Kedarnath Yatra: हर साल लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से बाबा केदार के दर्शन की इच्छा लेकर लोग उत्तराखंड पहुंचते हैं। लेकिन, पहाड़ों की यात्रा मैदानों की यात्रा जैसी आसान नहीं होती। यहां मौसम कब बदल जाए, रास्ता कब बंद हो जाए और कब प्रशासन को यात्रा रोकनी पड़ जाए, इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। रुद्रप्रयाग जिले में शनिवार रात से लगातार तेज बारिश हो रही है जिसके चलते केदारनाथ यात्रा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा है। हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया है। ऐसे में अगर आप भी केदारनाथ जाने का प्लान बना रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
पहाड़ों का मौसम भरोसेमंद नहीं होता
पहाड़ों में मौसम का अनुमान लगा पाना तकरीबन नामुमकिन होता है। कुछ ही मिनटों में धूप से बारिश और बारिश से कोहरा हो सकता है। भूस्खलन, पत्थर गिरने और रास्ते बंद होने की घटनाएं यहां आम बाता हैं। इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और सिर्फ होटल या ट्रैवल एजेंट की बातों पर भरोसा करके ही प्लान ना करें।
जल्दबाजी करने से बचें
कम समय में यात्रा पूरी करने की जल्दबाजी आपको मुसीबत में डाल सकती है। रातभर सफर करके सीधे ट्रेक शुरू कर देना या शरीर को आराम दिए बिना ऊंचाई पर चढ़ना आपके लिए परेशानी पैदा कर सकता है। पहाड़ों में शरीर को वातावरण के अनुसार ढलने का समय चाहिए होता है। इसलिए आरामदायक तरीके से दिमाम को ठंडा रखकर यात्रा का प्लान करें।
प्रशासन की सलाह को गंभीरता से लें
जल्दी दर्शन के चक्कर में कई बार श्रद्धालु प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हैं। मौसम खराब होने पर प्रशासन जो भी निर्देश जारी करता है, वह यात्रियों की सुरक्षा के लिए होता है जिसे इग्नोर करने की गलती भूलकर भी ना करें। अगर किसी जगह रुकने को कहा जाए या यात्रा अस्थायी रूप से रोकी जाए तो धैर्य रखें और नियमों का पालन करें।
बाबा के धाम पहुंची महिला ने बताया अनुभव
इंस्टाग्राम पर अवनी खताना नाम की यूजर का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वो भावुक मन ले लोगों से केदारनाथ ना आने की अपील कर रही हैं। आंखों में आंसू लिए अवनी कहती हैं, 'पिछले एक महीने से हम केदारनाथ आने तैयारी कर रहे थे, 4 दिन से घर से निकले हुए हैं, 2 दिन से ट्रैफिक में फंसे हुए हैं। 4-5 मिनट का रास्ता 4-5 घंटे में पार किया है। उसके बाद जाकर केदारनाथ पहुंच पाए हैं। 22-23 किलोमीटर पैदल चलकर आए हैं। जिसमें इतना रिस्क था कि घोड़े चल रह हैं, खच्चर चल रहे हैं। गिरने का बहुत रिस्क था। लेकिन यहां कुछ नहीं है।’
अवनी आगे कहती हैं, 'यहां कोई मत आना, खामखां अपना टाइम वेस्ट करोगे, पैसे खराब करोगे और मिलना-मिलाना कुछ नहीं है। दर्शन भी नहीं होने ढंग से। यहां क्या हो रहा है, बस पैसे लेंगे, या आप VIP दर्शन करो या हेल्कॉप्टर से यात्रा करो। अगर आप पैदल यात्रा करके आ रहे हैं, तो दर्शन की उम्मीद मत करना। आज भी हम बिना दर्शन किए वापस जा रहे हैं, बस गेट से।’
