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Paris Olympics 2024: पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए कहीं खुशी-कहीं गम, जानिए किस खेल में मिला मेडल और कहां लगी निराशा हाथ

Paris Olympics 2024, India Tatal medals: पेरिस ओलंपिक 2024 का रोमांच अब खत्म हो चुका है। भारत ने कुल एक सिल्वर सहित 6 मेडल पर कब्जा जमाया। इसके साथ ही भारत पॉइंट टेबल में 71वें नंबर पर रहा। आइए जानते हैं कि भारत किस खेल में मेडल मिला और किस खेल में मेडल से चूक गए।

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भारतीय पुरुष हॉकी टीम के खिलाड़ी और नीरज चोपड़ा। (फोटो- Hockey India/Neeraj Chopra X)

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Paris Olympics 2024, India Tatal medals: भारत के लिए पेरिस ओलंपिक में प्रदर्शन अच्छा और बुरा दोनों रहा जिसमें एक तरफ जहां युवा निशानेबाज मनु भाकर ने दो पदक जीते तो वहीं भाला फेंक सुपरस्टार नीरज चोपड़ा का रजत पदक उम्मीदों से कमतर रहा जबकि विनेश फोगाट का फाइनल से पहले अयोग्य ठहराया जाना निराशाजनक रहा जिसमें छह खिलाड़ियों के चौथे स्थान नासूर रहे। ओलंपिक के शुरू में पदक तालिका में दोहरे पदकों तक पहुंचना बहुत महत्वाकांक्षी लग रहा था लेकिन कई खिलाड़ियों के करीब से चूकने का काफी असर पड़ा। इसमें ‘क्या होता’ के कई सवाल उठे।

क्या होता अगर बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन कांस्य पदक के प्ले-ऑफ में अचानक हारते नहीं, क्या होता अगर तीरंदाज दीपिका कुमारी क्वार्टर फाइनल में कोरिया के खिलाफ एक शॉट में चूक नहीं जाती और क्या होता अगर मीराबाई चानू ने सिर्फ एक किलोग्राम वजन और उठा लिया होता? किसी को उम्मीद नहीं थी कि सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी पदक के बिना विदा होंगे। किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि स्वप्निल कुसाले स्कीट पदक के लिए इंतजार खत्म कर देंगे।

देश के 117 सदस्यीय दल में महज छह पदक आना आदर्श नहीं हैं लेकिन भारत के लिए इस दौरान खुशी, उम्मीद, निराशा और दुख के पल भी आए। भारत तोक्यो ओलंपिक में जीते गए सात पदकों की बराबरी नहीं कर सका। अगर चौथे स्थान पर रहने वाले छह खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहते तो तालिका में दोहरे पदकों की संख्या संभव थी।

हॉकी में मिली खुशी

पुरुष हॉकी टीम के ओलंपिक में लगातार दूसरा पदक जीतने की क्षमता पर सवाल बने हुए थे। टीम तोक्यो में जीते गए पदक के रंग को बेहतर नहीं कर सकी, लेकिन जिस तरह से उसने ऑस्ट्रेलिया को हराया, बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला खेला और जर्मनी और ब्रिटेन के खिलाफ दबाव झेला, उससे पता चलता है कि हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली यह टीम मानसिक रूप से कितनी मजबूत हो गई है।भारतीय टीम ‘अंडरडॉग’ की तरह शामिल हुई लेकिन चैंपियन की तरह खेली। गोलकीपर पीआर श्रीजेश के लिए संन्यास लेने के लिए यह बिलकुल सही समय था, जिन्होंने तोक्यो कांस्य से पहले अपनी पहचान हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे खेल के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। श्रीजेश भारत के लिए अपना करियर खत्म करने वाले अकेले खिलाड़ी नहीं थे। पेरिस ओलंपिक निश्चित रूप से टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना और टेबल टेनिस खिलाड़ी शरत कमल के लिए आखिरी ओलंपिक थे। ऐसी संभावना है कि स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू 2028 ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा नहीं करें।

विनेश के दिल को झकझोर देने वाला ओलंपिक

भाग्य ने श्रीजेश को शानदार विदाई दी, लेकिन पहलवान विनेश फोगाट अपनी आत्मा पर कभी नहीं भरने वाला घाव लेकर मंच से चली गईं। एक मुश्किल मुकाबले के बाद एक मामूली हार और एक चुनौतीपूर्ण हार दोनों ही हो सकती है, लेकिन उनके मामले में वह जीतने के बावजूद हार गईं। यह उनकी काबिलियत या कौशल का सवाल नहीं था बल्कि तकनीकी पक्ष था जिसने उनसे पदक छीन लिया। अगर कोई एक भारतीय महिला पहलवान ओलंपिक पदक की हकदार थी तो वह विनेश ही थीं जिन्होंने साल भर लगातार खिताब और पदक जीतकर अपनी बादशाहत साबित कर दी थी। उनकी वापसी में न तो कम तैयारी और न ही युई सुसाकी बाधा बन सकीं लेकिन उनका अपना 100 ग्राम का वजन इन सब पर पानी फेर गया। विनेश ने इस घटना के बाद खेल से संन्यास की घोषणा कर दी और अब वह अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ अपनी अपील पर फैसले का इंतजार कर रही हैं।

