Difference Between Rafting And White Water Rafting (राफ्टिंग और वाइट वॉटर राफ्टिंग में क्या अंतर होता है): भारत में एडवेंचर लवर्स के लिए एक्सप्लोर करने वाली बहुत सी रोमांचक गतिविधियां हैं। इन्ही में से एक राफ्टिंग और एक वाइट वॉटर राफ्टिंग है, हालांकि इन दोनों को कई लोग एक ही समझते हैं। वहीं कई लोगों ने तो वाइट वॉटर राफ्टिंग के बारे में सुना ही नहीं है, ऐसे में अगर आपको भी नहीं पता कि दोनों क्या हैं। तो स्पोर्ट्स के शौकीन जान लें कि, इन दोनों गतिविधियों में काफी अंतर होता है। हालांकि दोनों ही राफ्ट चलाने का रोमांचक अनुभव देते हैं, लेकिन इनकी प्रकृति, जोखिम और तकनीक काफी अलग-अलग होती है। एडवेंचर लवर्स यहां देखें आखिर
राफ्टिंग क्या है?
राफ्टिंग की अगर बात करें तो ये एक बहुत सामान्य नौका विहार एक्टिविटी होती है, जिसमें नदी या झील पर रबर की नाव यानि कि राफ्ट चलाई जाती है। ये एक काफी ज्यादा मनोरंजक तो रोमांचक अनुभव होता है। इसमें पानी का बहाव सामान्य या हल्का ही होता है। सिंपल राफ्टिंग आप फैमिली के साथ अच्छा रोमांचक अनुभव करने के लिए जरूर ट्राई करें।
व्हाइट वॉटर राफ्टिंग क्या है?
और अगर अब हम व्हाइट वॉटर राफ्टिंग की बात करें, तो ये राफ्टिंग का ही एक ज्यादा रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रूप है। इसमें तेज बहाव वाली नदियों में ऊँची लहरों और खतरनाक मोड़ों से गुजरना होता है। "व्हाइट वॉटर" नाम पानी की झागदार और अशांत धाराओं से आता है, जो रास्ते में आती हैं। ये वाली एडवेंचर एक्टिविटी उच्च स्तर की फिजिकल फिटनेस और टीमवर्क की मांग करता है।
क्या होता है मुख्य अंतर
1. धारा की तीव्रता – राफ्टिंग शांत पानी में होती है, जबकि व्हाइट वॉटर राफ्टिंग तेज और अशांत धाराओं में।
2. जोखिम स्तर – व्हाइट वॉटर राफ्टिंग अधिक खतरनाक होती है और इसमें सुरक्षा उपकरणों की सख्त जरूरत होती है।
3. अनुभव – राफ्टिंग शुरुआती बिगिनर लेवल वाले लोगों लिए होती है, जबकि व्हाइट वॉटर राफ्टिंग के लिए प्रॉपर ट्रेनिंग और अनुभव जरूरी है।
अगर आप भी राफ्टिंग करना चाहते हैं, तो भारत में राफ्टिंग के लिए केरल और उत्तराखंड की शांत नदियाँ प्रसिद्ध हैं। जबकि व्हाइट वॉटर राफ्टिंग के लिए ज़ांस्कर नदी (लद्दाख) और टोंस नदी (उत्तराखंड) बेहतरीन स्थान माने जाते हैं।
