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पेट्रोल vs EV: प्रति किलोमीटर कितना आता है खर्च, किसमें है ज्यादा फायदा?

Petrol की कीमत में आज एक बार फिर से इजाफा हुआ है। कुछ दिन भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी थीं। ऐसे में लोग EV कार और बाइक के बारे में विचार करने लगे हैं।

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पेट्रोल और Ev चलाने का प्रति किलोमीटर खर्च क्या आता है, फायदा किसमें है?

भारत में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के बढ़ते ट्रेंड के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किस गाड़ी को चलाना ज्यादा सस्ता पड़ता है। आज ही पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा हुआ है। महज 5 दिन में तेल की कीमतों में दो बार बदलाव हुआ है। ऐसे में लोगों को अब ईवी की याद आने लगी है, लेकिन ईवी खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि क्या वास्तव में ईवी, पेट्रोल के मुकाबले सस्ती है और प्रति किलोमीटर कितना खर्च आता है?

पेट्रोल कार का प्रति किलोमीटर खर्च कितना?

अगर किसी पेट्रोल कार का माइलेज औसतन 15 से 18 किलोमीटर प्रति लीटर है और पेट्रोल की कीमत करीब 100 रुपये प्रति लीटर मानी जाए, तो ऐसी कार को चलाने का खर्च लगभग 5.5 से 7 रुपये प्रति किलोमीटर तक आता है। ट्रैफिक, एसी और ड्राइविंग स्टाइल के कारण यह खर्च कई बार और बढ़ जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति रोज 40 किलोमीटर गाड़ी चलाता है, तो सिर्फ पेट्रोल पर ही हर महीने हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं।

EV चलाने में कितना खर्च आता है?

इलेक्ट्रिक कारों का खर्च मुख्य रूप से बिजली पर निर्भर करता है। एक सामान्य EV लगभग 6 से 8 किलोमीटर प्रति यूनिट बिजली का माइलेज देती है। यदि बिजली की दर 8 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए, तो EV को चलाने का खर्च करीब 1 से 1.5 रुपये प्रति किलोमीटर तक पड़ता है। यानी पेट्रोल कार की तुलना में EV का रनिंग कॉस्ट लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक कम हो सकता है। घर पर चार्जिंग करने वाले लोगों को और ज्यादा बचत देखने को मिलती है।

सर्विस और मेंटेनेंस में भी बड़ा अंतर

पेट्रोल गाड़ियों में इंजन ऑयल, फिल्टर, क्लच और कई मैकेनिकल पार्ट्स की नियमित सर्विस करनी पड़ती है। दूसरी ओर EV में कम मूविंग पार्ट्स होते हैं, जिससे मेंटेनेंस खर्च काफी कम रहता है, हालांकि EV की बैटरी महंगी होती है, लेकिन अधिकांश कंपनियां उस पर 8 साल तक की वारंटी देती हैं।

फिर लोग पेट्रोल कार क्यों खरीद रहे?

EV सस्ती चलने के बावजूद अभी हर जगह चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं हैं। लंबी दूरी की यात्रा और छोटे शहरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी चुनौती बना हुआ है। वहीं पेट्रोल पंप लगभग हर इलाके में आसानी से मिल जाते हैं। इसके अलावा EV की शुरुआती कीमत पेट्रोल कारों की तुलना में अधिक होती है, जिससे कई लोग अभी भी पारंपरिक गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आखिर किसमें है ज्यादा फायदा?

अगर आपकी रोजाना ड्राइविंग ज्यादा है और आप शहर में गाड़ी चलाते हैं, तो EV लंबे समय में काफी सस्ती और फायदे का सौदा साबित हो सकती है। वहीं कम इस्तेमाल या लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए फिलहाल पेट्रोल कार ज्यादा सुविधाजनक मानी जा रही है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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