Alibaba AI Qwen 2.5 Max: चीन की टेक दिग्गज अलीबाबा ने अपना नया AI मॉडल Qwen 2.5-Max लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि इसका नया वर्जन DeepSeek के बहुचर्चित V3 मॉडल से बेहतर परफॉर्म करता है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, अलीबाबा ने इस मॉडल को चीनी नववर्ष के पहले दिन लॉन्च किया, जो आमतौर पर छुट्टी का दिन होता है। यह भी दावा किया गया है कि DeepSeek की बढ़ती लोकप्रियता का जवाब देने के लिए अलीबाबा ने अपने एआई मॉडल को जल्दबाजी में पेश किया है।
DeepSeek क्या है और यह क्या कर सकता है?
DeepSeek एक AI चैटबॉट है जिसे एक चीनी स्टार्टअप ने विकसित किया है। इस एआई टूल ने आते ही दुनियाभर में धमाल मचाना शुरू कर दिया है। इसे ChatGPT से भी ज्यादा कारगर बताया जा रहा है। DeepSeek का नया AI असिस्टेंट, DeepSeek-V3, ऐप्पल ऐप स्टोर पर ChatGPT को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका में सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाले फ्री ऐप बन गया है।
क्यों हो रही DeepSeek की चर्चा
DeepSeek तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्लेयर बन गया है। अन्य AI सिस्टम की तुलना में, जो महंगे और एडवांस हार्डवेयर पर निर्भर करते हैं, DeepSeek अपेक्षाकृत सस्ते चिप्स का उपयोग करता है। इस वजह से यह एक कम लागत वाला लेकिन अत्यधिक प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है। यह जटिल प्रश्नों को समझने और उनके उत्तर देने में सक्षम है, ठीक वैसे ही जैसे अन्य एडवांस चैटबॉट, लेकिन यह सब कम खर्च में करता है। यही कारण है कि डीपसीक की दुनियाभर में चर्चा हो रही है।
AI इंडस्ट्री पर DeepSeek का प्रभाव
चीनी AI स्टार्टअप DeepSeek ने अपने DeepSeek-V3 और R1 मॉडल्स के साथ टेक जगत में हलचल मचा दी है। इसके लॉन्च ने OpenAI और Meta जैसी बड़ी कंपनियों को चौंका दिया है, खासकर इसकी कम लागत में हाई-परफॉर्मेंस देने की क्षमता के कारण। DeepSeek के सस्ती AI तकनीक देने के मॉडल ने अमेरिकी AI कंपनियों के भारी निवेश और खर्च वाली योजनाओं को लेकर निवेशकों में चिंता बढ़ा दी है।
एआई को लेकर चीन घरेलू मार्केट में भी जंग तेज
डीपसीक की पॉपुलेरिटी और अलीबाबा की प्रतिक्रिया के साथ, चीनी एआई मार्केट में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। जैसे-जैसे कंपनियां बेहतर, सस्ते और अधिक पावरफुल एआई मॉडल विकसित करने की होड़ में लगी हैं, मार्केट में तेजी से विकास जारी रहने की संभावना है। डीपसीक का एजीआई पर ध्यान एआई की सीमाओं को और भी आगे बढ़ा सकता है, जिससे न केवल चीनी फर्म बल्कि ग्लोबल टेक कंपनियां भी चुनौती का सामना कर सकती हैं।
