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होटल-ढाबों में काली प्लास्टिक में भोजन देने का मुद्दा राज्यसभा में उठा, क्या आपके सेहत से हो रहा है खिलवाड़?

Black Plastic Food Packaging: राज्यसभा में बीजेपी सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने होटल, ढाबों और अन्य जगहों पर काले प्लास्टिक के बर्तनों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। विशेष उल्लेख के जरिए उन्होंने सरकार से इन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की और कहा कि भोजन परोसने व पैकेजिंग में इनका उपयोग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है

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राज्यसभा में उठा काली प्लास्टिक के बर्तनों का मुद्दा, प्रतिबंध की मांग तेज (तस्वीर-istock)

Black Plastic Food Packaging: राज्यसभा में बुधवार (25 मार्च 2026) को विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने होटल, ढाबों और अन्य स्थानों पर काले रंग के प्लास्टिक बर्तनों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने विशेष उल्लेख के जरिये इस विषय को उठाते हुए सरकार से ऐसे बर्तनों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। तिवाड़ी ने कहा कि देश के कई हिस्सों में भोजन परोसने और पैकेजिंग के लिए काले प्लास्टिक के बर्तनों का व्यापक उपयोग हो रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

काली प्लास्टिक को बताया खतरनाक

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि यह काली प्लास्टिक सामान्य प्लास्टिक नहीं होती, बल्कि इसे अक्सर इलेक्ट्रॉनिक कचरे या अन्य अवशिष्ट प्लास्टिक सामग्री से तैयार किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब इन बर्तनों में गर्म भोजन रखा जाता है, तो माइक्रोप्लास्टिक कण भोजन में मिल सकते हैं। ये सूक्ष्म कण मानव शरीर में प्रवेश कर खून में घुलने की क्षमता रखते हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि भारतीय रेल सहित सभी सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए और सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए।

वजन घटाने वाली दवाओं और प्लास्टिक प्रदूषण पर चिंता

मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने तेजी से लोकप्रिय हो रही वजन घटाने वाली दवाओं के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने इस विषय में जागरूकता बढ़ाने और उचित दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता बताई। वहीं भाजपा सांसद केसरीदेव सिंह झाला ने प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे को उजागर करते हुए इसके नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।

रोजगार और कृषि संकट का मुद्दा भी उठा

इसी क्रम में बीजेपी सांसद अशोक सिंह ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड और मुरैना जिलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से वीरों की भूमि रहा है, जिसने देश को अनेक वीर सपूत दिए हैं। हालांकि वर्तमान समय में यहां के युवा रोजगार की कमी के कारण पलायन करने को मजबूर हैं। साथ ही किसानों को सिंचाई सुविधाओं के अभाव और कम आय के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इन क्षेत्रों के विकास के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

लंबित रेल परियोजनाओं पर जोर

बीजेपी के अजीत माधवराव गोपछड़े ने मराठवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित रेल परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी।

देहदान और जागरूकता की कमी

बीजेपी के नवीन जैन ने मरणोपरांत देहदान के प्रति समाज में जागरूकता की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए देहदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके प्रति लोगों में अभी भी पर्याप्त जानकारी और प्रेरणा का अभाव है।

आशा कार्यकर्ताओं के हितों की मांग

समाजवादी पार्टी के सदस्य रामजीलाल सुमन ने आशा कार्यकर्ताओं की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले करीब दो दशकों से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में आशा कार्यकर्ताओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन उन्हें अभी भी बहुत कम मानदेय मिलता है और उनकी सेवाएं स्थायी नहीं हैं। सुमन ने सरकार से मांग की कि आशा कार्यकर्ताओं की सेवाओं को स्थायी किया जाए और उन्हें बेहतर वेतन एवं सुविधाएं प्रदान की जाएं।

जनहित के मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की अपेक्षा

राज्यसभा में उठाए गए इन विभिन्न मुद्दों ने स्वास्थ्य, पर्यावरण, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम विषयों को केंद्र में ला दिया है। सदस्यों ने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र और प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा जताई, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और देश के समग्र विकास को गति मिल सके।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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