Floating National Park: भारत में वन्यजीवों के कुछ सबसे असाधारण अनुभव मिलते हैं, राजस्थान में बाघ सफारी से लेकर सुंदरबन के मैंग्रोव वन तक। लेकिन मणिपुर में एक ऐसी जगह है जो अवास्तविक सी लगती है। एक ऐसान नेशनल पार्क जहां जंगल सचमुच पानी पर तैरता है। हम बात कर रहे हैं Keibul Lamjao National Park की जो दुनिया का इकलौता तैरता हुआ नेशनल पार्क है। ये पूरा पार्क- फुमडी नाम के तैरते हुए प्राकृतिक द्वीपों पर बसा है, और सच कहें तो यहां का नजारा किसी सपनों की दुनिया से कम नहीं लगता।
मणिपुर की राजधानी इम्फाल से करीब 53 किलोमीटर दूर मौजूद ये अनोखी जगह लोकटक झील पर फैली हुई है। लगभग 40 वर्ग किलोमीटर में फैला ये पार्क ऐसी दुनिया जैसा लगता है, जहां पानी और जंगल एक-दूसरे में घुल गए हों।
लोकटक झील को सिर्फ झील कहना भी थोड़ा कम लगेगा। ये इतनी उथली है कि आम झील जैसी नहीं लगती और इतनी रहस्यमयी कि इसे सिर्फ जंगल भी नहीं कह सकते। यहां तैरते हुए घास के मैदान, पानी पर बहते जंगल और चारों तरफ फैली हरियाली मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर पहली बार में यकीन करना मुश्किल हो जाता है।
इस अनोखे नेशनल पार्क का सबसे बड़ा राज छिपा है फुमडी में। आसान भाषा में समझें तो फुमडी ऐसे तैरते हुए प्राकृतिक द्वीप होते हैं, जो घास, मिट्टी, पौधों और जैविक पदार्थों से मिलकर बनते हैं। लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि ये स्थिर नहीं रहते, बल्कि मौसम के साथ ऊपर-नीचे होते रहते हैं।
बारिश के मौसम में झील का पानी बढ़ता है तो ये फुमडी पानी की सतह पर तैरने लगते हैं। वहीं सर्दियों और सूखे के दिनों में ये नीचे झील की तलहटी को छूते हैं और वहां से पोषण लेते हैं। फिर जैसे ही बारिश लौटती है, ये दोबारा ऊपर उठ जाते हैं। शायद यही वजह है कि Keibul Lamjao National Park किसी सपनों की दुनिया जैसा महसूस होता है।
कुछ जगहों पर ये फुमडी इतने मजबूत होते हैं कि बड़े-बड़े जानवर भी आराम से चल सकते हैं, यहां तक कि दुर्लभ संगाई हिरण भी। वहीं कुछ हिस्सों में ये पतले होकर टूट जाते हैं और बीच में पानी के रास्ते बन जाते हैं। यहां चलते वक्त कई बार ऐसा लगता है कि आप जमीन पर नहीं, बल्कि पानी के ऊपर तैरती हुई धरती पर खड़े हैं।
आप तैरते हुए राष्ट्रीय उद्यान के जलक्षेत्र में डोंगी की सवारी कर सकते हैं। यह सबसे अनोखा और अद्भुत अनुभव है। तैरते हुए द्वीपों के बीच बने जलमार्गों से गुजरते हुए, ऊपर से सरकंडों की घनी झाड़ियां दिखाई देंगी और घास के बीच से हिरण भी नजर आ सकता है। पार्क के अंदर निगरानी मीनारें भी हैं, और संगाई जनजाति के लिए सुबह का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है।
