PF: रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को किसी प्रकार की वित्तीय चुनौती का सामना न करना पड़े इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा भारत में विभिन्न प्रकार के प्रोविडेंट फंड चलाए जाते हैं। लोगों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) या फिर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) के बारे में ही जानकारी होती है। वहीं जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) भी होता है जिसकी जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं होती है। जानकारी नहीं होने की वजह से लोग अक्सर EPF, PPF और GPF में कन्फ्यूज भी हो जाते हैं। आज हम आपको इन तीनों ही प्रोविडेंट फंड्स के बारे में बताने जा रहे हैं।
EPF के बारे में तो सुना होगा
कर्मचारी भविष्य निधि की शुरुआत सरकार द्वारा कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन प्रदान करने के उद्देश्य के साथ की गई थी। EPF की देखरेख कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा की जाती है। हर महीने कर्मचारी की बेसिक कमाई का 12% हिस्सा PF खाते में जमा कर दिया जाता है। कर्मचारी के साथ ही कंपनी PF अकाउंट में 3.67% और 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन सिस्टम (EPS) में जमा करवाती है। इस तरह कर्मचारी की बेसिक कमाई के 12% के साथ ही कंपनी भी 12% का योगदान करती है।
क्या होता है GPF?
जनरल प्रोविडेंट फंड के बारे में आमतौर पर लोगों को जानकारी नहीं होती है। जनरल प्रोविडेंट फंड सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए ही होता है। कोई भी व्यक्ति जो एक साल तक सरकार के लिए काम कर चुका है, अस्थायी कर्मचारी या फिर रिटायर होने के बाद भी अपनी स्वेच्छा से सेवा प्रदान करवाने वाला व्यक्ति GPF खाता खुलवा सकता है। GPF में जमा होने वाले पैसे पर सरकार फिलहाल 7.1% सालाना की दर से ब्याज भी ऑफर कर रही है।
अब जान लीजिए PPF के बारे में
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) एक तरह की सरकारी योजना है जिसका लाभ कोई भी व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से उठा सकता है। कोई भी व्यक्ति, फिर चाहे वह सरकारी या प्राइवेट कर्मचारी ही क्यों न हो, PPF खाता खुलवा सकता है। PPF अकाउंट की मैच्योरिटी की अवधि 15 वर्ष की होती है। PPF अकाउंट पर भी फिलहाल सरकार 7.1% सालाना दर से ब्याज दे रही है।
