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बड़ा फैसलाः SAI ने बीएफआई की अनियमितताएं गिनाई, मूल्यांकन शिविर निलंबित किया

SAI Suspends Assessment Camp: भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने पटियाला में भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) का मूल्यांकन शिविर ’अनियमितताओं’ के कारण निलंबित कर दिया है, लेकिन अगर महासंघ अपनी ’अपारदर्शी’ चयन प्रक्रिया में सुधार करता है और कोच के चयन के मानदंडों पर ’वैध सवालों’ का जवाब देता है तो वह इसे फिर से शुरू करने की अनुमति देने के लिए तैयार है।

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भारतीय खेल प्राधिकरण का बड़ा कदम

भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने पटियाला में भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) का मूल्यांकन शिविर ’अनियमितताओं’ के कारण निलंबित कर दिया है, लेकिन अगर महासंघ अपनी ’अपारदर्शी’ चयन प्रक्रिया में सुधार करता है और कोच के चयन के मानदंडों पर ’वैध सवालों’ का जवाब देता है तो वह इसे फिर से शुरू करने की अनुमति देने के लिए तैयार है।

साइ के एक विश्वसनीय सूत्र ने पीटीआई को बताया कि बीएफआई से मुक्केबाजों और कोच की चयन नीति में अनियमितताओं के संबंध में कुछ सवाल किए गए थे लेकिन उसने इनका जवाब नहीं दिया। इसके बाद रविवार की शाम को निलंबन का आदेश जारी किया गया। साइ ने कहा कि जो मुक्केबाज और कोच बीएफआई की नीति से प्रभावित हुए हैं उन्होंने कई तरह की शिकायत की हैं तथा महासंघ ने इस पर कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया है।

सूत्र ने कहा, "हमारे पास कई शिकायतें आई हैं, जिनमें मुक्केबाजों ने बताया है कि इस मूल्यांकन शिविर में नतीजे तुरंत जारी नहीं किए जाएंगे। इसके बजाय बीएफआई की तथाकथित उच्च प्रदर्शन इकाई (एचपीयू) चयन समिति के साथ चर्चा करने के बाद खिलाड़ियों का चयन करेगी"

उन्होंने कहा, "ऐसा करना निष्पक्षता के खिलाफ है और अगर इसे अदालत में चुनौती दी जाती है तो बीएफआई को तर्कसंगत स्पष्टीकरण देना होगा। लेकिन महासंघ हमारे सवालों का जवाब नहीं दे रहा है और वह तभी हमसे संपर्क करता है जब उसे किसी काम के लिए मंजूरी चाहिए होती है। इस तरह से काम नहीं चलेगा।"

सूत्र ने कहा, "हमने कोच पैनल को भी अस्थायी मंजूरी दे दी थी, लेकिन महासंघ जानबूझकर ’अस्थायी’ शब्द को नजरअंदाज कर रहा है और खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहा है। क्या महासंघ बता सकता है कि से लगातार संपर्क किए जाने के बाद भी उसने जवाब क्यों नहीं दिया। साइ के रिकॉर्ड में सब कुछ दर्ज है।"

अजय सिंह के नेतृत्व वाली बीएफआई ने यह दावा किया है कि उसने चयन नीति से संबंधित मामलों में हमेशा साइ को सूचित किया और उसे उचित मंजूरी हासिल की। अब तक पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किग्रा) तथा महिला वर्ग में प्रीति पवार (54 किग्रा) और प्रिया घंघास (60 किग्रा) ने पिछले महीने मंगोलिया में एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों दोनों के लिए क्वालीफाई किया है।

जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा) और अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) ने केवल राष्ट्रमंडल खेलों में जगह बनाई है क्योंकि उनके भार वर्ग एशियाई खेलों में शामिल नहीं हैं। राष्ट्रमंडल खेल जुलाई अगस्त में ग्लासगो में जबकि एशियाई खेल सितंबर-अक्टूबर में जापान के आइची-नागोया में होंगे।

राष्ट्रमंडल खेलों के लिए पुरुष वर्ग में 55 किग्रा, 60 किग्रा, 65 किग्रा, 70 किग्रा और 90 किग्रा से अधिक तथा महिला वर्ग में 51 किग्रा, 54 किग्रा, 57 किग्रा, 60 किग्रा, 65 किग्रा, 70 किग्रा और 75 किग्रा भार वर्ग शामिल हैं।

एशियाई खेलों में पुरुष 55 किग्रा, 60 किग्रा, 70 किग्रा, 80 किग्रा, 90 किग्रा और 90 किग्रा से अधिक भार वर्ग जबकि महिला खिलाड़ी 51 किग्रा, 54 किग्रा, 60 किग्रा, 65 किग्रा और 75 किग्रा भार वर्ग में चुनौती पेश करेंगे।

पटियाला में मूल्यांकन शिविर के दौरान उन भार वर्ग में खिलाड़ियों का चयन करना था जिनमें अभी तक किसी खिलाड़ी को नहीं चुना गया है।

सूत्र ने कहा, ’’अगर बीएफआई अब भी अपनी बात स्पष्ट कर दे और निष्पक्ष परिणाम सुनिश्चित कर सके तो वे शिविर आयोजित कर सकते हैं। हम उन्हें रोकने की कोशिश नहीं कर रहे हैं लेकिन हम शिकायतों को लेकर आंख मूंद कर भी नहीं बैठ सकते हैं।’’

इस विवाद की जड़ में हाल ही में पुणे में आयोजित चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) कप है। साइ के अनुसार इस प्रतियोगिता में उन मुक्केबाजों को प्रवेश नहीं दिया गया था जो सशस्त्र बलों की सूची में नहीं थे। सूत्र ने कहा, ’’यह किस तरह से निष्पक्ष और खुली प्रतियोगिता हो गई जबकि सेना के अधिक से अधिक मुक्केबाजों को जगह देने के लिए ड्रॉ में हेरफेर किया गया।’’

(भाषा इनपुट के साथ)

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

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