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भारत ने Starlink की मंजूरी रोकी है या नहीं? कंपनी ने सफाई में क्या कहा, जानिए पूरी कहानी 5 पॉइंट में

Starlink India Luanch: भारत में स्टारलिंक के आने की चर्चा पिछले साल से ही जोरों पर थी लेकिन अब यह ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। खबर है कि सिक्योरिटी के कारण सरकार ने स्टारलिंक की मंजूरी रोक दी है।

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क्या अब भारत में लॉन्च नहीं होगा Starlink? जानिए पूरी कहानी 5 पॉइंट में

टेक अरबपति एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink की भारत में लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगती दिख रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत सरकार ने सुरक्षा चिंताओं के चलते Starlink को भारत में ऑपरेशन शुरू करने के लिए जरूरी अंतिम मंजूरी रोक दी है।

Starlink, एलन मस्क की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस है, जो लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद हजारों सैटेलाइट के नेटवर्क के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने का दावा करती है। भारत में इसकी शुरुआत को लेकर लंबे समय से तैयारी चल रही थी, लेकिन अब सुरक्षा से जुड़े सवालों के कारण प्रक्रिया अटक गई है।

स्टारलिंक ने कहा-बातचीत जारी

अब Starlink ने भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने को लेकर चल रही अटकलों पर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि वह भारत सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है और उसे देश में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की क्षमता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। Starlink बिजनेस ऑपरेशन की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि कंपनी भारत सरकार के साथ सभी जरूरी नियमों और अनुपालन प्रक्रियाओं पर पारदर्शी तरीके से काम कर रही है।

1. ईरान युद्ध में Starlink के इस्तेमाल को लेकर चिंता

रिपोर्ट्स के अनुसार, गृह मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से Starlink को अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया रोक दी है। इसकी बड़ी वजह ईरान युद्ध के दौरान Starlink टर्मिनल के इस्तेमाल की खबरें बताई जा रही हैं। भारत सरकार को चिंता है कि किसी अंतरराष्ट्रीय तनाव या भू-राजनीतिक स्थिति में विदेशी कंपनी के नेटवर्क पर कितना नियंत्रण रखा जा सकता है। चूंकि Starlink का नेटवर्क जमीन पर टावरों की जगह अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से चलता है, इसलिए सुरक्षा और निगरानी को लेकर अतिरिक्त सवाल उठ रहे हैं।

2. Starlink से मांगा गया सुरक्षा नियमों पर जवाब

Starlink को भारत में पिछले साल ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस मिल चुका है। इससे कंपनी को भारत में सेवाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति मिली थी, हालांकि ऑपरेशन शुरू करने से पहले सुरक्षा मंजूरी जरूरी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारी Starlink से यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि अमेरिका आधारित कंपनी होने के बावजूद वह भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं और नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित करेगी। सैटेलाइट इंटरनेट और सामान्य टेलीकॉम नेटवर्क में बड़ा अंतर है। मोबाइल कंपनियां जहां जमीन पर टावर लगाती हैं, वहीं Starlink का मुख्य नेटवर्क अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से संचालित होता है।

3. भारत सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर की नीति पर भी कर रहा पुनर्विचार

Starlink की मंजूरी रुकने के साथ-साथ भारत सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर के नियमों पर भी अधिक सावधानी बरत रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने से जुड़ा प्रस्ताव भी अभी आगे नहीं बढ़ा है। टेलीकॉम विभाग ने ढांचा तैयार कर लिया है, लेकिन इसे अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए नहीं भेजा गया है। भारत में Jio और Airtel जैसी कंपनियां भी सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में विदेशी साझेदारों के साथ काम कर रही हैं, हालांकि उनकी योजनाओं को Starlink की तुलना में कम जोखिम वाला माना जा रहा है।

4. भारत में Starlink लॉन्च के लिए चल रही थी तेजी से तैयारी

यह फैसला ऐसे समय आया है जब Starlink की भारत में एंट्री लगभग तय मानी जा रही थी। एलन मस्क ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत में Starlink सेवा शुरू करने को लेकर उत्साह जताया था। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और Starlink की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर के बीच भी ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाने को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, Starlink ने भारत में स्थानीय डेटा स्टोरेज नियमों को पूरा करने का दावा किया है और देश में करीब 10 गेटवे स्थापित करने की योजना भी बनाई है, जिसमें मुंबई में एक हब शामिल है।

5. एलन मस्क और SpaceX के लिए झटका?

Starlink की भारत में देरी एलन मस्क और SpaceX के लिए एक झटका मानी जा रही है। SpaceX के संभावित IPO को लेकर भी चर्चा चल रही है और Starlink कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू मॉडल का एक अहम हिस्सा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में से एक है, जहां ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में ब्रॉडबैंड की बड़ी जरूरत है। ऐसे में भारत में देरी Starlink के वैश्विक विस्तार की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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