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Bajrang Punia Ban: पहलवान बजरंग पूनिया को लगा बड़ा झटका, 4 साल तक कुश्ती रिंग में नहीं दिखेंगे

Bajrang Punia Ban: ओलंपिक मेडलिस्ट बजरंग पूनिया को बड़ा झटका लगा है। उनको नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA)ने चार साल के लिए बैन कर दिया है। उन पर यह बैन एंटी डोपिंग कोड का उल्लंघन करने के कारण लगाया गया है। बजरंग टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाए थे।

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बजरंग पूनिया। (फोटो- Bajrang punia X)

Photo : Twitter

Bajrang Punia Ban: भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया को बड़ा झटका लगा है। बजरंग अगले साल साल तक कुश्ती रिंग में नहीं दिखेंगे। स्टार रेसलर बजरंग पून‍िया पर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी ने 4 साल का बैन लगा दिया है। उन पर यह बैन एंटी डोपिंग कोड का उल्लंघन करने के कारण लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजरंग पूनिया ने नेशनल टीम के लिए सलेक्शन ट्रॉयल के दौरान डोप टेस्ट के लिए अपना नमूता देने से मना कर दिया था। इसको लेकर नाडा ने 26 नवंबर को चार साल के लिए बैन कर दिया है। नाडा ने सबसे पहले टोक्यो ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट विजेता बजरंग को इस अपराध के लिए 23 अप्रैल को निलंबित किया था, जिसके बाद यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने भी उन्हें निलंबित कर दिया था। बजरंग ने अनंतिम निलंबन के खिलाफ अपील की थी और नाडा के अनुशासनात्मक डोपिंग रोधी पैनल (एडीडीपी) ने 31 मई को इसे रद्द कर दिया था, जब तक कि नाडा आरोप का नोटिस जारी नहीं कर देता। इसके बाद नाडा ने 23 जून को पहलवान को नोटिस भेजा।

कांग्रेस में शामिल हुए थे बजरंग

पिछले दिनों पहलवान विनेश फोगट के साथ बजरंग पूनिया कांग्रेस में शामिल हुए थे। बजरंग को अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का प्रभार दिया गया था। उन्होंने 11 जुलाई को लिखित रूप से चुनौती दी थी, जिसके बाद 20 सितंबर और 4 अक्टूबर को सुनवाई हुई थी। एडीडीपी ने अपने आदेश में कहा कि पैनल का मानना है कि एथलीट अनुच्छेद 10.3.1 के तहत प्रतिबंधों के लिए उत्तरदायी है और 4 साल की अवधि के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। निलंबन का मतलब है कि बजरंग प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी नहीं कर पाएंगे और अगर वह चाहें तो विदेश में कोचिंग की नौकरी के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएंगे।

एक्सपायर किट क्यों भेजी गई

बजरंग ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी नमूना देने से इनकार नहीं किया, बल्कि केवल अपने ईमेल पर नाडा की प्रतिक्रिया जानना चाहा था, जिसमें उन्होंने जवाब मांगा था कि दिसंबर 2023 में उनके नमूने लेने के लिए एक्सपायर किट क्यों भेजी गईं। नाडा ने अपनी कार्रवाई का कारण भी स्पष्ट करते हुए कहा कि चैपरोन/डीसीओ ने उनसे विधिवत संपर्क किया था और बताया था कि डोप विश्लेषण के लिए उन्हें मूत्र का नमूना देना आवश्यक है। बजरंग ने अपने लिखित अभिवेदन में कहा कि पिछले दो उदाहरणों में नाडा के आचरण ने एथलीट के मन में अविश्वास पैदा कर दिया है।

सीधे तौर पर इनकार नहीं था: बजरंग

बजरंग ने यह भी कहा कि यह सीधे तौर पर इनकार नहीं था। एथलीट हमेशा अपना नमूना देने के लिए तैयार था, बशर्ते कि उसे पहले NADA से एक्सपायर हो चुकी किट के इस्तेमाल के संबंध में जवाब मिले। हालांकि नाडा ने कहा कि डोप परीक्षण के लिए नमूना देने से एथलीट द्वारा किया गया साफ इनकार जानबूझकर किया गया था। एथलीट ने एंटी डोपिंग नियम, 2021 के अनुच्छेद 20.1 और 20.2 के अनुसार अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह से उपेक्षा प्रदर्शित की है।

20 से ज्यादा मेडल जीत चुके हैं बजरंग

भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया अपने करियर में अभी तक 20 से ज्यादा मेडल जीत चुके हैं। इसमें 7 गोल्ड मेडल, 8 सिल्वर मेडल और 6 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। बजरंग ने टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम गर्व से ऊंचा किया था। इसके अलावा बजरंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप में एक सिल्वर सहित तीन ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। इसी तरह एशियन गेम्स में एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल, कॉमनवेल्थ गेम्स में दो गोल्ड, चार सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं।

(पीटीआई इनपुट के साथ)

Shekhar Jha
शेखर झाauthor

शेखर झा टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वे मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल से हैं। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले शेखर ने शौकिया तौर पर साल 2011 में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। ये शौक वक्त के साथ जूनुन में बदल गया। उनके पास खेल पत्रकारिता का 12 साल का अनुभव है। क्रिकेट के अलावा टेनिस, कबड्डी और बैडमिंटन में खास रुचि है। खिलाड़ियों की बायोग्राफी पढ़ना उन्हें पसंद हैं। शेखर ने सुरेश रैना, संजय बांगड़, दीप्ति शर्मा, राधा यादव जैसे नामचीन भारतीय क्रिकेटरों सहित बैडमिंटन के स्टार भारतीय खिलाड़ियों लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। शेखर की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे जहां उनका पत्रकारिता से पहला परिचय हुआ। रायपुर के अग्रसेन कॉलेज में ग्रेजुएशन करते हुए पत्रकारिता का काम शुरू किया और इसके बाद रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्धालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और बतौर प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत की। शेखर ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2011 में ईटीवी छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश के साथ की। इस संस्थान में 6 महीने काम करने के बाद उन्होंने स्थानीय अखबार नेशनल लुक के साथ प्रिंट मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका समूह के छत्तीसगढ़ संस्करण से जुड़े और वहां तीन साल तक बतौर सब-एडिटर/रिपोर्टर सेवाएं दीं। इसके बाद भारत के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया समूह दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में रिपोर्टर की भूमिका अदा की और कई बड़े खुलासे स्थानीय स्तर पर किए। इसके बाद अपमे गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में दैनिक जागरण समूह के आईनेक्स्ट वेंचर से जुड़े। 8 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में बतौर रिपोर्टर वापसी हुई। रायपुर में दूसरी पारी के तीन साल के कार्यकाल के सफल निर्वहन के बाद मैनेजमेंट ने भास्कर के भोपाल स्थित नेशनल न्यूजरूम में ट्रांसफर कर दिया। जहां 17 महीने स्पोर्ट्स डेस्क पर बड़े इवेंट्स पर काम किया। इस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग, टोक्यो ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन का व्यापक कवरेज किया। भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में डिजिटल जर्नलिज्म का ककहरा सीखने के बाद फरवरी,2023 में टाइम्स ग्रुप के साथ जुड़ने का मौका मिला। तब से वह टाइम्स नाउ नवभारत की हिंदी वेबसाइट की स्पोर्ट्स डेस्क पर बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पान्डन्ट कार्यरत हैं। इस दौरान शेखर ने इंडियन प्रीमियर लीग, आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 को कवर किया।

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