तिब्बत की राजधानी ल्हासा का मशहूर तिब्बत म्यूजियम में इतिहास, संस्कृति और आधुनिक विकास का पूरा सफर कैद है। इसे तिब्बत का एकमात्र'नेशनल फर्स्ट-क्लास म्यूजियम' माना जाता है। यहां आने वाले तिब्बत की प्राचीन सभ्यता से आधुनिक दौर तक के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास को एक साथ देख सकता है।
साल 2022 में करीब 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के बाद इस संग्रहालय को अत्याधुनिक सुविधाओं और नई तकनीक के साथ दोबारा आम लोगों के लिए खोला गया। आज यह चीन और तिब्बत के सबसे आधुनिक संग्रहालयों में गिना जाता है।
5 लाख से ज्यादा दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहरें
तिब्बत म्यूजियम में 5 लाख 20 हजार से अधिक ऐतिहासिक कलाकृतियां संरक्षित हैं। इनमें प्राचीन मूर्तियां, धार्मिक वस्तुएं, हस्तलिखित ग्रंथ, दुर्लभ दस्तावेज, चित्रकला और शाही प्रतीक शामिल हैं। इनमें से कई वस्तुओं को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा प्राप्त है और वे सदियों पुराने इतिहास की गवाही देती हैं। यह संग्रहालय तिब्बत की धार्मिक परंपराओं, कला, लोकजीवन और ऐतिहासिक घटनाओं को समझने का महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है।
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सोने की शाही मुहरें और दस्तावेज
संग्रहालय की सबसे चर्चित वस्तुओं में चीनी मिंग और किंग राजवंशों के सम्राटों द्वारा तिब्बती नेताओं को दी गई सोने और जेड की शाही मुहरें और आधिकारिक दस्तावेज शामिल हैं। इन शाही दस्तावेजों और मुहरों को चीन और तिब्बत के ऐतिहासिक संबंधों के प्रमाण के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। यह संग्रहालय के सबसे अधिक देखे जाने वाले प्रदर्शनों में से एक है।
गोल्डन बेनबा बोतल का विशेष महत्व
म्यूजियम की सबसे मूल्यवान धरोहरों में गोल्डन बेनबा बोतल भी शामिल है। इसे संग्रहालय के शीर्ष 10 राष्ट्रीय खजानों में गिना जाता है। ऐतिहासिक रूप से इस पात्र का उपयोग दलाई लामा और पंचेन लामा के पुनर्जन्म की पहचान से जुड़ी लॉटरी प्रक्रिया में किया जाता था। इसलिए धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व माना जाता है।
आधुनिक चीन की कहानी भी सुनाता है संग्रहालय
म्यूजियम का 'न्यू चाइना' सेक्शन आधुनिक चीन के निर्माण की कहानी को समर्पित है। यहां उन नेताओं, कारीगरों, इंजीनियरों और मजदूरों को श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्होंने आधुनिक चीन के निर्माण में योगदान दिया। यहां लिखी गई एक खास लाइन सबका ध्यान जरूर खींचती है:
"जब आप किसी कुएं का मीठा पानी पिएं, तो यह भी याद रखें कि आखिर वह कुआं खोदा किसने था।"
यह संदेश उन लोगों के योगदान को याद रखने की बात करता है, जिन्होंने विकास की नींव रखी।
