ELSS Mutual Funds: पैसों को बचाने के साथ-साथ उन्हें सही जगह पर इन्वेस्ट करना भी जरूरी होता है ताकि हम अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा कर सकें। जब भी बात पैसों को इन्वेस्ट करने की आती है तो अक्सर हम एक ऐसा ऑप्शन खोजते हैं जो हमारे रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से ठीक हो और साथ ही हमें बाकी ऑप्शंस के मुकाबले अच्छे रिटर्न्स भी प्रदान कर सके। पिछले कुछ समय के दौरान भारत में म्यूचुअल फंड्स को काफी पसंद किया जाने लगा है और लोग म्यूचुअल फंड्स में जमकर इन्वेस्ट भी कर रहे हैं। जब बात म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्टमेंट की आती है तो आपने ELSS म्यूचुअल फंड्स के बारे में भी सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ELSS म्यूचुअल फंड्स काम कैसे करते हैं और इनमें इन्वेस्ट करने के फायदे और नुकसान क्या हैं?
क्या होते हैं ELSS फंड्स?
ELSS म्यूचुअल फंड्स का मतलब इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम होता है। अगर आप टैक्स बचाने के लिए इन्वेस्टमेंट के ऐसे विकल्प की तलाश कर रहे हैं जो आपको बेहतर रिटर्न्स भी प्रदान कर सके तो यह फंड्स आपके ली एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकते हैं। ELSS म्यूचुअल फंड्स में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C तहत आपको टैक्स बेनिफिट मिलते हैं। लॉन्ग टर्म में अच्छे रिटर्न्स वाले ऑप्शन की तलाश कर रहे हैं तो यह ऑप्शन आपके लिए काफी अच्छा साबित हो सकता है।ELSS फंड्स के फायदेELSS म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्टमेंट करके आप न सिर्फ बेहतर रिटर्न्स प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि आपको अन्य फायदे भी मिलते हैं जो इस प्रकार से हैं:
लॉक-इन पीरियड: ELSS म्यूचुअल फंड्स में आपको 3 सालों का लॉक-इन पीरियड मिलता है।
इक्विटी में इन्वेस्टमेंट: ELSS में इन्वेस्ट किये गए पैसों का लगभग 80% हिस्सा इक्विटी में इन्वेस्ट करता है और इसीलिए ELSS में इन्वेस्टमेंट पर रिस्क भी अन्य ऑप्शंस के मुकाबले में थोड़ा ज्यादा होता है।
टैक्स सेविंग: अगर आप ELSS फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं तो आपको इनकम टैक्स एक्ट 80C के तहत टैक्स कटौती पर 1।5 लाख रुपए की छूट मिलती है।
बेहतर रिटर्न्स: ELSS फंड्स क्योंकि इक्विटी मार्केट से संबंधित हैं इसलिए इनमें रिस्क तो थोड़ा ज्यादा है। लेकिन इक्विटी में इन्वेस्ट किये जाने की वजह से आपको बेहतर रिटर्न्स भी प्राप्त होते हैं।
कैसे काम करता है ELSS म्यूचुअल फंड?ELSS म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट किया गया पैसा मूल रूप से लिस्टेड कंपनियों में इन्वेस्ट किया जाता है। किसी भी सेक्टर के स्टॉक को इन्वेस्टमेंट के लिए चुना जा सकता है। लॉन्ग टर्म में ये स्टॉक आपकी संपत्ति में वृद्धि करते हैं और आपको बेहतर रिटर्न्स प्राप्त होते हैं। किस स्टॉक में इन्वेस्ट करना है इस बात का चयन म्यूचुअल फंड मैनेजर करता है।
