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Google पर 463 मिलियन डॉलर का जुर्माना, यूजर्स की लोकेशन डेटा को लेकर EU ने की बड़ी कार्रवाई

इस मामले की जांच आयरलैंड के Data Protection Commission (DPC) ने की। EU में Google का यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड के डबलिन में है, इसलिए Google से जुड़े डेटा प्राइवेसी मामलों में आयरलैंड का रेगुलेटर अहम भूमिका निभाता है।

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इस डेटा की मदद से किसी भी व्यक्ति की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है।

Google को यूजर्स की लोकेशन डेटा को सही तरीके से हैंडल नहीं करना भारी पड़ गया है। यूरोपियन यूनियन (EU) के प्राइवेसी रेगुलेटर ने Google पर 403 मिलियन यूरो यानी करीब 463 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है। रेगुलेटर का कहना है कि Google ने यूजर्स के लोकेशन डेटा को प्रोसेस करते समय EU के प्राइवेसी नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया।

Google के खिलाफ यह जांच करीब छह साल पहले शुरू हुई थी। इसमें देखा गया कि 2018 में EU का General Data Protection Regulation (GDPR) लागू होने के बाद से फरवरी 2020 तक Google ने यूजर्स के लोकेशन डेटा को किस तरह इस्तेमाल और प्रोसेस किया।

इस मामले की जांच आयरलैंड के Data Protection Commission (DPC) ने की। EU में Google का यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड के डबलिन में है, इसलिए Google से जुड़े डेटा प्राइवेसी मामलों में आयरलैंड का रेगुलेटर अहम भूमिका निभाता है।

लोकेशन डेटा को लेकर क्या मिला?

रेगुलेटर के मुताबिक, Google ने यूजर्स के Web & App Activity और Location History से जुड़े लोकेशन डेटा को सही और पारदर्शी तरीके से प्रोसेस नहीं किया। Web & App Activity Google की एक सेटिंग है, जिसमें यूजर्स की सर्च और ब्राउजिंग एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी सेव हो सकती है। वहीं Location History यूजर्स की उन जगहों से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड करती है, जहां वे अपने मोबाइल फोन के साथ गए हैं।

जांच में Google के Android ऑपरेटिंग सिस्टम के Location Accuracy फीचर को भी देखा गया। रेगुलेटर ने कहा कि इस फीचर में भी पर्सनल डेटा को प्रोसेस करने के दौरान जरूरी कानूनी, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

Google ने क्या कहा?

Google ने अपने बयान में कहा कि यह मामला उसकी पुरानी नीतियों और तरीकों से जुड़ा है, जिन्हें बाद में अपडेट किया जा चुका है। कंपनी के मुताबिक, 2019 के बाद उसने अपनी प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए हैं और ऐसे नए टूल पेश किए हैं, जिनकी मदद से यूजर्स के लिए अपनी लोकेशन डेटा को मैनेज करना आसान हो गया है।

लोकेशन डेटा क्यों है संवेदनशील?

रेगुलेटर के मुताबिक, लोकेशन डेटा भी पर्सनल डेटा की बहुत जरूरी कैटेगरी है। इससे किसी व्यक्ति की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है और कई मामलों में उसकी निजी जिंदगी से जुड़ी काफी जानकारी का अंदाजा भी लगाया जा सकता है।

आयरलैंड के डिप्टी कमिश्नर ग्राहम डॉयल ने कहा कि लोकेशन डेटा से लोगों को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल होने पर नुकसान भी हो सकता है। किसी व्यक्ति की लोकेशन से उसकी निजी जिंदगी के बारे में काफी जानकारी सामने आ सकती है।

Google पर EU में पहले भी हुई है बड़ी कार्रवाई

यह आयरलैंड के डेटा प्राइवेसी रेगुलेटर की ओर से लगाया गया चौथा सबसे बड़ा EU प्राइवेसी जुर्माना है। इससे पहले रेगुलेटर सोशल मीडिया कंपनियों TikTok और Meta पर भी बड़े जुर्माने लगा चुका है। Meta पर लगाया गया जुर्माना 1.2 बिलियन यूरो का था।

Google से जुड़े तीन और मामलों की जांच जारी

आयरलैंड के डेटा Protection Commission ने बताया कि Google से जुड़े तीन अन्य प्राइवेसी मामलों की जांच अभी जारी है। इस पूरे मामले से एक बार फिर यह बात सामने आई है कि यूरोप में यूजर्स के पर्सनल और लोकेशन डेटा को लेकर नियम काफी सख्त हैं। कंपनियों को यह बताना और सुनिश्चित करना होता है कि वे यूजर्स के डेटा को किस तरह और किस उद्देश्य से इस्तेमाल कर रही हैं।
Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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