भारतीय रेलवे में लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए AC कोच सबसे पसंदीदा विकल्पों में शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नए कोच पेश किए हैं। इन्हीं में 3AC और 3E कोच सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। कई यात्री टिकट बुक करते समय यह समझ नहीं पाते कि दोनों में क्या अंतर है और कौन सा कोच उनके लिए बेहतर रहेगा।
3AC कोच में मिलता है ज्यादा आराम
3AC यानी थर्ड एसी कोच लंबे समय से भारतीय रेलवे का लोकप्रिय विकल्प रहा है। इस कोच में कुल 72 सीटें होती हैं और प्रत्येक कंपार्टमेंट में दो साइड बर्थ दी जाती हैं। सीटों के बीच पर्याप्त जगह होने के कारण यात्रियों को सफर के दौरान ज्यादा आराम मिलता है। यही वजह है कि परिवार और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग अक्सर 3AC को प्राथमिकता देते हैं। इस कोच में यात्रियों को बेसिक AC सुविधाओं के साथ बेहतर स्पेस मिलता है, जिससे रात में सोने और बैठने दोनों में सुविधा रहती है।
3E कोच में ज्यादा सीटें, किराया कम
3E कोच रेलवे का अपेक्षाकृत नया इकोनॉमी AC कोच है। इसमें 81 से 83 सीटें तक होती हैं, यानी 3AC की तुलना में ज्यादा यात्रियों को जगह दी जाती है। इस कोच में तीन साइड बर्थ होती हैं, जिसके कारण अंदर का स्पेस थोड़ा कम महसूस हो सकता है।
हालांकि इसका सबसे बड़ा फायदा कम किराया है। जानकारी के अनुसार 3E कोच का किराया 3AC की तुलना में लगभग 6 से 8 प्रतिशत यानी करीब 100 रुपये तक सस्ता होता है। यही कारण है कि बजट में सफर करने वाले यात्रियों के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
3E में मिलती हैं आधुनिक सुविधाएं
3E कोच में यात्रियों को कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जाती हैं। इसमें पर्सनल AC वेंट, USB चार्जिंग पोर्ट और छोटी टेबल जैसी सुविधाएं देखने को मिलती हैं। रेलवे ने इसे आधुनिक यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है, ताकि कम किराए में भी बेहतर अनुभव दिया जा सके।
आखिर किसे चुनना चाहिए?
यदि आपकी प्राथमिकता आराम, ज्यादा जगह और शांत सफर है, तो 3AC बेहतर विकल्प माना जा सकता है। वहीं यदि आप कम बजट में AC यात्रा करना चाहते हैं और थोड़े कम स्पेस से समझौता कर सकते हैं, तो 3E कोच आपके लिए सही रहेगा।
