टेक एंड गैजेट्स

GenAI सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को बनाएगा आसान, हो सकती है 20-40% की बचत

GenAI in Software Development: ‘जेनएआई: मिलेनियल शेपशिफ्टर टू ट्रांसफॉर्म सर्विसेज’ नामक रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ जेन एआई सॉफ्टवेयर विकास में 20-40 प्रतिशत की बचत कर सकता है। रिसर्च के अनुसार, पाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने सॉफ्टवेयर डेवलपर की उत्पादकता में 26 प्रतिशत की वृद्धि की है।

Image

GenAI

Photo : Times Now Digital

GenAI in Software Development: जनरेटिव एआई (जेनएआई) से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट साइकल में 20-40 प्रतिशत की बचत हो सकती है और दक्षता लाभ से होने वाली बचत को फिर से अधिक टेक्नोलॉजी इनोवेशन के कारोबार में लगाया जा सकता है। एक्सिस कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर व्यवसाय के लिए बचत को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी में वापस लगाए जाने की उम्मीद है, जेन एआई द्वारा टेक्नोलॉजी खर्च को कम करने की संभावना नहीं है।

‘जेनएआई: मिलेनियल शेपशिफ्टर टू ट्रांसफॉर्म सर्विसेज’ नामक रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ जेन एआई सॉफ्टवेयर विकास में 20-40 प्रतिशत की बचत कर सकता है। एक्सिस कैपिटल के संस्थागत शोध में टेक्नोलॉजी व्यय में कोई जोखिम नहीं दिखता है, क्योंकि इन बचत को बेहतर कारोबार के लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी में वापस लगाया जा सकता है।’’

अग्रणी संस्थानों के शोधकर्ताओं ने तीन संगठनों के करीब 5,000 डेवलपर की उत्पादकता वृद्धि पर गौर किया और पाया कि कृत्रिम मेधा (एआई) ने सॉफ्टवेयर डेवलपर की उत्पादकता में 26 प्रतिशत की वृद्धि की है।

रिपोर्ट कहती है, ‘‘ एआई में रुचि तथा उपयोग तेजी से बढ़ रहा है...माइक्रोसॉफ्ट गिटहब एंटरप्राइज ने पाया कि 18 महीने की अवधि में एआई परियोजनाओं में ग्राहकों की रुचि 100 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि वास्तविक उपयोग में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

और पढ़ें
End of Article