दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी एडोबे के सीईओ शांतनु नायारण ने अपने पद से इंस्तीफा देने का ऐलान करके सबको हैरान कर दिया। शांतनु एडोबे सीईओ के तौर पर पिछले 18 सालों से काम कर रहे हैं। हालांकि अभी कंपनी की तरफ से यह कहा गया है कि शांतनु तब तक सीईओ के पद पर बने रहेंगे जब तक उनका उतराधिकारी नहीं नियुक्त हो जाता। आपको बता दें कि शांतनु ने 1998 में एडोबे ज्वॉइन किया था।
शांतनु नारायण के इस्तीफे के खबर आते ही फोटोशॉप जैसे सॉफ्टवेयर देने वाली एडोबे इंक के शेयरों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी ने बताया कि शांतनु नारायण के उत्तराधिकारी नियुक्त हो जाने के बाद भी वे बोर्ड के चेयरमैन के रूप में काम करते रहेंगे। शांतनु नारायण के इस्तीफे का फैसला ऐसे समय में आया है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में कंपनी के विकास और निवेशकों के बीच में गहरा संदेह बन रहा है।
तेलुगु हिंदू परिवार में हुआ जन्म
शांतनु नारायण का जन्म 27 मई 1963 को हैदराबाद में एक तेलुगु हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता प्लास्टिक का कारोबार करते थे और उनकी मां अंग्रेज़ी की शिक्षिका थीं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई हैदराबाद पब्लिक स्कूल से की। दिलचस्प बात यह है कि इसी स्कूल में आगे चलकर माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ Satya Nadella ने भी पढ़ाई की थी।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद शांतनु नारायण ने Osmania University के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।
2005 में बने कंपनी के प्रेसिडेंट
आपको बता दें कि शांतनु नारायण 2025 में कंपनी के प्रेसिडेंट बने थे और 44 साल की उम्र में उन्हें साल 2027 में एडोबे के सीईओ के तौर पर नियुक्त किया गया था। उनके ही नेतृत्व में एडोबे की जमकर ग्रोथ हुई। उन्होंने जब कंपनी ज्वॉइन की थी उस समय उसके कर्मचारियों की संख्या करीब 3000 थी जो अब बढ़कर करीब 30,000 से अधिक पहुंच गई है।
शांतनु नारायण के कार्यकाल में एडोबे की कमाई में भी जमकर इजाफा हुआ और आय 1 अरब डॉलर से बढ़कर 25 अरब डॉलर को भी पार कर गई। शांतनु नारायण ही थे जिन्होंने एडोब को पारंपरिक सॉफ्टवेयर लाइसेंस मॉडल से हटाकर क्लाउड-आधारित सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन मॉडल में बदला। 2024-25 में उनका सालान पैकेज करीब 450 करोड़ रुपये था।
