Ajab Gajab News: बच्चों के जन्म लेते ही उसकी सारी जिम्मेदारी माता-पिता की होती है। उसे खाना खिलाने से लेकर बाकी चीजें सिखाने की जिम्मेदारी भी माता-पिता की ही होती है। बच्चों को पॉटी कराने से लेकर उसे जाना सिखाने की जिम्मेदारी भी माता-पिता ही पूरी करते हैं। हालांकि, इन दिनों माता-पिता अपने काम में इतने बिजी होते हैं कि बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते। दरअसल, आजकल मां और पिता दोनो कामकाजी हो गए हैं। दोनों का अपना करियर होता है। इसमें वो इतना ज्यादा मशगूल हो जाते हैं कि अपने बच्चों की परवरिश पर ध्यान नहीं दे पाते हैं।
बड़े बच्चे भी नहीं सीख पाए टॉयलेट जाने का सलीका
इस लापारवाही का नतीजा स्विटजरलैंड के बच्चे झेल रहे हैं। स्विटजरलैंड से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। आपको भी इस मामले के बारे में जानकर समझ नहीं आएगा कि क्या प्रतिक्रिया दें। दरअसल, स्विटजरलैंड में 11-11 साल के बच्चे डायपर पहनकर स्कूल जा रहे हैं। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है? दरअसल, उनके माता-पिता उन्हें टॉयलेट जाने का सलीका नहीं सिखा पा रहे। इस कारण उन्हें डायपर पहनकर स्कूल जाना पड़ रहा है। यह मामला एक तरह से चिंताजनक भी है। इस कारण वहां के शिक्षकों की नींद उड़ गई है।
पूरी दुनिया के लिए बड़ी समस्या
अमूमन, टॉयलेट जाने की ट्रेनिंग बच्चों को पैदा होने के 18 से 24 महीनों में ही दे दी जाती है। वहीं 11 साल के बच्चे भी यह सीख नहीं पाए हैं। अब वहां के शिक्षक परेशान हैं कि आखिर वो बच्चों को पढ़ाये या उन्हें टॉयलेट जाना सिखाएं। स्विस फेडरेशन ऑफ टीचर्स के हेड डगमार रोसलर ने इस बढ़ती समस्या के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब 11 साल के बच्चे डायपर में स्कूल आते हैं तो यह चिंता का विषय है। माता-पिता को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए की बच्चे स्कूलों में डायपर पहन कर न आयें। शिक्षकों का काम उनका डायपर बदलना नहीं है। स्कूल में डायपर पहनने वाले छात्रों का मुद्दा सिर्फ स्विट्जरलैंड तक ही सीमित नहीं है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क के माता-पिता भी अपने बच्चों को सही से शौचालय उपयोग करना नहीं सिखा पा रहे हैं।
