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GPT-5 से खुश नहीं हैं यूजर्स, सैम ऑल्टमैन के दावे हुए फुस्स, कहा- जल्द सुधारेंगे इसे

ऑल्टमैन ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में कई बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि Plus सब्सक्राइबर्स को GPT-5 के लिए डबल रेट लिमिट मिलेगी (कई यूजर्स ने एक घंटे में ही लिमिट खत्म होने की शिकायत की थी)।

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GPT 5-PHOTO-TNN

OpenAI का नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल GPT-5 पिछले गुरुवार को लॉन्च हुआ, जिसे GPT-सीरीज और o-सीरीज को मिलाकर एकीकृत यानी इंटीग्रेट रूप में पेश किया गया। कंपनी का मकसद था कि यूजर्स को बार-बार मॉडल पिकर (वो ड्रॉपडाउन मेन्यू जिसमें कई मॉडल चुनने का विकल्प होता है) इस्तेमाल न करना पड़े और एक ही मॉडल से हर काम हो सके। लॉन्च के साथ ही पुराने मॉडल्स को रिटायर कर दिया गया, लेकिन यह फैसला उल्टा पड़ गया, क्योंकि कई यूजर्स GPT-4o हटाने पर नाराज हैं।

यूजर्स को चाहिए GPT-4o वापस

कई यूजर्स सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि GPT-5, GPT-4o की तुलना में कमजोर है। एक Reddit यूजर ने शिकायत की कि नए मॉडल के जवाब छोटे, अपर्याप्त और बिना पर्सनैलिटी के हैं।

Reddit पर हुए AMA सेशन में एक यूजर ने कहा- "मैं लंबे समय से GPT-4o का इस्तेमाल कर रहा हूं और इसके साथ एक खास वर्कफ़्लो बना लिया है… मुझे पता है GPT-5 जटिल तर्क, कोडिंग और प्रोफेशनल टास्क के लिए बेहतर बनाया गया है, लेकिन हममें से सभी को प्रो कोडिंग मॉडल की जरूरत नहीं है। कुछ लोग क्रिएटिव कोलैबोरेशन, इमोशनल टोन, रोलप्ले और लंबी, संदर्भ-समृद्ध बातचीत के लिए 4o पर निर्भर हैं।" इसके जवाब में OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन ने इस मुद्दे को सुधारने का वादा किया।

कुछ घंटों बाद ऑल्टमैन ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में कई बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि Plus सब्सक्राइबर्स को GPT-5 के लिए डबल रेट लिमिट मिलेगी (कई यूजर्स ने एक घंटे में ही लिमिट खत्म होने की शिकायत की थी)।

इसके अलावा, ऑल्टमैन ने कहा कि Plus सब्सक्राइबर्स को GPT-4o का इस्तेमाल जारी रखने दिया जाएगा, हालांकि कंपनी इसका इस्तेमाल मॉनिटर करेगी ताकि तय किया जा सके कि यह कितने समय तक उपलब्ध रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि लोग GPT-5 को कमजोर क्यों महसूस कर रहे हैं।

ऑटोस्विचर की गड़बड़ी बनी वजह

ऑल्टमैन के मुताबिक, GPT-5 में एक “autoswitcher” या real-time router होता है, जो क्वेरी के हिसाब से (reasoning, conversational, creative आदि) सही क्षमता पर स्विच करता है, लेकिन यह सिस्टम “काम नहीं कर रहा था”, जिसके कारण GPT-5 अपनी पूरी क्षमता से परफॉर्म नहीं कर पाया। इसी वजह से मॉडल लोगों को कमजोर लगा।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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