Triund Trek: अगर आप दिल्ली-NCR या आसपास रहते हैं और वीकेंड पर कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो त्रिउंड ट्रेक आपके लिए एकदम परफेक्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन है। त्रिउंड ट्रेक की खास बात ये है कि इसके लिए आपको कोई बहुत प्रोफेशनल ट्रैकर होने की जरूरत नहीं है। अगर आप पहली बार भी ट्रेकिंग कर रहे हैं, तब भी इसे आराम से किया जा सकता है। धर्मशाला की कांगड़ा घाटी में स्थित ये ट्रेक आपको जैसे-जैसे ऊपर ले जाता है, वैसे-वैसे सामने धौलाधार पर्वतों का शानदार नजारा खुलता जाता है। बर्फ से ढकी चोटियां और दूर तक फैली हरियाली देखकर सच में मन खुश हो जाता है।
ये ट्रेक छोटा जरूर है, लेकिन रास्ता थोड़ा खड़ा है, यानी चढ़ाई थोड़ी मेहनत वाली लग सकती है। लेकिन जैसे ही आप ऊपर पहुंचते हैं रास्ते पर चलने का मजा सारी थकान भुला देता है। बीच-बीच में पक्षियों की चहचहाहट भी सुनाई देती है, जिससे पूरा माहौल और भी शांत और खूबसूरत लगने लगता है। खासकर अगर आपको नेचर और बर्ड वॉचिंग पसंद है तो ये जगह आपके लिए बोनस है।
कहां से होती है त्रिउंड ट्रेक की शुरुआत
त्रिउंड ट्रेक की शुरुआत आमतौर पर धर्मकोट (Dharamkot) से होती है। घने देवदार के जंगलों के बीच से गुजरने के एहसास के चलते धर्मकोट वाला रास्ता सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। चाहें तो आप मैक्लॉडगंज, भागसू या गल्लू गांव से भी ट्रेक की शुरुआत कर सकते हैं। लेकिन, धर्मकोट का रास्ता आपको कभी ना भूल पाने वाला एहसास देगा जो फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए भी बिल्कुल परफेक्ट है।

कहां से होती है त्रिउंड ट्रेक की शुरुआत
दिन 1- धर्मकोट से त्रिउंड
इस ट्रेक की दूरी करीब 5.5 किलोमीटर है जिसमें आपको लगभग 4 घंटे का समय लग सकता है। धूप और भीड़ से बचने के लिए आप सुबह जल्दी ट्रेक शुरू कर सकते हैं। धर्मकोट में मौजूद सरकारी स्कूल के पास एक पानी की टंकी मिलती है। यहीं से एक छोटा सा रास्ता ऊपर की तरफ जंगल में जाता है। करीब आधे घंटे की चढ़ाई के बाद आप गल्लू मंदिर के खुले मैदान में पहुंच जाते हैं। यहां से तीन रास्ते निकलते हैं, लेकिन त्रिउंड वाला रास्ता सीधे आगे जंगल के अंदर जाता है।
आगे का पूरा रास्ता घने ओक और देवदार के जंगलों से होकर गुजरता है। धीरे-धीरे रास्ता पत्थरीला और थोड़ा ढलान वाला हो जाता है। बीच-बीच में छोटे ढाबे और चाय की दुकानें भी मिलती हैं, जहां आप आराम कर सकते हैं। ट्रेक के दौरान लगभग 22 मोड़ आते हैं। करीब आधे रास्ते पर आपको मैजिक व्यू कैफे मिलता है, जहां से पहाड़ों का नजारा देखते ही बनता है।
थोड़ी दूर चलने पर खुले घास वाले मैदान दिखने लगते हैं। यही जगह त्रिउंड रिज कहलाती है। यहां से एक तरफ आपको विशाल धौलाधार पर्वत श्रृंखला दिखाई देती है और दूसरी तरफ नीचे खूबसूरत कांगड़ा घाटी का नजारा होता है। यह जगह कैंपिंग के लिए बहुत फेमस है।
रुकने की व्यवस्था
अगर आप चाहें तो यहां रात रुक सकते हैं। फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में पहले से बुकिंग करके लगभग ₹600–₹800 में रुकने की सुविधा मिल जाती है। इसके अलावा कई टेंट और ढाबे भी हैं जहां आप कैंपिंग कर सकते हैं।

