Tungnath from Delhi: गर्मी का मौसम चरम पर है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर से बेहद पास होने की वजह से तुंगनाथ पर्यटकों को खासा लुभाता है। पंच केदारों में से एक दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर तुंगनाथ भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। इस रोमांचक यात्रा के दौरान ना केवल पर्यटक तुंगनाथ के दर्शन करते हैं बल्कि इससे 1.5 की ट्रैकिंग करके चंद्रशिला भी जाते हैं। चंद्रशिला से जुड़ी मान्यता है कि रावण के वध के बाद श्रीराम ने पश्चाताप के लिए चंद्रशिला की इस पहाड़ी पर कुछ समय तक रहकर ध्यान किया था। अगर आप तुंगनाथ जाने का प्लान कर रहे हैं तो जान लें कि लंबा ट्रैफिक जाम (Tungnath Traffic) आपके ट्रिप का पूरा मजा किरकिरा कर सकता है। अगर आप भी तुंगनाथ-चंद्रशिला जाने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखेंगे तो सफर काफी आसान हो सकता है।
तुंगनाथ जाने वाले जाम से कैसे बचें
कोशिश करें कि रात 9 से 11 बजे के बीच दिल्ली से निकल जाएं क्योंकि अगर आप सुबह या दिन में निकलते हैं तो इस बात की काफी ज्यादा संभावना है कि हरिद्वार और ऋषिकेश में आपको भारी ट्रैफिक मिले। अगर आप देर रात यात्रा के लिए निकलते हैं तो ऐसे में आप सुबह-सुबह ऋषिकेश पार कर लेंगे और जाम से काफी हद तक बच जाएंगे।
अगर संभव हो तो गुरुवार रात या सोमवार सुबह का प्लान करें। वीकेंड पर खासकर शुक्रवार रात और शनिवार सुबह सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। चोपता से ही तुंगनाथ और चंद्रशिला ट्रेक शुरू होता है। रास्ता बेहद खूबसूरत है, लेकिन कई जगह सड़कें संकरी हैं, इसलिए ओवरस्पीडिंग से बचना जरूरी है।
कहां मिलता है सबसे ज्यादा जाम
हरिद्वार, ऋषिकेश और श्रीनगर के आसपास अक्सर लंबा ट्रैफिक देखने को मिलता है। छुट्टियों और वीकेंड में यहां गाड़ियों की लाइन लग जाती है। इसके अलावा चोपता के पास पार्किंग की भी दिक्कत होती है। अगर सुबह 5 से 7 बजे के बीच ऋषिकेश पार कर लेते हैं तो काफी राहत मिल सकती है।
तुंगनाथ कैसे पहुंचें
तुंगनाथ पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको ऋषिकेश तक आना पड़ेगा। ऋषिकेश पहुंचने के बाद आपको उखीमठ होते हुए चोपता गांव पहुंचना होता है। चोपता के लिए डायरेक्ट कोई बस सेवा नहीं है ऐसे में आप निजी वाहन या फिर टैक्सी के जरिए वहां पहुंच सकते हैं। दिल्ली से चोपता पहुंचने में आपको तकरीबन 10 से 11 घंटे का समय लग सकता है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून के बीच होता है। इस दौरान मौसम सुखद और सुहावना होने के साथ ही रास्ते साफ होते हैं। मानसून के महीनों के दौरान यहां यात्रा करने से बचना चाहिए।
