Benaras ghoomne ka sabse acha time: वाराणसी को काशी या बनारस के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर भारत की आध्यात्मिक राजधानी के तौर पर प्रसिद्ध है, लेकिन सच मानें कि यहां आकर जो भाव महसूस होता है, वह इस संज्ञा से कहीं अधिक है। बनारस के लिए माना जाता है कि यह दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे शहरों में से एक है। विद्वान इसकी उत्पत्ति 3,000 साल से भी पहले बताते हैं, जिसका उल्लेख ऋग्वेद जैसे पवित्र हिंदू ग्रंथों में मिलता है। मानयताओं के अनुसार, भगवान शिव ने स्वयं वाराणसी की स्थापना की थी, और वे यहां निवास करते हैं।
सदियों से, वाराणसी ने मौर्यों से लेकर मुगलों तक, साम्राज्यों के उत्थान और पतन को देखा है। इसकी भूलभुलैया जैसी गलियों, गंगा के किनारे 80 से अधिक घाटों और गंगा आरती जैसे कालातीत अनुष्ठानों ने इसे यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है। लेकिन वाराणसी के जादू का सबसे अच्छा अनुभव करने के लिए, जरूरी है कि आप यहां आने के लिए सही मौसम चुनें।

वाराणसी घूमने सर्दी में पहुंचें
नवंबर से फरवरी: सर्दी में वाराणसी घूमने का सबसे अच्छा समय
सर्दियां निश्चित रूप से वाराणसी घूमने का सबसे अच्छा समय है। इस दौरान यहां मौसम ठंडा रहता है, तापमान 5°C से 15°C तक रहता है, जो घाटों के किनारे लंबी पैदल यात्रा, संकरी गलियों में घूमने और प्रसिद्ध देव दीपावली उत्सव में भाग लेने के लिए एकदम सही टाइम है। सर्दियों में सुबहें धुंधली होती हैं और आप पसीना बहने की चिंता किए बिना गर्म कचौरी का स्वाद ले सकते हैं। फोटोग्राफी सेशन और कुल्हड़ चाय के लिए भी यह सीजन बढ़िया है। इसी मौसम में शहर महाशिवरात्रि को धूमधाम से मनाता है।
मार्च से जून : गर्मी में आना कैसा रहेगा
वाराणसी में गर्मी असहनीय हो सकती है, मई तक तापमान 45°C तक पहुंच जाता है। लेकिन अगर आप गर्मी का सामना कर सकते हैं, तो आपको भीड़ कम और रहने की अच्छी डील मिलेगी। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नाव की सवारी सही रहेगी और गर्मी बढ़ने से पहले सुबह-सुबह घाटों पर सैर की जा सकती है। भारत कला भवन जैसे वातानुकूलित संग्रहालयों में जाना या ठंडाई का मजा भी खूब लिया जा सकता है।

बनारस एक बार तो आना बनता है
जुलाई से सितंबर: मानसून का सीजन
मानसून के दौरान वाराणसी निश्चित रूप से घूमने लायक है। घाट गंगा के बारिश से भरे पानी से भर जाते हैं, और काले बादल नदी पर नाटकीय प्रतिबिंब डालते हैं। इस दौरान कम पर्यटकों का मतलब है कि आप निश्चित रूप से अधिक शांतिपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन भारी बारिश के दौरान नाव की सवारी से शायद आप वंचित रह सकते हैं। यदि आपको बारिश होने पर मंदिरों को देखना पसंद है और तो मानसून शहर का एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
अक्टूबर: शरद ऋतु की शुरुआत
अक्टूबर एक बेहतरीन समय है बनारस की गलियों में घूमने का। मानसून के हटने से आना जाना आसान होता है लेकिन हरियाली अभी भी रहती है। तापमान गिरना शुरू हो जाता है, औसतन लगभग 25°C। शहर दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के आने के साथ उत्साह से गुलजार हो जाता है। इस तरह वाराणसी की सांस्कृतिक और धार्मिक जीवंतता का अनुभव करने के लिए एक बहुत अच्छा टाइम रहेगा।
