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PM मोदी की अपील के बाद NITES की मांग, IT कंपनियों के लिए जारी हो वर्क फ्रॉम होम एडवाइजरी

PM Modi के WFH वाले बयान के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में देश में फिर से हाइब्रिड और रिमोट वर्क मॉडल को बढ़ावा मिल सकता है।

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जल्द शुरू हो सकता है Work From Home, NITES ने सरकार को लिखा पत्र

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और IT-सक्षम सेवाओं (ITES) के कर्मचारियों के प्रमुख संगठन, NITES (Nascent Information Technology Employees Senate) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आईटी सेक्टर के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी करने की मांग की है। संगठन ने यह मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में ईंधन संरक्षण और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच अनावश्यक यात्रा कम करने की अपील के बाद उठाई है।

NITES ने श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मनसुख मांडविया को भेजे गए प्रतिवेदन में तर्क दिया है कि आईटी क्षेत्र में वर्क फ्रॉम होम (WFH) केवल कर्मचारियों की सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि यह ईंधन संरक्षण और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक आवश्यक कदम है।

पीएम मोदी की अपील का दिया हवाला

NITES ने मंत्रालय को भेजे गए अपने पत्र में पीएम मोदी के हालिया बयान का हवाला दिया है। मोदी ने देशवासियों और कंपनियों से पेट्रोल-डीजल की बचत, अनावश्यक यात्रा कम करने, वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की थी। संगठन ने इसे “राष्ट्रीय जिम्मेदारी का आह्वान” बताते हुए कहा कि आईटी सेक्टर पहले ही यह साबित कर चुका है कि बड़े स्तर पर रिमोट वर्क बिना प्रोडक्टिविटी प्रभावित किए सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

कोविड काल का दिया उदाहरण

NITES ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय आईटी उद्योग ने बेहद कम समय में वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपना लिया था। उस समय बड़ी टेक कंपनियों, मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम, सपोर्ट सर्विस और डिजिटल डिलीवरी यूनिट्स ने घर से काम करते हुए भी वैश्विक प्रोजेक्ट्स और क्लाइंट्स को लगातार सेवाएं दी थीं।

संगठन के अनुसार, महामारी जैसी कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय आईटी सेक्टर ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि मौजूदा वैश्विक हालात में भी इस मॉडल को दोबारा अपनाया जा सकता है।

58 लाख कर्मचारियों पर पड़ सकता है असर

NITES ने अपने पत्र में कहा कि देश का आईटी और आईटीईएस सेक्टर करीब 58 लाख पेशेवरों को रोजगार देता है। ऐसे में यदि कंपनियां वर्क फ्रॉम होम अपनाती हैं, तो इससे ईंधन की बचत, ट्रैफिक में कमी और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों की यात्रा लागत भी कम होगी और कंपनियों को ऑफिस संचालन पर होने वाले खर्च में राहत मिल सकती है।

सरकार से एडवाइजरी जारी करने की मांग

आईटी कर्मचारी संगठन ने श्रम मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह आईटी/आईटीईएस कंपनियों और डिजिटल सर्विस सेक्टर के लिए एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी करे। इसमें कंपनियों को निर्देश दिया जाए कि जहां संभव हो, वहां एक निश्चित अवधि के लिए अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाए।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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