Viral Post: कर्नाटक में कन्नड़ भाषा विवाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। बेंगलुरू में एक केस के सामने आने के बाद इस मामले पर एक बार फिर महत्वपूर्ण बहस छिड़ गई है। दरअसल, बेंगलुरू को अपनी बहुसांस्कृतिक आबादी के लिए जाना जाता है। हाल ही में दिल्ली के एक कंटेंट क्रिएटर ने एक्स पोस्ट ने कन्नड़ भाषा विवाद पर ऑटो ड्राइवर की प्रतिक्रिया का माकूल जवाब दिया। इस जवाब के सामने के आने के बाद कई यूजर्स ने इस पर अपने विचार साझा किया।
@ThePlacardGuy नामक यूजर मधुर ने कर्नाटक ऑटोरिक्शा की एक तस्वीर शेयर की। इसमें गैर-कन्नड़ भाषियों को संबोधित एक संदेश था। ऑटो के पीछे छपे संदेश में लिखा था, 'तुम कर्नाटक में हो, कन्नड़ सीखो। अपना एटीट्यूड मत दिखाओ। तुम यहां भीख मांगने आते हो।' कंटेंट क्रिएटर ने बुधवार को एक्स पर तस्वीर शेयर की, साथ ही लोगों से अपील की कि वे काम के अवसरों के लिए राजधानी को ही चुनें। मधुर ने लिखा, 'मैं एक बार फिर कह रहा हूं कि दिल्ली आइए और अगर आप हिन्दी नहीं जानते या नहीं बोलना चाहते तो उसमें बात न करें, बल्कि अंग्रेजी या सांकेतिक भाषा या जो भी सुविधाजनक हो, उसमें बात करें। हिन्दी में बात न करने पर कोई भी आपसे अभद्र व्यवहार नहीं करेगा और निश्चित रूप से कोई भी आपसे यह नहीं कहेगा कि आप दिल्ली में भीख मांगने आए हैं।'
एक्स यूजर ने कहा कि, 'हम जानते हैं कि अगर आप काम के लिए दिल्ली आए हैं, तो इसका कारण यह है कि दिल्ली के लोग उस काम के लिए पर्याप्त कुशल नहीं हैं, इसलिए किसी ऐसे व्यक्ति को वह नौकरी मिल गई/उसने वह व्यवसाय शुरू कर दिया जो उस काम को दिल्ली के लोगों से बेहतर जानता था। हिन्दी में बात न करने के लिए कोई नफरत नहीं, आप सभी का स्वागत है! प्रवासियों की आवाजाही से शहर की अर्थव्यवस्था को मदद मिलती है। यह सिर्फ दिल्ली नहीं है जो आपको नौकरी/रोटी/पैसा दे रही है, यह दोनों तरह से है, आप दिल्लीवासियों को भी रोज़गार दे रहे हैं, कैब वाले, सब्ज़ी वाले, डिलीवरी बॉय, आपके घर के मालिक, हर कोई आपकी वजह से अपनी आजीविका कमा रहा है। हम आभारी हैं कि आपने दिल्ली को अपने गंतव्य के रूप में चुना। यहां अपना समय मज़े से बिताएं! चीयर्स।'
इस पोस्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा और इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जहां कुछ लोग कंटेंट क्रिएटर से सहमत थे, वहीं अन्य ने इस दलील का विरोध किया। एक यूजर ने लिखा, 'मैं सहमत हूं। दिल्ली में प्रदूषण, पानी, सुरक्षा जैसी कई समस्याएं हैं, लेकिन यह नहीं है। हम हर किसी का स्वागत करते हैं और यहां तक कि हमें खुशी होती है जब हम देखते हैं कि दूसरे राज्यों से लोग यहां आकर रहते हैं।' दूसरे ने कहा कि, 'इन कार्टूनों को यह समझना चाहिए कि यह कर्नाटक में कोई सोने की खान नहीं है जिसने लोगों को वहां आकर्षित किया है, यह विभिन्न राज्यों के उन लोगों की उपस्थिति है जिसने बेंगलुरु को महानगरीय शहर बनाया है।' तीसरे यूजर ने कहा कि, 'दूसरी भाषा बोलने वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग बंद होना चाहिए। मैं भाषाई कट्टरता के खिलाफ हूं और भाषाई कट्टरतावादी लोगों से घृणा करता हूं।'
वहीं, एक अन्य अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, 'चिंता इस तथ्य से उपजी है कि उत्तर से कर्नाटक आने वाले कई लोग अक्सर सालों तक यहीं रहते हैं, अपनी आजीविका बनाते हैं, फिर भी स्थानीय भाषा सीखने के लिए बहुत कम या बिल्कुल भी प्रयास नहीं करते हैं। यहां तक कि बुनियादी बातचीत वाली कन्नड़ को भी अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई मामलों में, यह अपेक्षा की जाती है कि हर कोई, यहां तक कि एक स्थानीय रिक्शा चालक भी हिन्दी या अंग्रेजी में बात करे। क्या यह उचित अपेक्षा है? स्थानीय समुदाय आम तौर पर केवल न्यूनतम प्रयास की मांग करते हैं, ताकि सम्मानजनक और कार्यात्मक रूप से संवाद करने के लिए पर्याप्त कन्नड़ सीखी जा सके। यह कोई अनुचित अनुरोध नहीं है।' एक अन्य ने लिखा, 'जब मैं दिल्ली में था तो हिन्दी न बोल पाने के कारण मुझे बहुत परेशान किया जाता था और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं तब एक बच्चा ही था! मेरी मां का मजाक उड़ाया जाता था, क्योंकि मैं टूटी फूटी हिन्दी बोलता था, मुझे मद्रासी कहा जाता था और मेरी खूब रैगिंग की जाती थी। क्या आपको सच में लगता है कि वहां के लोग संत हैं और असभ्य नहीं हैं?' एक यूजर ने लिखा, 'मेरी मातृभाषा तेलुगू है और मैंने अपना पूरा जीवन बेंगलुरू में बिताया है। कन्नड़ लोग बहुत मेहमाननवाज़ हैं। बिना किसी का अनादर किए, अगर आप दो-चार शब्द बोल दें, तो वे बहुत गर्मजोशी से पेश आते हैं।'
