Travel Trend: आजकल यात्रा करने का तरीका पहले जैसा नहीं रहा। पहले लोग सिर्फ घूमने या सिर्फ ऑफिस के काम से बाहर जाते थे, लेकिन अब दोनों चीजें साथ-साथ होने लगी हैं। लोग बिजनेस ट्रिप पर जाते हैं और उसी के साथ एक-दो दिन की छुट्टी भी जोड़ लेते हैं। इसी ट्रेंड को ब्लेजर (Bleisure) ट्रैवल कहा जाता है। यानी बिजनेस+लीजर का कॉम्बिनेशन। सुनने में यह तरीका काफी अच्छा लगता है। ऑफिस का काम भी हो जाता है और नई जगह घूमने का मौका भी मिल जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे सच में आराम मिलता है या फिर छुट्टियों में भी काम पीछा नहीं छोड़ता?
आखिर ब्लेजर ट्रैवल है क्या?
मान लीजिए आपको ऑफिस के काम से सिंगापुर जाना है। मीटिंग खत्म होने के बाद उसी शहर या आसपास की किसी जगह पर दो-तीन दिन घूमने रुक जाते हैं। यानी अलग से छुट्टी प्लान करने की जरूरत नहीं पड़ती और ट्रिप का पूरा फायदा मिल जाता है। आजकल खासकर युवा प्रोफेशनल्स और वर्क फ्रॉम एनीवेयर करने वाले लोग इस ट्रेंड को खूब पसंद कर रहे हैं।
लोग इसे इतना पसंद क्यों कर रहे हैं?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबी छुट्टी लेना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में अगर ऑफिस की ट्रिप के साथ थोड़ा घूमने का मौका मिल जाए, तो लोग उसे छोड़ना नहीं चाहते। कई कंपनियां भी अब हाइब्रिड वर्क कल्चर अपना रही हैं। इसलिए कर्मचारी मीटिंग खत्म होने के बाद कुछ दिन वहीं रुककर शहर घूम लेते हैं। इससे अलग से ट्रैवल का खर्च भी कम हो जाता है और नई जगह देखने का मौका भी मिल जाता है।
नई जगह घूमने से दिमाग भी होता है फ्रेश
लगातार काम करते-करते हर कोई थक जाता है। ऐसे में नई जगह घूमना, वहां का खाना खाना, लोकल मार्केट देखना या किसी बीच या पहाड़ पर समय बिताना दिमाग को काफी राहत देता है। यही वजह है कि अब कई होटल तेज़ इंटरनेट, को-वर्किंग स्पेस और लंबे समय तक रुकने वाले खास पैकेज भी देने लगे हैं। यानी जरूरत पड़े तो आप काम भी कर सकते हैं और बाकी समय छुट्टियों का मजा भी ले सकते हैं।
लेकिन यहीं से शुरू होती है असली परेशानी
ब्लेजर ट्रैवल की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कई लोग छुट्टियों में भी काम से पूरी तरह दूर नहीं हो पाते। बीच पर बैठे हों या पहाड़ों में घूम रहे हों, लेकिन हर थोड़ी देर में ईमेल चेक करना, ऑफिस के मैसेज का जवाब देना या लैपटॉप खोल लेना आम बात हो गई है। ऐसे में शरीर तो घूम रहा होता है, लेकिन दिमाग अब भी ऑफिस में ही अटका रहता है। नतीजा यह होता है कि छुट्टी पूरी होने के बाद भी थकान महसूस होती है।
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क्या इससे वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर छुट्टियों के दौरान भी लगातार काम करते रहेंगे, तो असली आराम नहीं मिल पाएगा। दिमाग को भी ब्रेक चाहिए होता है। अगर हर समय ऑफिस के कॉल, मैसेज और ईमेल आते रहेंगे, तो छुट्टी का मकसद ही खत्म हो जाएगा। इसलिए काम और आराम के बीच साफ सीमा बनाना बहुत जरूरी है।
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ब्लेजर ट्रैवल का सही तरीका क्या है?
अगर आप ब्लेजर ट्रैवल कर रहे हैं, तो पहले से तय कर लें कि काम कब खत्म होगा और छुट्टी कब शुरू होगी। ऑफिस में अपने सहकर्मियों को बता दें कि किस समय आप उपलब्ध नहीं रहेंगे। जहां तक हो सके, छुट्टियों के दौरान ऑफिस की नोटिफिकेशन बंद रखें और बार-बार ईमेल देखने से बचें। तभी आप उस जगह का असली आनंद ले पाएंगे।
