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रथ यात्रा 2026: कैसे करें अपने टूर की प्लानिंग, यहां जानें जगन्नाथ जी के दर्शन से लेकर घूमने-फिरने तक पूरी गाइड

Rath Yatra 2026 Travel Guide: रथ यात्रा 2026 में पुरी जाने की योजना बना रहे हैं तो जानें जगन्नाथ मंदिर दर्शन के अलावा वहां और क्या करें। यहां दी गई जानकारी आपके लिए घूमने-फिरने की पूरी गाइड बनेगी।

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रथ यात्रा की टूर गाइड

Rath Yatra 2026 Travel Guide: रथ यात्रा के दिनों में पुरी की तस्वीर बिल्कुल बदल जाती है। सड़कें श्रद्धालुओं से भर जाती हैं, हर तरफ 'जय जगन्नाथ' के जयकारे गूंजते हैं और पूरा शहर जैसे भक्ति के रंग में रंग जाता है। अगर आप रथ यात्रा 2026 के लिए पुरी जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो कैसे इसे प्लान करें - की जानकारी हम आपको यहां दे रहे हैं।

कोशिश करें कि सफर सिर्फ रथ यात्रा तक सीमित न रहे। थोड़ा वक्त निकालेंगे तो यही ट्रिप दर्शन के साथ-साथ घूमने, स्थानीय स्वाद और ओडिशा की संस्कृति को करीब से जानने के मौके में भी बदल जाएगा।

पुरी की रथ यात्रा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव है जिसे तस्वीरों या वीडियो में पूरी तरह महसूस नहीं किया जा सकता। यहां आकर समझ आता है कि आखिर क्यों हर साल लाखों लोग इतनी दूर से भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अगर इस बार आप भी जाने का मन बना रहे हैं, तो थोड़ा समय निकालकर पुरी को भी महसूस कीजिए। यकीन मानिए, वापस लौटते वक्त आपके पास सिर्फ फोटो नहीं, ढेर सारी यादें भी होंगी।

रथ यात्रा- भक्ति का एक अनोखा अनुभव

टीवी या सोशल मीडिया पर रथ यात्रा देखना और उसे सामने से देखना, दोनों बिल्कुल अलग अनुभव हैं। जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर निकलते हैं, तो पूरा पुरी शहर मानो उनके स्वागत में उमड़ पड़ता है। हजारों लोग एक साथ रथ की रस्सियां खींचते हैं और उस पल का उत्साह शब्दों में बयां करना आसान नहीं। अगर पहली बार जा रहे हैं तो प्रशासन की ओर से तय किए गए रूट और सुरक्षा नियमों का जरूर पालन करें।

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समय रहते बुकिंग पूरी करें

रथ यात्रा के समय पुरी में इतनी भीड़ होती है कि होटल और ट्रेन टिकट कई बार महीनों पहले ही फुल हो जाते हैं। इसलिए जैसे ही तारीख तय हो, सबसे पहले रहने और आने-जाने का इंतजाम कर लें। जुलाई में बारिश भी रहती है, इसलिए सामान पैक करते समय छाता, रेनकोट और आरामदायक फुटवियर रखना बिल्कुल न भूलें। भीड़ में हल्का बैग लेकर चलना भी काफी आसान रहता है।

जगन्नाथ मंदिर में बिताएं थोड़ा सुकून भरा समय

रथ यात्रा के अलावा पुरी का दिल है भगवान जगन्नाथ का मंदिर। करीब 800 साल पुराने इस मंदिर का इतिहास जितना रोचक है, उतनी ही भव्य इसकी वास्तुकला भी है। अगर भीड़ थोड़ी कम मिले तो कुछ देर मंदिर परिसर के आसपास बैठकर वहां का माहौल महसूस कीजिए। ये पल आपकी यात्रा के लंबे समय तक सबसे खूबसूरत पल रहेंगे।

भगवान जगन्नाथ जी, बलभद्र और सुभद्रा की छवियां

भगवान जगन्नाथ जी, बलभद्र और सुभद्रा की छवियां

आस्था का महाप्रसाद

पुरी जाएं और महाप्रसाद न खाएं, ऐसा शायद ही कोई करता हो। मिट्टी के बर्तनों में तैयार होने वाला यह प्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। इसकी सबसे खास बात इसकी सादगी है। बिना ज्यादा मसालों के भी इसका स्वाद अंतरात्मा को तृप्त करने वाला होता है।

गुंडिचा मंदिर भी जाएं

बता दें कि रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ यहीं विराजमान होते हैं। यही वजह है कि इसे भगवान की मौसी का घर भी कहा जाता है। जगन्नाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर रथ यात्रा के दिनों में श्रद्धालुओं से भरा रहता है। अगर समय हो तो यहां जरूर जाएं, क्योंकि रथ यात्रा की कहानी यहीं आकर पूरी होती है।

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दर्शन के बाद पुरी बीच पर कुछ घंटे जरूर बिताएं

पूरे दिन की भीड़ और भागदौड़ के बाद पुरी बीच आपको अलग ही सुकून देता है। सुबह जल्दी पहुंचें तो बंगाल की खाड़ी से निकलता सूरज देखने लायक होता है। वहीं शाम होते-होते बीच का माहौल बिल्कुल बदल जाता है। बच्चे रेत में खेलते दिखेंगे, कहीं ऊंट की सवारी होगी तो कहीं गरमा-गरम चाट और समुद्री स्नैक्स की खुशबू आपका ध्यान खींच लेगी।

बाजार से खाली हाथ लौटना मुश्किल है

पुरी के स्थानीय बाजारों में घूमना अपने आप में एक अलग अनुभव है। यहां की पट्टचित्र पेंटिंग, एप्लिक वर्क, सीप से बने सजावटी सामान, चांदी की फिलिग्री ज्वेलरी और ओडिशा की हैंडलूम साड़ियां सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं। अगर परिवार या दोस्तों के लिए कुछ यादगार खरीदना चाहते हैं, तो यहां थोड़ा समय जरूर निकालें।

एक दिन कोणार्क और चिलिका के नाम भी रखें

अगर आपकी ट्रिप दो-तीन दिन की है तो पुरी से बाहर भी निकलें। करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर अपनी शानदार नक्काशी और विशाल रथ जैसी संरचना के लिए दुनिया भर में मशहूर है। वहीं प्रकृति पसंद है तो चिलिका झील का प्लान बनाइए। बोटिंग करते हुए इरावडी डॉल्फिन दिख जाए तो समझिए आपकी ट्रिप और भी खास हो गई।

पुरी से कुछ दूरी पर है कोणार्क का सन टेंपल

पुरी से कुछ दूरी पर है कोणार्क का सन टेंपल

कुछ छोटी बातें, जो बड़ी परेशानी से बचा सकती हैं

रथ यात्रा के दौरान भीड़ बहुत ज्यादा होती है। इसलिए छोटे बच्चों और बुजुर्गों का हाथ कभी न छोड़ें। पानी की बोतल, जरूरी दवाइयां और मोबाइल पूरी तरह चार्ज रखें। नकदी कम रखें और कीमती सामान संभालकर रखें। बारिश कभी भी शुरू हो सकती है, इसलिए मौसम को हल्के में लेने की गलती न करें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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