यात्रा

झटकों की फैक्ट्री है बस की लास्ट सीट, भूलकर भी ना करें बुक, जानें बड़ी वजह

Bus Travel Safety Tips: अगर आप बस से सफर करने का प्लान बना रहे हैं, तो ये टिप्स जरूर काम आएंगे। सफर के दौरान कहीं कोई दिक्कत ना हो, इसके लिए कौन-सी सीट बुक कर रहे हैं ये जानना बहुत जरूरी है। अगर गलती से भी आपने बस की लास्ट सीट बुक कर ली है, तो सफर में आपके साथ क्या-क्या हो सकता है, ये जरूर जान लें—वरना बाद में पछताना पड़ सकता है।

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Bus Travel Tips: ट्रेन में वेटिंग और फ्लाइट के महंगे किराए से परेशान होकर ज्यादातर लोग सड़क से सफर करना पसंद करते हैं। कम पैसे में आरामदायक और मजेदार सफर चाहिए तो बस से यात्रा एक अच्छा विकल्प बन जाती है। बस में आप मनचाहे तरीके से सो सकते हैं, फिल्म देख सकते हैं और मजे से सफर कर सकते हैं—कम से कम मैंने भी यही सोचा था!

दिल्ली से लखनऊ जाने के लिए मैंने भी बस का ऑप्शन चुना। टिकट बुक करते समय नजर पड़ी सबसे आखिरी सीट पर—किराया बाकी सीटों से काफी कम। बस, यहीं दिमाग में बचत वाला कीड़ा जाग गया और मैंने वही सीट बुक कर ली।

सोचा था रात भर आराम से फिल्म देखते हुए यात्रा करूंगा, पर मुझे क्या पता था कि ये सफर मस्ती वाला नहीं, दर्द वाला होने वाला है! जैसे ही बस चली, मेरा फिल्म देखने का सपना वहीं धड़ाम से गिर गया। आखिरी सीट पर बैठकर ऐसा लगा जैसे मैं किसी रोलर कोस्टर पर आ बैठा हूं। छोटे-मोटे झटकों के लिए तो तैयार था, लेकिन जो हुआ उसकी कोई उम्मीद नहीं थी। हर मोड़ पर झटका, हर स्पीड ब्रेकर पर ऐसे उछल रहा था जैसे बस नहीं, ट्रैम्पोलिन पर बैठा हूं।

पूरी रात एक मिनट भी ढंग से लेट नहीं पाया। ना नींद आई, ना आराम मिला—सफर सच में किसी नरक की यातना जैसा लग रहा था। सीधी बात ये है कि अगर आप भी बस से ट्रैवल का प्लान बना रहे हैं तो कभी भी लास्ट सीट बुक मत करना। जितनी सस्ती दिखती है, उतनी ही भारी पड़ती है।

बस की लास्ट सीट से सफर करने से क्यों बचना चाहिए-

सबसे ज्यादा झटके और उछाल: यात्रा के दौरान बस की पूरी वाइब्रेशन और झटके आप महसूस करेंगे। हर स्पीड ब्रेकर, हर गड्ढा, हर मोड़ सबसे ज्यादा लास्ट सीट तक आता है।

पीठ दर्द और थकान: लगातार झटकों की वजह से- गर्दन में दर्द, पीठ टूटती हुई फील और शरीर में अकड़न हो जाती है।

नींद का कोई चांस नहीं: लास्ट सीट पर नींद सिर्फ एक कल्पना है। हर 10 सेकंड में धक्का, तो नींद बार-बार टूटती है।

सुरक्षा कम: तेज मोड़ या अचानक ब्रेक लगने पर आगे की तरफ उछलने का डर बना रहता है।

साउंड और वाइब्रेशन ज्यादा: आराम बिल्कुल खत्म हो जाता है क्योंकि इंजन, रोड नॉइज और वाइब्रेशन का सबसे बड़ा असर लास्ट सीट पर ही होता है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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