टेक एंड गैजेट्स

भारत को लगेगा AI का 'बूस्टर डोज', 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में जुड़ेगा 1.7 खरब डॉलर, स्वदेशी टेक कंपनियां करेंगी कमाल

शिक्षा, स्वास्थ्य, मेडिकल, मनोरंजन, प्रशासन, सेवा, उद्योग से लेकर अर्थव्यवस्था में इसकी धमक सुनाई और दिखाई पड़ रही है। AI के क्षेत्र में 'इंडिया एआई मिशन' और 'सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर एआई' भारत सरकार के प्रयासों को तेजी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। समझा जा रहा है कि AI की वजह से 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.7 खरब डॉलर की वृद्धि होगी।

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अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाएगा AI सेक्टर।

Photo : PTI

uwIndia Artificial Intelligence: जीवन का कोई भी क्षेत्र तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमता से अछूता नहीं है। इन दोनों ने बदलाव की गति और तीव्र किया है। लोगों के जीवन में बदलाव लाने के साथ-साथ AI देशों की विकास एवं उन्नति को आकार दे रहा है। तकनीक के दबदबे वाले इस नए युग के दरवाजे पर भारत भी अपनी तकनीक, नई सोच एवं असीम संभावनाओं के साथ खड़ा है। AI के इस्तेमाल से लोगों का जीवन ज्यादा आसान, स्मार्ट और वे दुनिया से ज्यादा जुड़े हुए महसूस कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, मेडिकल, मनोरंजन, प्रशासन, सेवा, उद्योग से लेकर अर्थव्यवस्था में इसकी धमक सुनाई और दिखाई पड़ रही है। AI के क्षेत्र में 'इंडिया एआई मिशन' और 'सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर एआई' भारत सरकार के प्रयासों को तेजी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। समझा जा रहा है कि AI की वजह से 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.7 खरब डॉलर की वृद्धि होगी। टेक सेक्टर भी कमाल करेगा। अनुमान है कि स्वदेशी टेक कंपनियां इस साल अनुमानित 280 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार कर जाएंगी।

भारत में कैसी है AI की उपस्थिति

भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। इस वर्ष वार्षिक राजस्व के 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है। प्रौद्योगिकी और एआई पारिस्थितिकी तंत्र में 6 मिलियन से अधिक लोग कार्यरत हैं। देश में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं। भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं, और पिछले वर्ष शुरू किए गए नए स्टार्टअप में से लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में एआई का उपयोग किया। नैसकॉम (NASSCOM) एआई एडॉप्शन इंडेक्स पर भारत को 4 में से 2.45 अंक मिले हैं, जो दर्शाता है कि 87% उद्यम सक्रिय रूप से एआई समाधानों का उपयोग कर रहे हैं।

शीर्ष चार देशों में भारत का स्थान

एआई अपनाने वाले अग्रणी क्षेत्रों में औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएं और खुदरा क्षेत्र, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं तथा बीमा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र शामिल हैं। ये सभी मिलकर एआई के कुल मूल्य में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान करते हैं। हाल ही में हुए बीसीजी सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 26% भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर एआई परिपक्वता हासिल कर ली है। जैसे-जैसे भारत एक समावेशी एआई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है, इसकी बढ़ती वैश्विक मान्यता इस प्रगति को दर्शाती है। स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स जैसी रैंकिंग भारत को एआई कौशल, क्षमताओं और नीतियों के मामले में शीर्ष चार देशों में स्थान देती है। देश GitHub पर एआई परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता भी है, जो इसके डेवलपर समुदाय की मज़बूती को दर्शाता है। एक मजबूत STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, गणित) कार्यबल, विस्‍तृत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के साथ, भारत आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और 2047 तक विकसित भारत के दीर्घकालिक विज़न को साकार करने हेतु एआई का उपयोग करने के लिए स्‍वयं को तैयार कर रहा है।

