Diamond GEm Testing Fraud: डायमंड खरीदते समय एक रिपोर्ट मिलती है। पर कई बार पता नहीं चलता है कि ये रिपोर्ट असली है या नकली है। ऐसे में लोग नकली स्टोन को असली बताकर बेवकूफ बनाते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में बता रहे हैं। ऐसे में आज हम जालसाज लोग कैसे लोगों इस तरह की धोखाधड़ी में फंसते हैं उसके बारे में बता रहे हैं।
तीन तरह से चल रहा नकली रिपोर्ट का बिजनेस
- नकली रिपोर्ट का बिजनेस मुख्य रूप से तीन तरीके से चल रहा है। जिसमें पहला है कि रिपोर्ट पूरी तरह से फेक होती जिसमें किसी लैब की कोई जानकारी ही नहीं होती है। उस रिपोर्ट में आपको न ही कोई फोन नंबर मिलेगा ना ही URL मिलेगा और न ही एड्रेस मिलेगा।
- दूसरे तरीके में ये होता है कि सर्टिफेकेट तो ओरिजनल होगा पर स्टोन में बदलाव देखने को मिल सकता है। जब आप उस रिपोर्ट को वैरिफाई करेंगे, फोन नंबर, एड्रेस होगा आप उस लैब में जा भी सकते हैं पर जो सप्लायर है उसने स्टोन बदल दिया होगा। ऐसे में आप इसे कैसे चेक करेंगे।
- कई बार तो GIA नंबर के साथ सिंथेकेट नंबर को भी बदल दिया जाता है। तीसरे तरीके में रिपोर्ट, स्टोन ओरिजनल है पर रिपोर्ट के साथ छेड़खानी की जाती है। अक्सर ये टेंपरिंग पर Gem रिपोर्ट के साथ की जाती है।
कैसे करें पहचान
ग्राहक को रिपोर्ट की जांच तसल्ली से कर लेनी चाहिए। रिपोर्ट को ओरिजनल है या नहीं ये समझने के लिए जिस लैब में स्टोन को सर्टिफाइड किया गया है उसे वहां ले जाएं और खुद ही सर्टिफाइड और वैरीफाई कर लें। आज कल रिपोर्ट में ट्रीटमेंट की जानकारी नहीं होती है। रूबी जो ग्लास फिल्ड होता है उसकी बाजार में कीमत बहुत सस्ती होती है उसमें ट्रीटमेंट लिखा ही नहीं होता है। आप एक रिपोर्ट को देखकर समझ ही नहीं सकते हैं कि ये रूबी अनहीटेड अनट्रीटेड है या नहीं। इसलिए ग्राहक को रिपोर्ट को रीसर्टिफाइड कराना चाहिए।
