहार से एयरलिफ्ट होकर बक्सा पहुंची 3 साल की बाघिन, देखें VIDEO

VIDEO: पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में करीब 8 साल बाद बाघों का सन्नाटा टूटने जा रहा है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से 3 साल की एक बाघिन को हासीमारा एयरफोर्स स्टेशन के जरिए एयरलिफ्ट कर लाया गया है। 2 अक्टूबर को इसे कोर जोन में रिलीज किया जाएगा।

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आठ साल का इंतजार खत्म

Video: पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व (Buxa Tiger Reserve) के लिए एक एतिहासिक और बेहद खुशखबरी वाली खबर सामने आई है। करीब आठ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद बक्सा के जंगलों में एक बार फिर बाघ की दहाड़ सुनने की उम्मीद जगी है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से तीन साल की एक बाघिन को हासीमारा एयरफोर्स स्टेशन के जरिए एयरलिफ्ट करके बक्सा पहुंचाया गया है। पूर्वी भारत में बाघों को फिर से बसाने की दिशा में यह अपने आप में पहली और अनूठी पहल मानी जा रही है।

    एयरफोर्स की मदद से स्पेशल शिफ्टिंग

    वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बाघिन बुधवार सुबह करीब 6:40 बजे हासीमारा एयर फोर्स बेस पहुंची। वहां से सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का पूरा ध्यान रखते हुए विशेष वाहन से उसे पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व लाया गया। फिलहाल, बाघिन को डॉक्टरों और विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है। योजना के मुताबिक, 2 अक्टूबर को इसे रिजर्व के कोर जोन में छोड़ दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि सुरक्षा के लिहाज से बाघिन को रेडियो-कॉलर पहनाया गया है। रिजर्व में छोड़े जाने के बाद उसकी हर गतिविधि, चाल और नए माहौल में ढलने की प्रक्रिया पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। वन विभाग का कहना है कि यह निगरानी अभियान की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    8 साल का लंबा संघर्ष

    नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की 'स्टेटस ऑफ टाइगर्स इन इंडिया-2018' रिपोर्ट में बक्सा, डम्पा और पलामू टाइगर रिजर्व में एक भी बाघ न होने की पुष्टि की गई थी। हालांकि, रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया था कि यदि बक्सा में पर्याप्त शिकार बहाल किया जाए, तो यहां बाघों को दोबारा बसाया जा सकता है। इसी सुझाव पर अमल करते हुए वन विभाग ने पिछले 8 सालों में बक्सा के इकोसिस्टम और प्रे-बेस को मजबूत किया, जिसके बाद यह ऐतिहासिक एयरलिफ्ट संभव हो सका। राज्य वन विभाग की योजना केवल एक बाघिन तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दो सालों के भीतर कम से कम छह और बाघ-बाघिनों को बक्सा लाने की तैयारी है। इसके लिए अन्य राज्यों के साथ बातचीत जारी है। मौजूदा बाघिन के अनुकूलन को देखने के बाद आगे का चरण शुरू किया जाएगा।

    Pooja Mehta
    पूजा मेहताauthor

    पूजा मेहता एक वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार हैं, जिन्हें रिपोर्टिंग का लगभग 15 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राजनीति, आतंकवाद, आंतरिक संघर्ष, रक्षा, पर्यावरण और अपराध पर व्यापक रिपोर्टिंग की है, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों पर गहरा फोकस रखते हुए। संघर्षग्रस्त इलाकों से उनकी ज़मीनी रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों की गहन समझ उन्हें पैनी दृष्टि और विश्वसनीय विश्लेषण के लिए अलग पहचान दिलाती है। वह प्रमाणित Defence Correspondent हैं और अमेरिकी विदेश विभाग के प्रतिष्ठित International Visitor Leadership Program (IVLP) की एलुमनी भी हैं, जिससे विदेशी नीति, सुरक्षा और सामरिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई है।

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