VIDEO: इस दुनिया में एक से एक अनोखी चीजें मौजूद हैं। कुछ चीजों के बारे में हम आप जानते हैं, जबकि कईयों से अब तक अनजान हैं। इतना ही नहीं समय-समय पर कई चौंकाने वाले खुलासे होते रहते हैं, जिनके बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। वहीं, कुछ चीजें काफी रहस्यमयी होती हैं, जिनपर कई बार यकीन तक करना मुश्किल हो जाता है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है कर्नाटक के बेलगावी (Belagavi) से, जहां 300 साल पुरानी विरासत एक बार फिर जिंदा हो गई है। आलम ये है कि उस विरासत को देखने के लिए लगातर लोग पहुंच रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, बेलगावी जिले के लोग एक बार फिर सदियों पुरानी विरासत से रू-ब-रू हो रहे हैं। दरअसल, यहां 300 साल पुरानी एक बावड़ी है, जो कचरे और मलबे के नीचे दब गई थी। लेकिन, एक बार फिर इस बावड़ी का कायकल्प किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि 80 फीट गहरी इस बावड़ी को15वीं और 17वीं सदी के बीच आदिल शाही वंश के दौरान निर्माण कराया गया था। वहीं, अब बेलगावी की 'प्यास फाउंडेशन' ने एनएसएस स्वंयसेवकों और लोगों की मदद से इसे पूरी तरह ठीक करवा दिया है। बड़ी बात ये है कि इस बावड़ी में प्राकृतिक जल के नए स्त्रोत भी मिले हैं। देखें वीडियो...
बावड़ी में 53 सीढ़ियां
यहां आपको बता दें कि इस बावड़ी में पत्थर की 53 सीढ़ियां हैं और इसकी बनावट भी काफी अनोखी है। ऊपर से देखने पर यह शिव लिंग के आकार की नजर आती है। बावड़ी के कायाकल्प के काम में शामिल स्वंयसेवक बताते हैं कि सालों से जमा हुए मलबे और बेतहाशा बढ़ी हुई झाड़ियों और पौधों को हटाने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। इधर, इलाके के लोग बावड़ी को फिर से ठीक करने की पहल से काफी खुश हैं। वे बताते हैं कि ये कभी गांव वालों, मवेशियों और यात्रियों के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत हुआ करती थी। मरम्मत के बाद, सदियों पुरानी यह बावड़ी अब एक सांस्कृतिक पहचान बन गई है। ये न सिर्फ इतिहास को आधुनिक जीवन से जोड़ती है बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने के नए रास्ते भी खोलती है।
