Rajasthan Wildlife Tourism: यूनीक ट्रैवल डेस्टिनेशन की तलाश अब आपकी पूरी होने वाली है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान जो भरतपुर पक्षी विहार के नाम से भी जाना जाता है यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है जहां घूमने का आप प्लान कर सकते हैं। भारत के सबसे अद्वितीय पक्षी अभ्यारण्य के रूप में भी इसे जाना जाता है। राजस्थान राज्य के भरतपुर में यह नेशनल पार्क स्थित है। यह स्थान 370 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है, जिसमें प्रवासी और स्थायी दोनों प्रकार के पक्षी शामिल हैं।
यहां एक समय में साइबेरियन क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षियों का वास होता था, हालांकि अब वे यहां नहीं देखे जाते। इसके अलावा पक्षियों की अन्य प्रजातियां जैसे कि बगुला, सारस, और क्रेन यहां आम हैं। इस सेंचुरी का मुख्य आकर्षण साइबेरियन क्रेन था, जो दुनिया के सबसे दुर्लभ प्रवासी पक्षियों में से एक है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, ये पक्षी यहां दिखाई नहीं देते हैं। इसके स्थान पर, यहां अन्य कई प्रजातियां देखी जा सकती हैं, जैसे कि बगुला, सारस, और क्रेन। ये पक्षी सर्दियों के मौसम में यहां आते हैं।
केवलादेव का पारिस्थितिकी तंत्र ना केवल पक्षियों के लिए बल्कि अन्य जलीय जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके संरक्षण के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि इस अद्वितीय स्थान की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखा जा सके। सेंचुरी में पर्यटकों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिसमें पक्षी अवलोकन के लिए टॉवर और विश्राम स्थल शामिल हैं। इसके अलावा, यहां आने वाले पर्यटकों को स्थानीय वन्यजीवों और पारिस्थितिकी के बारे में जानकारी देने के लिए कई शैक्षणिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
इस अभ्यारण्य की महत्ता केवल पक्षियों के संरक्षण तक सीमित नहीं है। पर्यटक ना केवल पक्षियों को देख सकते हैं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन और पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को भी समझ सकते हैं। अक्टूबर से फरवरी (सर्दियों का मौसम) यहां यात्रा के लिए परफेक्ट टाइम होता है।