इंडिया एआई मिशन

'भारत में एआई का निर्माण और भारत के लिए एआई को कारगर बनाना' के विजन से प्रेरित होकर, कैबिनेट ने मार्च 2024 में इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी, जिसका बजट पांच वर्षों में ₹10,371.92 करोड़ होगा। यह मिशन भारत को कृत्रिम द्धिमत्‍ता के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। अपनी शुरुआत के बाद से ही इस मिशन ने देश के कंप्यूटिंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति की है। 10,000 GPU के शुरुआती लक्ष्य से, अब भारत ने 38,000 GPU हासिल कर लिए हैं, जिससे विश्वस्तरीय AI संसाधनों तक किफ़ायती पहुंच उपलब्ध हो रही है।

india ai mission

भारत सरकार इंडिया एआई मिशन।

क्या है जीपीयू?

जीपीयू या ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट एक शक्तिशाली कंप्यूटर चिप है जो मशीनों को तेजी से सोचने, इमेजिज को प्रोसेस करने, AI प्रोग्राम चलाने और जटिल कार्यों को एक नियमित प्रोसेसर की तुलना में अधिक कुशलता से संभालने में मदद करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक स्वतंत्र व्यापार प्रभाग, IndiaAI द्वारा कार्यान्वित यह मिशन एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है जो नवाचार को बढ़ावा देता है, स्टार्टअप का समर्थन करता है, डेटा पहुंच को मजबूत करता है, और जनता की भलाई के लिए AI के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करता है।

रोजमर्रा के जीवन और कार्य में एआई

कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार की एक नई लहर चला रही है जो स्वास्थ्य सेवा और खेती से लेकर शिक्षा, शासन और जलवायु पूर्वानुमान तक, दैनिक जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है। यह डॉक्टरों को बीमारियों का तेज़ी से निदान करने, किसानों को डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करने, छात्रों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने और शासन को अधिक कुशल तथा पारदर्शी बनाने में मदद करती है।

स्वास्थ्य-रक्षा

एआई स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी में बदलाव ला रहा है। यह डॉक्टरों को बीमारियों का जल्द पता लगाने, मेडिकल स्कैन का विश्लेषण करने और व्यक्तिगत उपचार सुझाने में मदद करता है। एआई द्वारा संचालित टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को शीर्ष अस्पतालों के विशेषज्ञों से जोड़ते हैं, जिससे समय और लागत की बचत होती है और साथ ही देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होता है। स्वास्थ्य सेवा में सुरक्षित और नैतिक एआई को बढ़ावा देने वाली वैश्विक संस्था, हेल्थएआई में भारत की भागीदारी, और आईसीएमआर तथा इंडियाएआई के यूनाइटेड किंगडम तथा सिंगापुर जैसे देशों के साथ सहयोग से ज़िम्मेदार नवाचार और वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों को सुनिश्चित किया जा रहा है।

कृषि

किसानों के लिए, एआई एक विश्वसनीय डिजिटल साथी है। यह मौसम की भविष्यवाणी करता है, कीटों के हमलों का पता लगाता है और सिंचाई व बुवाई के लिए सर्वोत्तम समय सुझाता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, किसान ई-मित्र जैसी पहलों के माध्यम से एआई का उपयोग कर रहा है, जो एक आभासी सहायक है और किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजनाओं तक पहुंचने में मदद करता है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य निगरानी उपग्रह डेटा, मौसम इनपुट और मृदा विश्लेषण को संयोजित करके तुरंत ही सलाह प्रदान करती हैं, जिससे पैदावार और आय सुरक्षा में सुधार होता है।
ai in agriculture

कृषि क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रहा AI

शिक्षा और कौशल विकास

शिक्षा को अधिक समावेशी, आकर्षक और भविष्य के अनुरूप तैयार करने के लिए, भारतीय शिक्षा प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को एकीकृत किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) कक्षा 6 से 15 घंटे का कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल मॉड्यूल और कक्षा 9 से 12 तक एक वैकल्पिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय प्रदान करता है। एनसीईआरटी का डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म दीक्षा, विशेष रूप से दृष्टिबाधित शिक्षार्थियों के लिए सुगमता बढ़ाने हेतु, वीडियो में कीवर्ड खोज और ज़ोर से पढ़ने की सुविधा जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों का उपयोग करता है।

