यूपी में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार की जांच के लिए SIT गठित, अबतक 32 गिरफ्तार
- Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Dec 8, 2025, 10:39 PM IST
उत्तर प्रदेश में कोडीन-आधारित कफ सिरप और नशीली दवाओं के अवैध व्यापार के खुलासे के बाद सरकार ने इस मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। बड़े पैमाने पर हुई बरामदगी, सुपर-स्टॉकिस्ट नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच ने मामले को और गंभीर बना दिया है। विभिन्न राज्यों में की गई छापेमार कार्रवाई और रिकॉर्ड की जांच से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
कोडीन-बेस्ड कफ सिरप के अवैध व्यापार की जांच के लिए यूपी में SIT गठित (सिंबॉलिक फोटो: Canva)
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि कोडीन युक्त कफ सिरप और नशे में इस्तेमाल होने वाली अन्य दवाओं के अवैध भंडारण व बिक्री की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया जाएगा। इस टीम की अगुवाई महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के अधिकारी करेंगे। प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद के अनुसार, राज्य सरकार इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह एसआईटी गठित की जा रही है।
प्रसाद ने बताया कि जांच के लिए आईजी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया जा रहा है, जिसमें खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्राधिकरण (FDSA) के अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोडीन-आधारित कफ सिरप से अब तक प्रदेश में किसी व्यक्ति की मौत दर्ज नहीं हुई है। प्रसाद के अनुसार, यह विशेष टीम सभी चल रही जांचों की नियमित निगरानी करेगी, आरोपियों से मिले हर सुराग को जोड़कर आगे की कार्रवाई तय करेगी तथा संबंधित सभी वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच करेगी। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने बताया कि जांच के दौरान एक बड़े ‘सुपर स्टॉकिस्ट’ नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो कथित रूप से कोडीन युक्त सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल है। उन्होंने बताया कि ऐसे पांच प्रमुख ‘सुपर स्टॉकिस्ट’ की पहचान कर ली गई है।
32 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया
गिरफ्तार किए गए तीन प्रमुख ‘सुपर-स्टॉकिस्ट’ में वाराणसी से शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल, सहारनपुर से विभोर राणा और गाजियाबाद से सौरभ त्यागी शामिल हैं। दो अन्य ‘सुपर-स्टॉकिस्ट’ अभी जांच के दायरे में हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। कृष्ण ने जानकारी दी कि अवैध रूप से तस्करी की गई कफ सिरप की बड़ी मात्रा राज्य में पकड़ी गई है। उनके अनुसार, अब तक करीब 3.5 लाख बोतलें जब्त की जा चुकी हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 4.5 करोड़ रुपये है। इस गैरकानूनी कारोबार से जुड़े कुल 32 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। डीजीपी ने यह भी कहा कि जांच में भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमाओं के पार कफ सिरप की तस्करी के प्रमाण मिले हैं।
नेपाल और बांग्लादेश की ओर भेजी जाने वाली खेप
नेपाल और बांग्लादेश की ओर भेजी जाने वाली खेप से जुड़े संकेत मिले हैं, जिन पर जांच जारी है। डीजीपी के अनुसार, बैंकिंग चैनलों के माध्यम से संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की भी पुष्टि की जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी को लेकर भी लोगों को सावधान किया। डीजीपी ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई दावे बिना किसी प्रमाण के किए जा रहे हैं, जबकि जांच टीम ठोस वित्तीय साक्ष्य एकत्र कर रही है। उनके अनुसार, धनराशि के लेनदेन से जुड़े सत्यापित नाम सामने आने लगे हैं। अवैध पैसे उन व्यक्तियों और जगहों तक भेजे गए, जिनके पास किसी प्रकार का वैध लाइसेंस नहीं था, यहां तक कि ठेला चलाने वालों को भी रकम पहुंचाई गई। इन सभी पहलुओं के सबूत जुटाए जा रहे हैं।
दवाओं की अवैध तस्करी की व्यापक जांच के निर्देश
आरोपी शुभम जायसवाल के विदेश भागने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कृष्ण ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो सरकार प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी शुरू करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले की जांच अपने स्तर पर आरंभ कर दी है। सोशल मीडिया पर जांच को प्रभावित करने से जुड़े दावों को उन्होंने बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्राधिकरण (FDSA) की आयुक्त रोशन जैकब ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोडीन युक्त कफ सिरप सहित मादक पदार्थ श्रेणी की दवाओं की अवैध तस्करी की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोडीन-आधारित कफ सिरप प्रतिबंधित दवाओं की सूची में शामिल नहीं है।
280 दवा लाइसेंस रद्द करने के लिए नोटिस जारी
कोडीन-आधारित सिरप अनुसूची-एच की दवाओं में शामिल है, जिसे केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर बेचा जाना चाहिए। इसे कानूनी रूप से रखना या बेचना गलत नहीं है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब बिना किसी दस्तावेज या उचित खरीद–बिक्री रिकॉर्ड के बड़ी मात्रा में इसकी आपूर्ति की जाती है। लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरण के तौर पर विभाग ऐसे मामलों को नियमों का उल्लंघन मानता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में दर्ज जानलेवा कफ सिरप की घटनाओं का उत्तर प्रदेश से कोई संबंध नहीं है, और सभी जिलों ने इसकी पुष्टि की है। जैकब के अनुसार, विभाग ने अवैध व्यापार में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में लगभग 280 दवा लाइसेंस रद्द करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं और जहां भी अनियमितताएं मिली हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है।
कई स्थानों पर किया गया निरीक्षण
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन), मध्य प्रदेश से मिली महत्वपूर्ण जानकारी के प्रारंभिक सत्यापन के दौरान, एफएसडीए मुख्यालय की एक विशेष टीम ने विभिन्न औषधि निरीक्षकों के साथ मिलकर कई स्थानों पर निरीक्षण किया। इनमें हिमाचल प्रदेश स्थित दो कोडीन कफ सिरप निर्माता कंपनियां, उत्तराखंड की तीन निर्माता इकाइयां, हरियाणा में स्थित एक कंपनी का डिपो तथा झारखंड के रांची में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी सैली ट्रेडर्स के सुपर-स्टॉकिस्ट शामिल थे।
बड़े पैमाने पर कोडीन युक्त कफ सिरप की आपूर्ति
इन निरीक्षणों में कोडीन-आधारित कफ सिरप के निर्माण, भंडारण, बिक्री, खरीद और वितरण से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और सूचनाएं बरामद की गईं। एकत्र किए गए दस्तावेजों और जानकारी के विश्लेषण से पता चला कि इन निर्माताओं ने उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में सीमित संख्या के दवा विक्रेताओं को बार-बार बड़े पैमाने पर कोडीन युक्त कफ सिरप की आपूर्ति की थी। निरीक्षणों के दौरान पाए गए गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि के बाद, औषधि निरीक्षकों ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की प्रासंगिक धाराओं के तहत 28 जिलों में 128 दवा प्रतिष्ठानों और उनके संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
(इनपुट - भाषा)