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लो-वॉट के स्मार्टफोन में हाई-वॉट का चार्जर इस्तेमाल करना क्या सही है? एक गलती पड़ सकती है भारी

अगर आप भी अपने फोन में उसकी क्षमता से अधिक वॉट का चार्जर इस्तेमाल करते हैं तो आपको इससे होने वाले नुकसान और फायदों के बारे में जान लेना चाहिए। आपकी इस गलती से फोन की बैटरी डैमेज हो सकती है और साथ ही आपका बड़ा नुकसान भी हो सकता है।

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आज के समय में स्मार्टफोन में कई तरह की चार्जिंग टेक्नोलॉजी काम करती है।(फोटो क्रेडिट-iStock)

Smartphone Tips and Tricks: स्मार्टफोन्स अब हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। डेली रूटीन के कई सारे काम अब स्मार्टफोन्स पर ही निर्भर हो चुके हैं। स्मार्टफोन का अधिक इस्तेमाल होने की वजह से बैटरी के जल्दी खत्म होने की भी समस्या होती है। स्मार्टफोन को जल्दी चार्ज किया जा सके इसके लिए कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स में फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी दे रही हैं। फास्ट चार्जर का एक बड़ा फायदा यह है इससे कुछ ही मिनट में फोन फुल चार्ज हो जाता है। हालांकि कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि जिनके फोन में फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट नहीं है वह भी हाई वॉट के चार्जर से फोन को चार्ज करने लगते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आपके लिए काम की खबर है।

लोगों को लगता है कि अगर वे अपने लो वॉट के फोन को हाई वॉट के चार्जर से चार्ज करते हैं तो इससे उनका फोन जल्दी चार्ज हो जाएगा। अगर आप भी अपने फोन में उसकी क्षमता से अधिक वॉट का चार्जर इस्तेमाल करते हैं तो आपको इससे होने वाले नुकसान और फायदों के बारे में जान लेना चाहिए। आपकी इस गलती से फोन की बैटरी डैमेज हो सकती है और साथ ही आपका बड़ा नुकसान भी हो सकता है।

18W के फोन में 120W वाला चार्जर

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर उनके फोन में 18W की फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट है और वे 80W का चार्जर इस्तेमाल करेंगे तो कहीं फोन खराब न हो जाए। इससे कहीं फोन की बैटरी ब्लास्ट न हो जाए तो आइए आपको बताते हैं कि ऐसा स्मार्टफोन की हेल्थ के लिए सही है या नहीं।

आजकल के स्मार्टफोन्स की टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो चुकी है। अगर आपका फोन पुराना है और उसमें बहुत अधिक फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट नहीं तो बता दें कि हाई वॉट चार्जर इस्तेमाल करना आपके फोन के लिए पूरी तरह से सेफ है। मतलब अगर आपके फोन में सिर्फ 18W की फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट है तो आप उसमें बड़ी ही आसानी से 45W, 80W, 100W या फिर 120W का चार्जर इस्तेमाल कर सकते हैं।

कमाल की है ये टेक्नोलॉजी

लो-वॉट फास्ट चार्जिंग वाले फोन में हाई-वॉट चार्जर का सपोर्ट होना एक खास तरह की टेक्नोलॉजी की वजह से पॉसिबल होता है। आपको बता दें कि मौजूदा समय के स्मार्टफोन्स एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस होते हैं। आजकल के स्मार्टफोन्स में Power Negotiation Protocol का एक शानदार फीचर मिलता है। यह टेक्नोलॉजी चार्जर और स्मार्टफोन के बीच कम्यूनिकेट करती है। यह टेक्नोलॉजी बताती है कि फोन के लिए कितनी बिजली की जरूरत है और फिर चार्जर सिर्फ उतनी ही पॉवर को ट्रांसफर करता है। ऐसे में चार्जर स्मार्टफोन में अधिक बिजली ट्रांसफर नहीं कर पाता और फोन की बैटरी सेफ रहती है।

BMS रोक देता है चार्जिंग

Power Negotiation Protocol टेक्नोलॉजी के अलावा स्मार्टफोन्स में Battery Management System का फीचर भी मिलता है। किसी भी स्मार्टफोन को चार्जिंग के दौरान कितनी पॉवर कैपेसिटी चाहिए उस कंडीशन में यह दोनों ही काम करते हैं। ये दोनों टेक्नलॉजी डिसाइड करते हैं कि फोन को कितने वोल्टेज की जरूरत है, कितना करंट ट्रांसफर करना है और तापमान क्या होना चाहिए। अगर फोन की बैटरी अधिक गर्म होती है तो BMS ऐसी स्थिति में चार्जिंग को रोक देता है और बैटरी सेफ रहती है।

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गौरव तिवारी
गौरव तिवारी Author

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से ... और देखें

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