गजब का टैलेंट, 50 से ज्यादा अभिनेताओं की नकल करता है ये रिक्शावाला

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 29, 2022, 04:42 PM IST

Trending News: बिहार का एक रिक्शावाला इन दिनों सुर्खियों में है। क्योंकि, उसमें ऐसा टैलेंट है जिसके बारे में जानकर लोग दंग रह जाते हैं। वो 50 से ज्यादा अभिनेताओं की मिमक्री आसानी से कर लेता है।

गजब का टैलेंट, 50 से ज्यादा अभिनेताओं की नकल करता है ये रिक्शावाला
Photo Credit: IANS

Trending News: कहते हैं इस दुनिया में टैलेंट की कमी नहीं है। हालांकि, किसी को आसानी से निखरने का मौक मिल जाता है। जबकि, कई लोग संघर्ष ही करते रह जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही टैलेंट से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्हें वो मुकाम तो नहीं मिल सकी है। लेकिन, उनकी कलाकारी देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। दरअसल, आज के दौर में स्टैंडअप मिमिक्री और स्टैंडअप कॉमेडी को लोग पसंद कर रहे हैं। ऐसे में बिहार की राजधानी पटना में एक रिक्शाचालक जिनका नाम दीपक है वो मिमिक्री तो 50 से ज्यादा कालाकारों और नेताओं की कर लेते हैं। लेकिन, अब तक उनकी कला को वह पहचान नहीं मिली, जिसके वे सही मायने में हकदार हैं।

उनकी कला के दीवाने विधानसभा से लेकर गलियों तक के लोग हैं। बचपन से लेकर युवा तक घर की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे रिक्शा चालक को अभी भी आस है कि कोई उसकी कला का कद्रदान जरूर मिलेगा। दीपक बताते हैं कि उन्हें बिहार विधानसभा में आयोजित एक कार्यक्रम में पुरस्कार भी मिल चुका है। पेशे से रिक्शा चालक दीपक मूल रूप से झारखंड के धनबाद जिले के तोपचांची के रहने वाले हैं, लेकिन वे पिछले 15 सालों से पटना में ही रिक्शा चलाकर अपना जीवन यापन करते हैं।

कई दिग्गजों की नकल करते हैं दीपक

दीपक बताते हैं कि 20 से 25 वर्ष की आयु में कई गांवों और कस्बों में मंच तो मिला, लेकिन उससे परिवार का पेट भरना मुश्किल था। इस कारण फिर रिक्शा को ही अपना हमसफर बना लिया। दीपक न केवल देवानंद बल्कि अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, अमरीश पुरी, अजीत, पृथ्वीराज कपूर, मिथुन चक्रवर्ती, राजकुमार की आवाज को बखूबी उसी अंदाज में निकाल लेते हैं। वह चर्चित नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के अंदाज को कुछ इस तरीके से प्रस्तुत करते हैं कि लोग उनके दीवाने हो जाते हैं। दीपक बताते हैं कि जब वह 5 या 6 साल के थे तब उन्होंने पहली बार फिल्म अभिनेता राजकुमार की आवाज को सुना था और उनकी आवाज की नकल करने की कोशिश की और वह उसमें काफी हद तक सफल रहे। इसके बाद तो वह अभिनेताओं की आवाज की नकल कोशिश करने लगे और उनकी क्षेत्र में इसके लिए पहचान बन गई।

अब तक मुकाम नहीं मिला

वैसे, दीपक को इसका मलाल है कि उनकी कला से उन्हें बहुत लाभ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में कई लोग गांव, कस्बों में स्टेज प्रोग्राम के लिए हमें ले जाने लगे, लेकिन नाम मात्र का पारिश्रमिक मिलता। अब तक अविवाहित दीपक बहुत निर्धन परिवार से आते हैं। उनके परिवार में उनके भाई और अन्य लोग भी है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधे पर है। वे कहते हैं कि परिवार की जिम्मेदारी के कारण ही वे अब तक अविवाहित है। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में मिमिक्री बहुत अच्छी लगी, लेकिन अंदाजा नहीं था कि इस मिमिक्री से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कोसते हुए कहा कि बिहार और झारखंड में कला की कद्र नहीं है। उन्होंने कहा कि 1990 में मुंबई जाने को सोचा था, लेकिन परिवार के दायित्व के कारण वह इतना आसान नहीं हुआ।

मिमिक्री करना आसान नहीं

दीपका का कहना है कि मिमिक्री करना इतना आसान नहीं होता है। उसके लिए रियाज करने की जरूरत पड़ती है। वैसे तो मैं सारे हीरो की आवाज को बखूबी निकाल लेता हूं, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत अमरीश पुरी की आवाज निकालने में हुई थी। तब उसके लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी थी।

End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!