त्रिउंड ट्रेक से जुड़ी महत्वपूर्ण बात
दिन 2: त्रिउंड से वापस धर्मकोट
सुबह जल्दी उठकर ट्रेकिंग शुरू करें। सूर्योदय का नजारा देखना इस ट्रेक का सबसे यादगार पल है जिसे आप मिस नहीं कर सकते हैं। इसके बाद आप वापस उसी रास्ते से नीचे उतरते हैं। नीचे उतरना चढ़ाई की तुलना में काफी आसान होता है और इसमें 2 से 3 घंटे लगते हैं। रास्ते में आप चाहें तो चाय की दुकानों पर रुककर थोड़ा आराम भी कर सकते हैं।
त्रिउंड ट्रेक से जुड़ी 5 जरूरी बातें
अगर आप त्रिउंड ट्रेक पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सही तैयारी के साथ यह ट्रिप ना सिर्फ आसान बन जाती है बल्कि मजा भी दोगुना हो जाता है। चाहे आप दोस्तों, परिवार या फिर सोलो ट्रिप पर जा रहे हों, छोटी-छोटी चीजें आपकी पूरी यात्रा को शानदार बना सकती हैं। अगर आप इन जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे, तो त्रिउंड का रोमांच और खूबसूरत नजारे जिंदगीभर याद रहेंगे।
1- त्रिउंड ट्रेक की कठिनाई: त्रिउंड ट्रेक आसान लेवल का ट्रेक है। अगर आपने पहले कभी ट्रैकिंग नहीं भी की है, तब भी इसे आराम से कर सकते हैं। शुरुआत में रास्ता हल्का-हल्का चढ़ाई वाला और बीच में कुछ तेज ढलान आती हैं आपको बस उनका ध्यान रखना होता है।
2- त्रिउंड ट्रेक करने का सबसे अच्छा समय: त्रिउंड जाने का सबसे बढ़िया समय- मार्च से जून (गर्मी और साफ मौसम), सितंबर से नवंबर (ठंडा लेकिन साफ आसमान) है। इस समय रास्ता साफ रहता है और पहाड़ों का नजारा शानदार दिखता है।
3- त्रिउंड ट्रेक जाने से पहले कैसे करें तैयारी: ज्यादा भारी-भरकम तैयारी की जरूरत नहीं है। कुछ बेसिक चीजों का ध्यान रखना होता है जैसे- रोजाना 20–30 मिनट वॉक या हल्की दौड़, आरामदायक ट्रेकिंग शूज जरूर लें, मौसम देखकर ही निकलें, एक छोटा बैग जिसमें पानी, स्नैक्स और जैकेट हो।
4- त्रिउंड ट्रेक का मौसम: यहां मौसम जल्दी-जल्दी बदलता रहता है। ज्यादातर दिन में हल्की धूप और ठंडी हवा रहती है। शाम के बाद यहां काफी ठंड बढ़ जाती है और रात में भी ज्यादातर तेज ठंड रहती है। ट्रेकिंग के दौरान गर्म जैकेट साथ रखना बहुत जरूरी है।
5- त्रिउंड ट्रेक के आसपास रहने की व्यवस्था: त्रिउंड में रुकने के लिए आपको ज्यादा परेशानी नहीं होगी। ऊपर त्रिउंड रिज पर टेंट और ढाबे आसानी से मिल जाते हैं। अगर आप फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में स्टे करना चाहते हैं तो इसके लिए पहले से बुकिंग करनी पड़ती है।

त्रिउंड ट्रेक से जुड़ी जरूरी बातें (photo: pinterest)
त्रिउंड ट्रेक से जुड़ी महत्वपूर्ण बात
त्रिउंड ट्रेक आसान माना जाता है। मैक्लोडगंज या धर्मशाला से आसानी से आप इसे शुरू कर सकते हैं। वीकेंड पर अगर आप यहां जा रहे हैं तो जान लें कि इस टाइम पर यहां काफी भीड़ हो सकती है। ऐसे में इस जगह की असली खूबसूरती और सुकून महसूस करनने के लिए आप वीकडेज में ट्रिप का प्लान बना सकते हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि दिल्ली-एनसीआर से बेहद पास होने की वजह से कई लोग एक साथ यहां पहुंचते हैं, जिससे आपका मजा किरकिरा हो सकता है।
