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गजब: 82 साल तक दुनिया में जिंदा रहा, फिर भी नहीं जानता औरत कैसी होती है, चौंकाने वाली सच्चाई

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Apr 11, 2023, 03:55 PM IST

82 साल की उम्र में एक शख्स की मृत्यु होती है, लेकिन आश्चर्य वाली बात ये है कि उसे अपनी पूरी जिंदगी ये नहीं पता चल सका कि आखिर एक महिला कैसी होती है। आइए जानते हैं पूरी स्टोरी...

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मिहेलो टोलोटोस की तस्वीर (फोटो साभारः ट्विटर @mrwtffacts)

KEY HIGHLIGHTS
  • 82 साल की उम्र में हुई थी शख्स की मौत
  • पूरे जीवन कभी महिलाओं को देख नहीं पाया
  • महिलाओं होती कैसी है ये भी नहीं मालूम

Man who never saw a woman: ये दुनिया जितनी विचित्र है, उतनी ही यहां के लोग। यहां के लोगों के बारे में जितनी परिभाषाएं दी जाए, उतनी कम है। कई ऐसे लोग हैं, जिनके बारे में जानने के बाद शायद अपने कानों पर भरोसा ना हो, उनके बारे में पढ़ने के बाद अपनी आंखों पर भी भरोसा ना हो। ऐसे-ऐसे लोग दुनिया में पड़े हुए हैं। आज हम बात करेंगे, ऐसे ही एक शख्स की, जिसकी पूरी जिंदगी किताब का एक काल्पनिक किरदार बनकर रह गई।

दरअसल, एक शख्स 82 साल तक इस जिंदा रहा, बिना यह जाने कि महिलाएं भी हमारे समाज का हिस्सा है। वह अपने आखिरी समय तक महिलाओं को एक काल्पनिक कथा का एक काल्पनिक हिस्सा मानता था। यहां तक कि वह ज्यादा लोगों से भी नहीं मिला। यह कोई किताब या फिल्म का कहानी नहीं है बल्कि एक असली किरदार है, जो ग्रीस के हल्‍कीदिकी का रहने वाला था। 1856 में जन्मे इस शख्स का नाम मिहेलो टोलोटोस (Mihailo Tolotos)था। जन्म के कुछ समय बाद ही उसकी मां की मौत हो गई, तभी से ही माउंट एथोस के एक मठ में रहने लगा, जिसका पालन-पोषण रूढ़िवादी भिक्षुओं ने किया।

कभी मठ से बाहर ही नहीं गए

उस मठ के नियम काफी सख्‍त थे, जहां ना तो महिलाओं को आने की अनुमति थी और ना ही पशुओं को। यह कानून हजार सालों से इस मठ का हिस्सा बना हुआ है, जो आज तक चल रहा है। ऐसे में टोलोटोस ने कभी मठ नहीं छोड़ा, जिसका परिणाम आप सब सुन रहे हैं। हालांकि, ये नियम सिर्फ अविवाहित रहने के लिए था और यहां के भिक्षु बाहर जा सकते थें, लोगों से मिल सकते थें, दुनिया घूम सकते थें। 1938 में जब उसकी मौत हुई तो उसे भी बाकी भिक्षुओं की तरह दफन कर दिया गया।

टोलोटोस ने कभी किसी महिला को नहीं देखा

ऐसे में इस मठ के लोगों का मानना है कि टोलोटोस दुनिया के एकमात्र ऐसे इंसान थे, जिन्होंने अपनी पूरी में कभी किसी महिला को नहीं देखा और न हीं वे जानते थें कि आखिर महिला होती कैसी है? इसके अलावा उन्होंने कभी कार या हवाई जहाज को भी नहीं देखा था। वर्तमान समय में इस मठ (माउंट एथोस) को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहां हर साल काफी टूरिस्ट भी घूमने जाते हैं और टोलोटोस के बारे में करीब से जानने की कोशिश करते हैं।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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