यात्रा

उत्तराखंड का वो शिव मंदिर जहां सावन में दिखता है आस्था का शानदार नजारा, CM धामी ने भी की दर्शन की अपील

Baijnath Temple: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में भगवान शिव का पावन मंदिर स्तिथ है। जिसे वैजनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। यदि आप इस सावन भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो जान लें इस खास मंदिर के बारे में...

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वैजनाथ धाम (उत्तराखंड) Photo - X/@pushkardhami

Baijnath Temple: उत्तराखंड की पहाड़ियों में जब सावन की फुहारें देवदार और चीड़ के जंगलों को भिगोती हैं, तो यहां की वादियों में सिर्फ हरियाली ही नहीं बढ़ती, बल्कि शिवभक्ति की गूंज भी तेज हो जाती है। इसी आस्था के बीच बागेश्वर जिले की गोमती नदी के किनारे स्थित बैजनाथ मंदिर सावन में श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बन जाता है। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों से सावन (Sawan 2026) में बैजनाथ धाम के दर्शन करने की अपील की है। यदि आप भी इस सावन किसी प्राचीन शिव मंदिर के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार उत्तराखंड के बैजनाथ धाम के दर्शन का प्लान करना चाहिए।

गोमती किनारे बसा है महादेव का प्राचीन धाम

बैजनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि हिमालयी इतिहास, स्थापत्य और आस्था का ऐसा संगम है जहां पहुंचकर यात्रा का अनुभव महज धार्मिक नहीं रह जाता। यह मंदिर बागेश्वर जिले की गरुड़ घाटी में गोमती नदी के किनारे स्थित है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार, मौजूदा मंदिर परिसर 12वीं शताब्दी से जुड़ा है और यह क्षेत्र कभी कत्यूरी राजवंश की राजधानी रहा था। सावन के दौरान नदी की कलकल, पहाड़ों की हरियाली और मंदिर परिसर में सुनाई देती घंटियों की आवाज इस जगह को अलग ही आध्यात्मिक वातावरण देती है।

वैद्यनाथ रूप में होती है भगवान शिव की पूजा

बैजनाथ मंदिर में भगवान शिव को वैद्यनाथ स्वरूप में पूजा जाता है। मान्यता और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के कारण सावन में यहां शिवभक्तों की आस्था विशेष रूप से दिखाई देती है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री धामी ने भी इस प्राचीन धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए श्रद्धालुओं से इसके दर्शन का आग्रह किया है। यहां पहुंचने वाला श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन के साथ मंदिर परिसर की प्राचीन संरचना को भी करीब से देख सकता है।

कत्यूरी राजवंश की विरासत

बैजनाथ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां धर्म और इतिहास एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। यह इलाका कभी कत्यूरी राजाओं की राजधानी था और आज भी मंदिर परिसर में उस दौर की स्थापत्य विरासत दिखाई देती है। मंदिर परिसर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक बताया गया है। मंदिर की नागर शैली की वास्तुकला, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और आसपास मौजूद प्राचीन मंदिर इसे इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए भी खास बनाते हैं।

एक साथ दिखेंगे कई प्राचीन मंदिर

बैजनाथ को केवल एक शिव मंदिर समझना इसकी पूरी कहानी को छोटा कर देना होगा। उत्तराखंड पर्यटन की जानकारी के अनुसार, यहां मुख्य शिव मंदिर के साथ करीब 17 अन्य मंदिर भी हैं, जिनमें भगवान ब्रह्मा, गणेश, पार्वती, चंडिका, कुबेर और सूर्य आदि से जुड़े मंदिर शामिल हैं। परिसर में काले पत्थर से बनी माता पार्वती की सुंदर प्रतिमा भी विशेष आकर्षण है। यानी यहां आने वाले यात्रियों के लिए यह एक ऐसा विरासत परिसर है, जहां कुछ कदमों की दूरी पर अलग-अलग कालखंडों और धार्मिक परंपराओं की झलक मिलती है।

सावन में क्यों खास है ये यात्रा

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में उत्तराखंड के प्राचीन शिव मंदिरों की यात्रा का अपना अलग अनुभव है। बैजनाथ में सावन के दौरान मंदिर दर्शन के साथ पहाड़ी प्रकृति का आनंद भी लिया जा सकता है। सुबह के समय मंदिर पहुंचना इस यात्रा को और खूबसूरत बना सकता है। बारिश से धुली पहाड़ियां, गोमती नदी का शांत प्रवाह और मंदिर की घंटियों की आवाज मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं, जिसे सिर्फ तस्वीरों में कैद करना आसान नहीं।

सावन में बैजनाथ के दर्शन

सावन में पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए यात्रा पर निकलते समय बारिश से बचाव का सामान, फिसलन से बचने वाले जूते और जरूरी दवाएं साथ रखना बेहतर है। मंदिर में भीड़ के दौरान स्थानीय व्यवस्था और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। इस यात्रा का सबसे खूबसूरत हिस्सा शायद यही है कि बैजनाथ में आपको एक ही जगह शिवभक्ति, हिमालयी प्रकृति और सदियों पुरानी कत्यूरी राजवंश की विरासत तीनों का अनुभव मिलता है।

यही वजह है कि सावन में अगर उत्तराखंड की किसी ऐसी जगह की तलाश है जहां यात्रा में आस्था के साथ इतिहास और प्रकृति भी शामिल हो, तो बागेश्वर का बैजनाथ मंदिर आपकी सूची में जरूर होना चाहिए।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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