Kippah Significance: इजरायल में कई पुरुषों के सिर पर एक छोटी, गोल और बिना किनारे वाली टोपी नजर आती है। पहली बार देखने पर यह किसी साधारण फैशन एक्सेसरी जैसी लग सकती है, लेकिन असल में इसका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस टोपी को Kippah कहा जाता है। हिब्रू भाषा में 'किप्पा' का अर्थ गुंबद या डोम होता है, क्योंकि इसका आकार सिर पर गुंबद जैसा दिखता है। इसे यिडिश भाषा में 'यार्मुल्के' भी कहा जाता है। अंग्रेजी में कई लोग इसे स्कलकैप के नाम से जानते हैं। यह टोपी सिर के ऊपरी हिस्से को ही ढकती है और आमतौर पर छोटी होती है।
इजरायल में कई तरह की होती है किप्पा
इजरायल में बहुत से यहूदी पुरुष (Jewish skullcap) इसे रोजाना पहनते हैं, खासकर जो धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। किप्पा पहनने का मुख्य कारण धार्मिक आस्था है। यहूदी परंपरा के अनुसार सिर ढकना ईश्वर के प्रति सम्मान और विनम्रता दिखाने का प्रतीक है। इसका मतलब यह माना जाता है कि इंसान हमेशा यह याद रखे कि ईश्वर उससे ऊपर है। इस सोच के कारण सिर ढकना नम्रता और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक ग्रंथों (Israel cultural identity) और परंपराओं में इसका उल्लेख मिलता है। इजरायल में किप्पा कई तरह की होती है। काले रंग की बड़ी किप्पा अक्सर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के लोग पहनते हैं।
रंग-बिरंगी और बुनी हुई किप्पा मॉडर्न ऑर्थोडॉक्स या नेशनल रिलीजियस समुदाय में लोकप्रिय है। सादी काली या मखमली किप्पा भी पारंपरिक रूप से पहनी जाती है। कुछ यहूदी समुदायों में महिलाएं भी किप्पा पहनती हैं, खासकर रिफॉर्म और कंजर्वेटिव परंपराओं में। आज के समय में किप्पा सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि यहूदी पहचान का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। यह छोटी-सी टोपी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है।