प्रशासन में AI की भूमिका

एआई शासन और लोक सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया को नया रूप दे रहा है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के तहत, न्याय प्रणाली को और अधिक कुशल और सुलभ बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को एकीकृत किया जा रहा है। अनुवाद, पूर्वानुमान, प्रशासनिक दक्षता, स्वचालित फाइलिंग, इंटेलिजेंट शेड्यूलिंग और चैटबॉट के माध्यम से संचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इसके उपसमूहों जैसे मशीन लर्निंग, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्‍नीशन और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग का उपयोग किया जा रहा है। उच्च न्यायालयों में एआई अनुवाद समितियाँ सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के निर्णयों का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करने की निगरानी कर रही हैं। ई-एचसीआर और ई-आईएलआर जैसे डिजिटल कानूनी प्लेटफ़ॉर्म अब नागरिकों को कई क्षेत्रीय भाषाओं में निर्णयों तक ऑनलाइन पहुँच प्रदान करते हैं, जिससे न्याय प्रदान करना अधिक पारदर्शी और समावेशी हो गया है।

क्या AI से बेरोजगारी बढ़ेगी?

कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता को अक्सर नौकरियों के लिए एक खतरे के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में यह नए प्रकार के अवसर पैदा कर रही है। नैसकॉम की रिपोर्ट 'एडवांसिंग इंडियाज एआई स्किल्स' (अगस्त 2024) के अनुसार, भारत का एआई प्रतिभा आधार 2027 तक लगभग 6 से 6.5 लाख पेशेवरों से बढ़कर 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर, 12.5 लाख से अधिक हो जाने की उम्मीद है। डेटा साइंस, डेटा क्यूरेशन, एआई इंजीनियरिंग और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में एआई की मांग बढ़ रही है। अगस्त 2025 तक, लगभग 8.65 लाख उम्मीदवारों ने विभिन्न उभरते प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है या प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिनमें एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स में 3.20 लाख शामिल हैं।

समावेशी सामाजिक विकास के लिए एआई

नीति आयोग की रिपोर्ट, 'समावेशी सामाजिक विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता' (अक्टूबर 2025), भारत के अनौपचारिक कार्यबल को सशक्त बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का एक रोडमैप प्रस्तुत करती है। यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछती है: दुनिया की सबसे उन्नत प्रौद्योगिकियां सबसे अधिक उपेक्षित श्रमिकों तक कैसे पहुंच सकती हैं, जिससे वे अपनी बाधाओं को पार कर सकें और भारत की विकास गाथा में अपना स्थान बना सकें? यह रिपोर्ट अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के वास्तविक जीवन के अनुभवों पर आधारित है। यह राजकोट के एक घरेलू स्वास्थ्य सेवा सहायक, दिल्ली के एक बढ़ई, एक किसान और कई अन्य लोगों की चुनौतियों और आकांक्षाओं को दर्शाती है। ये कहानियाँ लगातार आने वाली बाधाओं को दर्शाती हैं, लेकिन साथ ही उन अपार संभावनाओं को भी दर्शाती हैं जिन्हें सोच-समझकर इस्तेमाल की गई प्रौद्योगिकी उजागर कर सकती है। इन लाखों लोगों के लिए, प्रौद्योगिकी को उनके कौशल का स्थान लेने के बजाय, उसे और बढ़ाना चाहिए।

भाषा-साक्षरता की बाधाओं को दूर करेगा AI

रोडमैप में चर्चा की गई है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स और इमर्सिव लर्निंग भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक कामगारों के सामने आने वाली व्यवस्थागत बाधाओं को दूर कर सकते हैं। यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां साल 2035 तक, वॉयस-फर्स्ट एआई इंटरफेस भाषा और साक्षरता की बाधाओं को दूर कर देंगे। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट समय पर और पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित करेंगे। माइक्रो-क्रेडेंशियल और ऑन-डिमांड लर्निंग, कामगारों को उनकी महत्वाकांक्षा के अनुसार कौशल बढ़ाने में मदद करेंगे।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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