निशानेबाजों ने आखिरकार पदक जीते

युवा मनु भाकर की अगुआई में निशानेबाजों का प्रदर्शन भारत के लिए राहत भरा रहा क्योंकि छह में से तीन पदक निशानेबाजी से आए। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि 22 वर्षीय भाकर ने अपने अभूतपूर्व प्रदर्शन से भारत का मान बचाया। उन्होंने मिश्रित टीम 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में सरबजोत सिंह के साथ मिलकर एक और कांस्य पदक जीता। जब एक पदक भी ‘स्टारडम’ की गारंटी देता है तो भाकर के दोहरे पदक ने उन्हें एक अलग ही श्रेणी में ला खड़ा किया है। बहुत कम लोगों ने कुसाले को स्कीट निशानेबाजी में भारत के लिए पहला पदक जीतने की उम्मीद की होगी। पर कल्पना कीजिए कि अगर निशानेबाजों ने फिर से धोखा दिया होता तो भारत पदक तालिका में कहां होता।

नीरज ने जीता सिल्वर मेडल

नीरज ने 89.45 मीटर के सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ क्वालीफिकेशन में शीर्ष स्थान प्राप्त करके भारत को एक और स्वर्ण की उम्मीद दी। नीरज जांघ की समस्या के बावजूद तैयार थे। पर पाकिस्तान के अरशद नदीम ने 92.97 मीटर का शानदार थ्रो फेंककर सचमुच प्रतियोगिता खत्म कर दी। नीरज 89.34 मीटर से बेहतर थ्रो नहीं कर पाए। उनसे ऐसी उम्मीदें थीं कि रजत भी हार जैसा लग रहा था।

मुक्केबाजों ने निराश किया, अमन ने कुश्ती अभियान को बचाया

कोई भी मुक्केबाज पदक दौर में नहीं पहुंच सका लेकिन निशांत देव की हार सबसे ज्यादा खलेगी। एक अन्य दावेदार निकहत जरीन भी रो पड़ीं। हालांकि पहलवान अमन सेहरावत ने सुनिश्चित किया कि कुश्ती से पदक मिले। टीम में शामिल एकमात्र भारतीय पुरुष पहलवान उम्मीदों पर खरा उतरा। 57 किग्रा वर्ग में रवि दहिया की जगह लेने के पीछे भी कुछ कारण था और उन्होंने इसे साबित भी किया। कुश्ती ने लगातार पांचवें ओलंपिक में पदक जीता। सबसे निराशाजनक प्रदर्शन अंतिम पंघाल और अंशु मलिक का रहा। उनकी फिटनेस हमेशा संदेह के घेरे में रही।

भविष्य की उम्मीद

टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा और श्रीजा अकुला ने पहली बार व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन किया। लक्ष्य सेन भले ही बैडमिंटन में कांस्य पदक से चूक गए हों और पहलवान रीतिका हुड्डा पदक दौर में नहीं पहुंच पाईं लेकिन उन्होंने दिखाया कि उनमें बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है।

(भाषा)

Shekhar Jha
शेखर झाauthor

शेखर झा टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वे मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल से हैं। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले शेखर ने शौकिया तौर पर साल 2011 में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। ये शौक वक्त के साथ जूनुन में बदल गया। उनके पास खेल पत्रकारिता का 12 साल का अनुभव है। क्रिकेट के अलावा टेनिस, कबड्डी और बैडमिंटन में खास रुचि है। खिलाड़ियों की बायोग्राफी पढ़ना उन्हें पसंद हैं। शेखर ने सुरेश रैना, संजय बांगड़, दीप्ति शर्मा, राधा यादव जैसे नामचीन भारतीय क्रिकेटरों सहित बैडमिंटन के स्टार भारतीय खिलाड़ियों लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। शेखर की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे जहां उनका पत्रकारिता से पहला परिचय हुआ। रायपुर के अग्रसेन कॉलेज में ग्रेजुएशन करते हुए पत्रकारिता का काम शुरू किया और इसके बाद रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्धालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और बतौर प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत की। शेखर ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2011 में ईटीवी छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश के साथ की। इस संस्थान में 6 महीने काम करने के बाद उन्होंने स्थानीय अखबार नेशनल लुक के साथ प्रिंट मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका समूह के छत्तीसगढ़ संस्करण से जुड़े और वहां तीन साल तक बतौर सब-एडिटर/रिपोर्टर सेवाएं दीं। इसके बाद भारत के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया समूह दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में रिपोर्टर की भूमिका अदा की और कई बड़े खुलासे स्थानीय स्तर पर किए। इसके बाद अपमे गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में दैनिक जागरण समूह के आईनेक्स्ट वेंचर से जुड़े। 8 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में बतौर रिपोर्टर वापसी हुई। रायपुर में दूसरी पारी के तीन साल के कार्यकाल के सफल निर्वहन के बाद मैनेजमेंट ने भास्कर के भोपाल स्थित नेशनल न्यूजरूम में ट्रांसफर कर दिया। जहां 17 महीने स्पोर्ट्स डेस्क पर बड़े इवेंट्स पर काम किया। इस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग, टोक्यो ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन का व्यापक कवरेज किया। भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में डिजिटल जर्नलिज्म का ककहरा सीखने के बाद फरवरी,2023 में टाइम्स ग्रुप के साथ जुड़ने का मौका मिला। तब से वह टाइम्स नाउ नवभारत की हिंदी वेबसाइट की स्पोर्ट्स डेस्क पर बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पान्डन्ट कार्यरत हैं। इस दौरान शेखर ने इंडियन प्रीमियर लीग, आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 को कवर किया।

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