यूटिलिटी

सड़क हादसे में बचाई किसी की जान तो मिलेंगे 25000 रुपए, सरकार खुद देगी इनाम

RS 25000 reward for saving lives: सड़क पर होने वाले हादसों में अक्सर लोग कानूनी कार्यवाही के डर से मदद करने से कतराते हैं लेकिन अब मदद करने वाले व्यक्ति को डरने या संकोच करने की जरूरत नहीं है। सरकार की 'राह-वीर योजना' (Rah-Veer Yojana) के तहत, अगर आप किसी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की जान बचाने में कामयाब होते हैं, आपको सम्मानित किया जाएगा।

Image

कौन कहलाता है राहवीर (Photo: X handle/@@MORTHIndia)

RS 25000 reward for saving lives: सड़क दुर्घटना के मामलों में अक्सर देखा जाता है कि लोग घायल व्यक्ति की मदद करने में संकोच करते हैं। लोग मदद करने आगे आना तो चाहते हैं लेकिन पुलिस और कानूनी चिंताओं के कारण ऐसा कर नहीं पाते। लेकिन क्या आप जानते हैं राह-वीर योजना के तहत अगर आप सड़क हादसे में किसी की जान बचाने के लिए आगे आते हैं तो आपको सरकार न केवल सम्मानित करेगी बल्कि इसके लिए आपको 25000 रुपए का रिवॉर्ड भी दिया जाएगा। आइए जानते हैं इस योजना से जुड़ी खास बातें-

कौन कहलाता है राहवीर

सड़क दुर्घटना को लेकर जो लोग साहस दिखाते हुए किसी घायल अजनबी को उठाकर उसे निकटतम अस्पताल ले जाते हैं, उन्हें राह-वीर कहा जाता है। इस योजना के तहत, जो भी व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित को गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करता है, उसे 25,000 रुपए का पुरस्कार और प्रशंसा पत्र दिया जाता है। सरकार का कहना है कि बहादुरी के ऐसे कार्यों को दोहराने पर साल में पांच बार तक यह सम्मान प्राप्त किया जा सकता है।

राह-वीरों को नहीं आएगी कोई परेशानी

  • केंद्र के अनुसार, किसी की सहायता करने वाले राहवीरों को किसी भी तरह की कानूनी चिंताएं करने की जरूरत नहीं होगी।
  • एक बार मरीज को अस्पताल में भर्ती कर देते हैं तो राहवीर को वहां रुकने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
  • घायल को अस्पताल पहुंचाने के साथ यह जरूरी नहीं कि राहवीर इलाज के लिए भुगतान करें।
  • राहवीर को एफआईआर दर्ज करवाने या गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। गवाह बनना उनकी व्यक्तिगत पसंद होगा।
  • अगर राहवीर गुमनाम रहना पसंद करते हैं तो पर्सनल डिटेल्स देना जरूरी नहीं है।
  • किसी भी राहवीर को हिरासत में लिए जाने की अनुमति नहीं होगी।

'गोल्डन आवर' क्या होता है

कानून के अनुसार, गंभीर चोट लगने के बाद का पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है इसलिए इसे 'गोल्डन आवर' कहा जाता है। यह चिकित्सा सहायता के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस अवधि के दौरान तुरंत सहायता मिले तो आजीवन विकलांगता, आघात और अनगिनत मौतों को रोका जा सकता है।

कौन बन सकता है राहवीर

केंद्र के अनुसार, राह-वीर बनने के लिए किसी भी व्यक्ति को चिकित्सा प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए विशेष उपकरणों की भी आवश्यकता नहीं है। किसी घायल की मदद करने की इच्छा से ही व्यक्ति राहवीर बन सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

और पढ़ें
End of Article