उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 12, 14 और 16 साल की तीन नाबालिग बहनों ने एक इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। बताया जा रहा है कि माता-पिता द्वारा ऑनलाइन गेम खेलने पर रोक लगाने से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान थीं। इस घटना ने बच्चों में बढ़ती गेमिंग लत और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
कैसे बढ़ी गेमिंग की लत
पुलिस के मुताबिक, तीनों बहनें ऑनलाइन गेमिंग की आदी हो चुकी थीं। कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद थे, बच्चे लंबे समय तक घरों में रहे और मोबाइल-इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। इसी दौरान उन्हें ऑनलाइन गेम्स की आदत लग गई। बताया जा रहा है कि वे एक ऑनलाइन गेम खेलती थीं, जिसे ‘कोरियन लवर गेम’ कहा जा रहा है। परिवार को यह आदत पसंद नहीं थी और वे चाहते थे कि बेटियां गेम कम खेलें।
क्यों खतरनाक बनती जा रही है बच्चों में गेमिंग लत
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा गेमिंग बच्चों के व्यवहार, पढ़ाई और मानसिक संतुलन पर असर डालती है। जब गेम ही बच्चों की दुनिया बन जाता है, तो रोक-टोक उन्हें गुस्से, तनाव और अकेलेपन की ओर धकेल सकती है। कई बार बच्चे अपनी भावनाएं खुलकर कह नहीं पाते और अंदर ही अंदर टूटने लगते हैं।
बच्चों की गेमिंग लत छुड़ाने के लिए क्या करें माता-पिता
1. सख्ती नहीं, संवाद अपनाएं
सीधे मोबाइल छीनने या डांटने के बजाय बच्चों से शांति से बात करें। समझें कि वे गेम क्यों खेलते हैं और उन्हें उसमें क्या आकर्षित करता है।
2. अचानक रोक लगाने से बचें
एकदम से गेम बंद कर देना बच्चों के लिए मानसिक झटका हो सकता है। धीरे-धीरे गेमिंग का समय कम करें और उन्हें पहले से इसकी जानकारी दें।
3. समय सीमा तय करें
दिन में सीमित समय के लिए ही गेम खेलने की अनुमति दें। इसके लिए स्क्रीन टाइम फीचर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
4. विकल्प दें, खालीपन न छोड़ें
गेम की जगह बच्चों को खेल-कूद, म्यूजिक, ड्रॉइंग, किताबें या किसी हॉबी से जोड़ें, ताकि उनका ध्यान बंट सके।
5. भावनात्मक बदलावों पर नजर रखें
अगर बच्चा चिड़चिड़ा, उदास या बहुत ज्यादा अकेला रहने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह संकेत हो सकता है कि वह मानसिक दबाव में है।
6. साथ समय बिताएं
परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा देता है। रोज कुछ समय बच्चों के साथ जरूर बिताएं।
7. जरूरत पड़े तो एक्सपर्ट की मदद लें
अगर लत ज्यादा बढ़ चुकी है, तो काउंसलर या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेने में झिझक न करें।
समाज के लिए एक चेतावनी
गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। बच्चों की डिजिटल दुनिया को समझना, उनकी भावनाओं को गंभीरता से लेना और समय रहते सही मार्गदर्शन देना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
अगर कोई बच्चा या किशोर अत्यधिक तनाव, उदासी या आत्मघाती विचारों के संकेत दे रहा हो, तो तुरंत परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर की गई बातचीत और मदद जान बचा सकती है
