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UP News: राज्यपाल के आधिकारिक आवास को मिला नया नाम, अब नहीं कहलाएगा ‘राज भवन’

UP News: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के आधिकारिक आवास का नाम बदलकर ‘जन भवन’ कर दिया गया है जिसे पहले ‘राज भवन’ के नाम से जाना जाता था। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यालय से बुधवार को जारी एक बयान से यह जानकारी मिली।

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राजभवन का बदल गया नाम (चित्र साभार: upgoverner.gov.in)

Raj Bhavan Name Changed: नाम बदलने की फेहरिस्त में एक संख्या बढ़ गई है और आमतौर पर नामबदली के साथ जिस प्रदेश का जिक्र होता है, इस बार खबर उसी प्रदेश से हैं। जी हां, बात उत्तर प्रदेश की हो रही है। इस बार यहां किसी स्टेशन या शहर का नहीं, बल्कि राज्यपाल के आवास का नाम बदला गया है। यूपी के राज्यपाल के आधिकारिक आवास को अब ‘राज भवन’ नहीं, बल्कि ‘जन भवन’ के नाम से जाना जाएगा। यह बदलाव केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्यपालों के आवासों के नामकरण में एकरूपता लाना है। इस नामबदली को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, अब से सभी कामों के लिए 'जन भवन' शब्द का ही इस्तेमाल होगा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यालय ने बुधवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी।

अब से जन भवन नाम का होगा इस्तेमाल

अब राज्यपाल के आवास से जुड़े सभी शासकीय, प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों में ‘जन भवन’ नाम का ही इस्तेमाल किया जाएगा। शासन स्तर पर इससे संबंधित जरूरी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। आने वाले समय में सरकारी पत्राचार, दस्तावेज, निमंत्रण पत्र, बोर्ड और साइन बोर्ड पर भी ‘जन भवन’ नाम दिखाई देगा।

क्यों चुना गया ‘जन भवन’

दरअसल, पहले राज्यपाल के आवास का नाम ‘लोक भवन’ रखने पर विचार किया गया था। लेकिन लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय पहले से ही ‘लोक भवन’ नाम से संचालित हो रहा है। ऐसे में एक ही नाम होने से प्रशासनिक भ्रम की आशंका थी। इसी वजह से राज्यपाल के आवास के लिए ‘जन भवन’ नाम को अंतिम रूप दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह नाम जनता से जुड़ाव और पारदर्शिता की भावना को दर्शाता है।

कई राज्यों में बदले गए राजभवनों के नाम

उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा में भी राज्यपालों के आवासों के नाम बदले गए हैं। वहीं केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में उपराज्यपाल के निवास कार्यालय को अब ‘लोक निवास’ कहा जाएगा, जिसे पहले ‘राज निवास’ के नाम से जाना जाता था। इन बदलावों का मकसद ‘राज’ शब्द से जुड़ी औपनिवेशिक सोच को समाप्त करना बताया जा रहा है।

ऐतिहासिक इमारत, नया नाम

लखनऊ स्थित राज्यपाल आवास का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। ऐसा कहते हैं कि नवाबी दौर में इसका ‘कोठी हयात बख्श’ नाम था, यानी 'जीवनदायिनी कोठी' है। इस भवन में भारतीय और पश्चिमी स्थापत्य शैली का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। अब इस ऐतिहासिक इमारत को ‘जन भवन’ के रूप में नई पहचान दी गई है।

लोक-केंद्रित सोच की झलक

जन भवन नाम के संदेश की बात करें तो 'जन' शब्द का सीधा मतलब लोग होता है। लोकतंत्र के लिहाज यह नाम परोक्ष रूप से यह संदेश भी देता है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति जनता के हितों के प्रति जवाबदेह हैं और शासन का केंद्र बिंदु आम नागरिक है। वहीं 'राज' शब्द को राजशाही से जोड़कर देखा जाता रहा है। केंद्र सरकार का भी इन नामों को बदलने के पीछे औपनिवेशिक झलक को हटाना था। इससे पहले भी ‘राजपथ’ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया था, जिसका 'राज' भी समान संकेत देता था।

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 Nishant Tiwari
Nishant Tiwari author

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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