Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व है। हर साल रथयात्रा के दौरान पुरी की गलियां भक्तों से भर जाती हैं। लेकिन अगर आप सिर्फ रथयात्रा के दर्शन कर लौट आते हैं, तो ओडिशा की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का एक बड़ा हिस्सा देखने से चूक जाते हैं। अच्छी बात यह है कि पुरी से कुछ किलोमीटर के दायरे में कई ऐसी जगहें हैं, जहां घूमना आपको सुकून और शांति से भर देगा। यदि आपके पास रथयात्रा के बाद एक या दो दिन का समय है, तो इन 5 जगहों (Puri Tourist Places) को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें।
1. चिलिका झील
ओडिशा के पुरी से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित सतपाड़ा में मौजूद एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील चिलिका का सबसे लोकप्रिय प्रवेश द्वार है। यही वह जगह है जहां इरावडी डॉल्फिन देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से पहुंचते हैं। यदि आप डॉल्फिन देखने का शानदार अनुभव चाहते हैं तो सुबह 7 से 9 बजे के बीच पहुंचने की कोशिश करें। सुबह के समय पानी अपेक्षाकृत शांत रहता है और डॉल्फिन दिखाई देने की संभावना अधिक होती है। यहां बोट की बुकिंग अधिकृत काउंटर से ही कराएं।
घूमने क्यों जाएं?
- इरावडी डॉल्फिन सफारी
- बोटिंग और प्राकृतिक नजारे
- पक्षी प्रेमियों के लिए शानदार स्थान
2. कोणार्क सूर्य मंदिर
पुरी से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित कोणार्क को विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर और शांत समुद्र तट के लिए जाना जाता है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर भारतीय स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। मंदिर घूमने के बाद कुछ समय कोणार्क बीच पर बिताना यात्रा को और खास बना देता है। यहां भीड़ बहुत कम रहती है और सूर्योदय या सूर्यास्त का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।
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3. रामचंडी बीच
कोणार्क मरीन ड्राइव पर स्थित रामचंडी बीच उन यात्रियों के लिए बेहतरीन है जो शांत वातावरण में समुद्र का आनंद लेना चाहते हैं। यहां आपको सुनहरी रेत, नीला समुद्र और कम भीड़ में शांति और सुकून मिलेगा। ये कपल्स, परिवार और फोटोग्राफी के शौकीनों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यहां कुशाभद्रा नदी के मुहाने के आसपास का इलाका नेचर ब्यूटी से भरपूर है। मौसम और स्थानीय व्यवस्थाओं के अनुसार यहां मोटरबोटिंग जैसी गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है। शाम के समय यहां आकर सनसेट देखना हमेशा के लिए यादगार बन जाता है।
4. रघुराजपुर हेरिटेज विलेज
अगर आप ओडिशा की संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो पुरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित रघुराजपुर गांव जरूर जाएं। यह गांव अपनी प्रसिद्ध पट्टचित्र कला, ताड़पत्र चित्रकारी और पारंपरिक हस्तशिल्प के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां कलाकारों को काम करते हुए देखने का मौका मिलता है और चाहें तो सीधे उनके घरों से हस्तनिर्मित कलाकृतियां भी खरीद सकते हैं।
5. बालूखंड-कोणार्क वन्यजीव अभ्यारण्य
पुरी और कोणार्क के बीच फैला यह वन्यजीव अभयारण्य समुद्र तट और हरियाली का अनोखा संगम है। यहां जंगल के बीच से गुजरने वाला रास्ता अपने आप में एक सुंदर ड्राइविंग अनुभव देता है। यदि आपका भाग्य अच्छा हो तो हिरण, विभिन्न पक्षियों और अन्य वन्यजीवों की झलक भी मिल सकती है। मानसून के मौसम में यहां की हरियाली और भी मनमोहक हो जाती है।
केवल 1 दिन मैं कैसे बनाएं ट्रैवल प्लान
- सुबह जल्दी पुरी से सतपाड़ा के लिए निकलें और डॉल्फिन सफारी करें।
- लौटते समय कोणार्क सूर्य मंदिर देखें।
- शाम रामचंडी बीच पर बिताएं।
- रात तक पुरी वापस लौट आएं।
दो दिन में कैसे करें ट्रैवल की प्लानिंग
- पहला दिन: पुरी → सतपाड़ा (चिलिका) → कोणार्क → रामचंडी बीच
- दूसरा दिन: रघुराजपुर हेरिटेज विलेज → बालूखंड-कोणार्क वन्यजीव अभयारण्य → पुरी लोकल मार्केट
लोकल फूड जरूर करें ट्राई
पुरी की यात्रा स्थानीय व्यंजनों के बिना अधूरी मानी जाती है। समय मिले तो जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद, छेना पोड़ा, दही बड़ा-आलू दम, रसाबली और पारंपरिक ओड़िया व्यंजनों का स्वाद जरूर लें।
यादगार बनेगा सफर
भगवान जगन्नाथ के दर्शन आत्मिक शांति देते हैं, लेकिन पुरी के आसपास फैली प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहर और स्थानीय संस्कृति इस यात्रा को एक अलग ही आयाम देती है। अगर आप रथयात्रा के लिए पुरी जा रहे हैं, तो एक अतिरिक्त दिन जरूर निकालें। चिलिका की डॉल्फिन, कोणार्क की विरासत, रामचंडी की शांति, रघुराजपुर की कला और बालूखंड की हरियाली मिलकर आपकी धार्मिक यात्रा को एक यादगार ट्रैवल एक्सपीरियंस में बदल देंगी।
